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इस्सेवाल सामूहिक दुष्कर्म कांड: इंसाफ मिलने के बाद पीड़िता की जिंदगी में घुले रंग, कहा-अब सब कुछ भूलकर आगे बढ़ूंगी, नई शुरुआत करूंगी

Wed, 16 Mar 2022 11:32 AM IST
निवेदिता वर्मा कंवरपाल, संवाद न्यूज एजेंसी, हलवारा (लुधियाना)

सार

इस्सेवाल सामूहिक दुष्कर्म कांड में करीब तीन साल चली कानूनी लड़ाई में आखिर पीड़िता को इंसाफ मिला। हालांकि उसकी जिंदगी में जो काला अध्याय जुड़ा है, वह उसे रह रहकर सताता रहेगा।
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इस्सेवाल सामूहिक दुष्कर्म कांड। - फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
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इस्सेवाल सामूहिक दुष्कर्म, एक ऐसा मामला जिसने दिल्ली के निर्भया कांड की निर्मम यादें ताजा कर दीं। 9 फरवरी 2019 की रात एक युवा जोड़े के लिए कयामत बन गई। अपने दोस्त के साथ चॉकलेट डे सेलिब्रेट करने निकली युवती का कुछ आरोपियों ने अपहरण किया। गांव इस्सेवाल के सुनसान प्लॉट में ले जाकर सारी रात उससे मारपीट की। सुबह चार बजे तक सामूहिक दुष्कर्म किया गया। युवती के दोस्त को बांधकर पीटा गया। उसकी आंखों के सामने दरिंदे हैवानियत का खेल खेलते रहे। दरिंदों ने युवती के दोस्त जसप्रीत जस्सा से फोन कर 2 लाख रुपये की फिरौती भी मांगी। सुबह तक फिरौती नहीं मिली तो बेहोशी की हालत में दोनों को छोड़कर आरोपी फरार हो गए। 

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अगले दिन यानी 10 फरवरी को थाना दाखा में केस दर्ज कराया गया। पीड़िता की हालत जिसने भी देखी, उसकी आत्मा कांप उठी। थानों की चौखट से निकलकर मामला अदालत में पहुंचा और पांच दरिंदों जगरूप सिंह रुपी, सादिक अली, सैफ अली, सुरमु, अजय उर्फ लल्लन उर्फ ब्रिज नंदन को आजीवन कारावास और प्रति दोषी एक लाख तीस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। घटना के समय नाबालिग रहे लियाकत अली को 20 साल और 80 हजार रुपये जुर्माने की सुनाई गई है। पांचों दरिंदों को अपनी अंतिम सांस तक जेल में रहना होगा।

जज रश्मि शर्मा ने सुनाया था फैसला 

जिला अदालत की स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में चली सुनवाई की बदौलत इतनी जल्दी यह मामला इंसाफ की दहलीज तक पहुंच पाया। जज रश्मि शर्मा ने अपने ऐतिहासिक फैसले में इसे एक और निर्भया नाम से संबोधित किया। उन्होंने फैसले को उन हजारों निर्भया को समर्पित किया, जो लोक लाज और शर्म के कारण आगे नहीं आ सकीं। या फिर समाज ने जिनकी जुबान बंद कर दी। जज रश्मि शर्मा ने लिखा है कि यौन हिंसा का शिकार होने वाली पीड़िता के शारीरिक जख्म तो भर जाएंगे लेकिन उसके दिल दिमाग के घाव हमेशा ताजा रहेंगे। बेशक समाज को जागने और चेतन होने में समय लग सकता है, लेकिन इस फैसले से एक संदेश साफ होना चाहिए कि शर्म यौन हिंसा पीड़ित को नहीं बल्कि दरिंदों को आनी चाहिए। 

मनुस्मृति के एक श्लोक का हवाला देते हुए रश्मि शर्मा ने लिखा है कि हमारे देश में महिला को देवी का दर्जा दिया गया है। कंजक पूजा की जाती है, लेकिन उन्हीं बेटियों के साथ होने वाले ऐसे कृत्य समाज में सभी पुण्य कार्यों को निष्फल कर देते हैं। जब एक महिला ऐसे अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद करती है तो उसे मिलने वाला इंसाफ सभी पीड़ित महिलाओं के लिए भी होता है, जो आगे आकर खुद इंसाफ नहीं ले सकीं। उन्होंने लिखा है कि 9 फरवरी 2019 की रात घूमने निकले जोड़े ने सोचा भी नहीं होगा कि यह रात उन्हें गहरे अंधकार में धकेल देगी। दोनों के पास अब अदालत से मिलने वाला इंसाफ ही एक मात्र उम्मीद है। 

