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पंजाब: अरुणाचल में कुर्बान हुए पठानकोट के रणबांकुरे राइफल मैन अक्षय पठानिया, मां को वीडियो कॉल कर कहा था- अपना ध्यान रखना...

Wed, 09 Feb 2022 07:40 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट (पंजाब)

सार

गुरुवार को शहीद का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। शहीद के पिता ने बताया कि उनकी तीसरी पीढ़ी भारतीय सेना में सेवाएं दे रही है। घर में छोटा होने के कारण रिश्तेदार कहते थे कि अक्षय को सेना में मत भेजो, उन्हें अक्षय को खोने का दुख तो है, लेकिन शहादत पर गर्व है।
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परिवार में गम का माहौल, शहीद राइफल मैन अक्षय पठानिया की फाइल फोटो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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अरुणाचल प्रदेश के इंडो-चाइना बॉर्डर पर गश्त के दौरान सेना की 19 जैक राइफल्स यूनिट में तैनात देश के 7 जाबांज सैनिक रविवार को बर्फीले तूफान की चपेट में आने से शहादत का जाम पी गए। उनमें से एक जवान जिला पठानकोट के गांव चक्कड़ निवासी 24 वर्षीय राइफल मैन अक्षय पठानिया भी थे। सोमवार देर शाम शहीद के पिता पूर्व सैनिक हवलदार सागर सिंह पठानिया को बेटे की यूनिट से उसकी शहादत की खबर मिली तो परिवार के साथ-साथ पूरे गांव में मातम छा गया।

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पूरे गांव के लाडले अक्षय पठानिया की शहादत के कारण गमगीन माहौल में पूरे गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। वह अपने बड़े भाई सिपाही अमित पठानिया जोकि सेना की 14 जैक राइफल यूनिट तिब्बड़ी में तैनात हैं एवं बहन रवीना पठानिया में सबसे छोटा होने के साथ-साथ सबके प्रिय थे।

बेटे के जाने का दुख, मगर शहादत पर गर्व : शहीद के पिता

शहीद राइफल मैन अक्षय पठानिया के पिता सेवानिवृत्त हवलदार सागर सिंह पठानिया ने नम आंखों से बताया कि उनकी तीसरी पीढ़ी भारतीय सेना में सेवाएं दे रही है। घर में छोटा होने के कारण रिश्तेदार कहते थे कि अक्षय को सेना में मत भेजो, मगर उन्होंने अपने परिवार की सैन्य पृष्ठभूमि को प्राथमिकता देते हुए किसी की भी बात न मानते हुए अक्षय को फौज में भर्ती करवा दिया। उन्होंने कहा कि बेटे के जाने का उन्हें दुख तो बहुत है, मगर उसकी शहादत पर गर्व भी है कि वह देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देकर अपना सैन्य धर्म निभा गया। 

शहीद राइफल मैन अक्षय पठानिया की मां रितू पठानिया को ढांढस बंधाते कुंवर रविन्द्र विक्की।

वीडियो कॉल कर कहा था अपना ध्यान रखना : शहीद की मां

शहीद अक्षय की मां रितू पठानिया ने बिलखते हुए बताया कि अक्षय बेशक सेना में भर्ती था, लेकिन वह उसे हर रोज वीडियो कॉल करके उसका हाल पूछता था और 2 फरवरी को भी अक्षय ने उन्हें वीडियो कॉल की तथा जैसे ही उसने हैलो की तो अक्षय ने कहा कि मां अपना ध्यान रखना, इतनी बात कहते ही फोन कट गया और उसके पश्चात उसका फोन नहीं आया।

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मां रितू पठानिया ने बताया कि बेटे के फोन लाइन क्या कटी, मानो उनकी तो दुनिया ही उजड़ गई। शहीद की मां ने बताया कि अक्षय कहता था कि वह जल्द छुट्टी पर आएगा, मगर उन्हें क्या पता कि अब उनका बेटा लंबी छुट्टी पर चला गया है, जहां से वो कभी वापस नहीं आएगा।

90 फीसदी सेना में दे रहे सेवाएं : सुरक्षा परिषद महासचिव

शहीद परिवार के साथ दुख बांटने पहुंचे शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविन्द्र सिंह विक्की ने बताया कि गांव चक्कड़ एक ऐसा गांव है, जो सैनिकों व स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से जाना जाता है। जहां इस गांव में 90 प्रतिशत सैनिक देश की सेवा कर चुके हैं और कर रहे हैं, वहीं इस गांव ने देश को दो स्वतंत्रता सेनानी भी दिए हैं। इस गांव के सैनिकों ने जहां 1965 व 1971 की भारत-पाक जंग में अपने वीरता के जौहर दिखाए, वहीं कश्मीर में पाक द्वारा छेड़े अघोषित युद्ध में भी इस गांव के युवा दुश्मन को करारी शिकस्त दे रहे हैं। देश की बलिवेदी पर कुर्बान होने वाले अक्षय इस गांव के पहले ऐसे सैनिक है, जिन्होंने अपना नाम शहीदों की श्रृंखला में अंकित करवा लिया है। कुंवर विक्की ने बताया कि शहीद राइफल मैन अक्षय पठानिया की तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह वीरवार 10 फरवरी को गांव चक्कड़ में पहुंचेगी, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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