जलियांवाला बाग नेशनल मेमोरियल ट्रस्ट के सदस्य राज्यसभा सांसद श्वेत मलिक भी इस नवीनीकरण को सही मानते हैं। उनका दावा है कि विकास कार्य को करते समय बाग की विरासत के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है और पर्यटकों को इसे देखने के लिए कोई टिकट नहीं लेनी होगी। बता दें कि जलियांवाला बाग नेशनल मेमोरियल ट्रस्ट के ट्रस्टियों में चेयरमैन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, जबकि पंजाब के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय संस्कृति मंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और तीन नामित सदस्य (पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, पूर्व सांसद तरलोचन सिंह, सांसद श्वेत मलिक) इसके ट्रस्टी हैं।
हटानी पड़ी थीं अर्धनग्न तस्वीरें
इंटरनेशनल सर्व कम्बोज समाज के अध्यक्ष शिंदरपाल सिंह कम्बोज ने बताया कि बाग में बनाई गैलरी में महाराजा रणजीत सिंह की लड़ाइयों की तस्वीरों के ठीक नीचे दो महिलाओं की अर्धनग्न तस्वीरें लगा दी गई थीं। बगल की ही दीवार पर श्री गुरुनानक देवजी की तस्वीर भी लगी हुई थी। ऐसे में जब बवाल खड़ा हुआ तो खजुराहो शैली की इन अर्धनग्न तस्वीरों को तुरंत हटाना पड़ा। कम्बोज भी मानते हैं कि नवीनीकरण की आड़ में बाग की मूल स्थिति से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए थी। मोक्ष स्थल, अमर ज्योति और ध्वज मस्तूल को समाहित करने के लिए जो कार्य किया गया है, वह भी समझ से परे है।