चार दिन में गिरफ्तार किए गए थे सभी दरिंदे

केस सुर्खियों में आते ही पुलिस के आला अधिकारी खुद सक्रिय हुए। आईजी वी नीरजा की अध्यक्षता में एसआईटी गठित कर चार दिन में ही सभी छह दरिंदों को दबोच लिया गया। 40 दिन में मुकदमे का चालान भी पेश कर दिया। सरकारी पक्ष ने 57 गवाह खड़े किए, जिनमें से तीन को बाहर कर दिया गया। पीड़िता, उसके दोस्त और मुख्य गवाह जसप्रीत जस्सा समेत 54 गवाहों की बदौलत मुकदमा इंसाफ तक पहुंचा। इसमें  सीएफएसएल मोहाली और सेहत विभाग के तकनीकी सुबूत भी पूरी तरह सही साबित हुए। डीएनए मैपिंग, आवाज के नमूनों का मिलान, पैरों के निशान, वाहन के टायरों के निशान, मोबाइल लोकेशन और मोबाइल डंप ट्रेसिंग ये तमाम तकनीकी सुबूत आरोप का सही साबित करने में काम आए। मुकदमे की 120वीं पेशी पर दरिंदे अपने अंजाम तक पहुंच पाए।

संशोधित एक्ट के कारण ही नाबालिग को मिली कड़ी सजा

सरकारी वकील बीडी गुप्ता ने बताया कि यह फैसला ऐतिहासिक है। दिल्ली में हुए निर्भया मामले के बाद जुवेनाइल एक्ट में संशोधन करते हुए केंद्र सरकार ने द जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन) एक्ट 2015 बनाया था। इसके तहत ऐसे जघन्य अपराध करने वाले 16 से 18 वर्ष के पुरुषों का मुकदमा बालिग की तरह ही चलाए जाने का कानून था। निर्भया केस में सबसे क्रूर होने के बावजूद नाबालिग को सिर्फ 3 साल की ही सजा हुई थी। आज वह आजाद घूम रहा है। इसके बाद देश में एक बहस छिड़ी और एक्ट में संशोधन किया गया। इस संशोधन के कारण ही इस्सेवाल सामूहिक दुष्कर्म के नाबालिग आरोपी लियाकत अली को उम्रकैद (20 साल) की सजा मिली।

काली रात ने पीड़िता की जिंदगी में भर दिया अंधेरा

इस्सेवाल सामूहिक दुष्कर्म कांड ने पीड़िता की जिंदगी को अंधेरे में धकेल दिया। उसकी मां एक प्राइवेट स्कूल में नौकरी करती थी। पिता का साया उसके सिर से तभी उठा गया, जब वह महज डेढ़ साल की थी। मां ने तमाम मुसीबतें उठाकर बेटी को पाला। जब बेटी 20 साल की हुई तो 9 फरवरी 2019 की रात वह अनहोनी घटी, जिसने मां बेटी की दुनिया ही उजाड़ दी। उन्हें पुलिस थाने में शिकायत न करने के लिए पहले धमकी, फिर लालच दिया गया, लेकिन पीड़िता अपनी अस्मत की लड़ाई लड़ने से पीछे नहीं हटी। हालांकि मारे दहशत के पीड़िता को शहर तक छोड़ना पड़ा। 

यूं लगा जिंदगी ठहर गई, सब कुछ खत्म हो गया

पीड़िता के मुताबिक, घटना के पहले के 20 साल एक सुनहरे सपने की तरह थे। इनमें वह अपनी मर्जी से रंग भर रही थी। कामयाब होकर एक अच्छी जिंदगी जीना चाहती थी। लेकिन कुछ दरिंदों ने अपनी हवस की आग में उसके सपनों को जला दिया। इस घटना ने शारीरिक ही नहीं, मानसिक घाव भी दिए। शरीर के जख्म वक्त के साथ भरते चले गए लेकिन दिलो दिमाग पर छाई वहशत से छुटकारा नहीं मिला। सारा दिन बेड पर लेटी रहती। रात को अचानक नींद से जागती और पागलों की तरह सिर पटकने लगती। मेरी हालत देख मां बेहाल हो जातीं। उन्होंने ही उस कठिन दौर से मुझे निकाला। पंजाब पुलिस की नौकरी का ऑफर ठुकराकर मैं जयपुर चली गई। वहां जाकर नए सिरे से जिंदगी शुरू की। इन दिनों दिल्ली में प्राइवेट नौकरी कर रही हूं। जो बीता है, उसे भूलना चाहती हूं। दरिंदों को सजा मिल गई है। अब शायद लुधियाना लौट सकूं। 

