अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद वहां रहने वाले हिंदू और सिख परिवार खौफ के साए में हैं। अपनी जान बचाने के लिए उन्होंने मंदिर और गुरुद्वारा साहिब में शरण ले रखी है। हालात इस कदर बदतर होते जा रहे हैं कि गुरुद्वारा साहिब में लंगर की कमी होने लगी है।
पहले लोगों ने काबुल शहर के गुरुद्वारा मंसा साहिब में शरण ले रखी थी, अब इसे छोड़ गुरुद्वारा कारते परवाना साहिब में पहुंच गए हैं। यहां पर लगभग दो सौ लोग शरण लेकर बैठे हैं, जोकि वहां से निकलने का इंतजार कर रहे हैं।
तालिबान के कब्जे के बाद वहां से धार्मिक स्थलों के बाहर से अफगान सेना गायब हो चुकी है। ऐसे में तालिबाना लड़ाके मंदिर और गुरुद्वारा में आकर पूछताछ कर रहे हैं। लुधियाना के छावनी मोहल्ला निवासी शम्मी सिंह वर्ष 2012 में अफगानिस्तान को छोड़ यहां आ गए थे। उन्होंने बताया कि रविवार को उन्होंने अपने दोस्त जोगिंदर सिंह और मेहर सिंह से बात की थी।
उन्होंने बताया कि वह बीते 10 दिन से गुरुद्वारा मंसा साहिब में शरण लिए थे। लेकिन अब वह गुरुद्वारा कारते परवाना साहिब में चले गए हैं। इस गुरुद्वारा साहिब में लगभग दो सौ लोग शरण लिए हुए हैं। रविवार को उनकी अपने दोस्तों के साथ फोन पर बात हुई थी लेकिन अब कोई संपर्क नहीं हो रहा है।
गुरुद्वारा साहिब के बाहर पहले अफगान फौजी तैनात थे, तालिबाना का कब्जा होते ही वह वहां से चले गए हैं। वह इतना डरे हुए हैं कि किसी भी समय कुछ भी हो सकता है। डर के चलते वह यहां से बाहर निकल भी नहीं सकते।
शम्मी सिंह बताते हैं कि श्योर बाजार में कई सिख व हिंदू लोग मसाले व पंसारी का काम करते हैं। हिंदुओं और सिखों पर पहले ही वहां अत्याचार हो रहे थे और अब तो उनका वहां पर जीना मुश्किल हो जाएगा। वर्ष 2012 में श्योर से ही 40 के करीब परिवार लुधियाना आकर बस गए थे। उस समय वहां अमेरिका की फौज थी लेकिन अत्याचार काफी ज्यादा थे।