मेरी आंखों के सामने हुई हैवानियत, शर्मिंदा हूं, अपनी दोस्त को बचा न सका

पीड़िता का दोस्त भी इस कांड के बाद से उबर नहीं पाया है। हालांकि इंसाफ मिलने के बाद वह अदालत का शुक्रगुजार है, लेकिन उन लम्हों को याद कर कांप उठता है, जब उसकी आंखों के सामने दरिंदे उसकी दोस्त की अस्मत से खेल रहे थे, और वह लाचार था। दरिंदों ने उसे भी रात भर रस्सियों से बांधकर पीटा। उसने जिंदगी की उम्मीद खो दी थी। रकम के लालच में आरोपियों ने उसके दोस्त जसप्रीत को फोन भी कराया। सुबह चार बजे तक फिरौती की रकम का इंतजार किया। इसके बाद सुबह वह हमें अधमरी हालत में छोड़कर चले गए। 

महिला दिवस पर आया फैसला, पीड़िता की बहादुरी को समर्पित

एसआईटी की प्रमुख तत्कालीन आईजी और मौजूदा एडीजीपी वी नीरजा ने कहा कि 8 मार्च को महिला दिवस से पहले आया फैसला पीड़िता की बहादुरी को समर्पित है। फैसले से सभी महिलाओं को अत्याचार के खिलाफ लड़ने की ताकत मिलेगी। वी नीरजा ने बताया कि मुख्य आरोपी जगरूप सिंह के मोबाइल से 12 से अधिक महिलाओं के साथ दुष्कर्म किए जाने के सनसनीखेज सुबूत मिले थे। आरोपी 2017 से महिलाओं को अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म, लूट और फिरौती वसूली के अपराध करते आ रहे थे। लोक लाज के डर से कोई महिला रिपोर्ट करने आगे नहीं आई। इनमें कई महिलाएं 45 या उससे भी अधिक उम्र की भी रही थीं। आरोपियों ने जनवरी 2019 में भी हर वीकेंड पर कई महिलाओं से दुष्कर्म किया था। फिर 9 फरवरी 2019 की रात इस्सेवाल की घटना को अंजाम दिया और ये अपराध इस गैंग का आखिरी अपराध बन गया। पीड़िता ने बहादुरी दिखाई और आगे आकर कई और महिलाओं को इस गैंग का शिकार होने से बचा लिया। 

इन धाराओं में सुनाई गई सजा

सभी 6 आरोपियों को अदालत द्वारा दफा 341, 427, 364 ए, 342, 354, 354 बी, 376 डी, 411, 395, 34 आईपीसी और 66 आईटी एक्ट में दोषी करार दिया गया था। इसमें मुख्य तौर पर जगरूप सिंह रुपी, सादिक अली, सैफ अली, सुरमु और अजय उर्फ लल्लन उर्फ ब्रिज नंदन को एक्सटॉरशन की धारा 364 में उम्रकैद ( 20 साल ) और गैंगरेप की धारा 376 डी में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। वहीं आरोपी लियाकत अली को एक्सटॉरशन की धारा 364 में 10 साल और गैंगरेप की धारा 376 डी में उम्रकैद ( 20 साल) की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा अन्य सभी धाराओं में सजा का एलान किया गया है।
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कब क्या हुआ

9 फरवरी 2019 की रात 8 बजे:  दरिंदों ने किया अगवा, सारी रात किया सामूहिक दुष्कर्म, मारा पीटा
10 फरवरी तड़के 4 बजे:  आरोपी उन्हें अधमरी हालत में छोड़कर हो गए फरार
10 फरवरी रात 9 बजे:  पीड़िता और उसके दोस्त का सिविल अस्पताल में मेडिकल कराया
10 फरवरी रात 11 बजे:  जिला लुधियाना ग्रामीण के थाना दाखा में मुकद्दमा दर्ज
14 फरवरी: पुलिस ने दुष्कर्म कांड के सभी आरोपियों को किया गिरफ्तार
22 फरवरी: जज अंकित ऐरी ने सेंट्रल जेल लुधियाना में आरोपियों की शिनाख्त परेड कराई, पीड़िता और उसके दोस्त ने पहचाना 
11 अप्रैल: पुलिस ने मुकद्दमे में चालान पेश किया
22 अप्रैल:  नाबालिग आरोपी के खिलाफ अलग से चार्जशीट दाखिल की गई
22 दिसंबर 2020: पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी जगरूप सिंह को नियमित जमानत दे दी 
12 फरवरी 2021: सुप्रीम कोर्ट ने इस जमानत के खिलाफ पीड़िता के निजी वकील द्वारा दाखिल याचिका को रद्द करते हुए हाईकोर्ट के फैसले में दखल से किया इनकार 
28 जुलाई 2021: सुप्रीम कोर्ट ने जगरूप की जमानत को रद्द करने के लिए पंजाब सरकार की याचिका भी रद्द कर दी
28 फरवरी 2022: जिला अदालत की स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट की जज रश्मि शर्मा ने सभी 6 आरोपियों को दोषी करार दिया
4 मार्च 2022: सभी दरिंदों को उनके अपराध के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई
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