मनीष गुप्ता हत्याकांड के चश्मदीदों को एसआईटी ने बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा है। तीनों चश्मदीद के बयान केस में बेहद अहम हैं। पहले भी उनको बयानों के लिए नोटिस जारी किया जा चुका लेकिन अभी तक उन्होंने बयान दर्ज नहीं कराए हैं। बयान न होने की स्थित में जांच में देरी हो रही है। बर्रा तीन निवासी मनीष गुप्ता 27 सितंबर को गोरखपुर गए थे। वह होटल कृष्णा पैलेस होटल में अपने गुरुग्राम निवासी दोस्त हरवीर सिंह व प्रदीप कुमार के साथ कमरा नंबर 512 में ठहरे थे। रात में पुलिस ने दबिश दी थी। पिटाई से मनीष की मौत हो गई थी। मामले में रामगढ़ताल थाने के इंस्पेक्टर समेत छह पुलिसकर्मी जेल भेजे जा चुके हैं। वारदात में एसआईटी ने हरवीर सिंह, प्रदीप कुमार व होटल के कर्मचारी आदर्श पांडेय को गवाह बनाया है। ये तीनों घटना के चश्मदीद हैं।
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इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह व मनीष की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
घटना के बाद हरवीर व प्रदीप ने गोरखपुर जाकर बयान दर्ज कराने से मना कर दिया था। उनका कहना था कि वह दहशत में हैं। अभी गोरखपुर नहीं जाएंगे। बाद में उन्होंने कहा था कि वह नवरात्र के बाद बयान दर्ज कराएंगे।
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मनीष हत्याकांड: सीसीटीवी में कैद हुए हत्यारोपी पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला।
मगर अभी तक वह नहीं पहुंचे हैं। इसलिए एक बार फिर से एसआईटी ने उनको नोटिस भेजा है। जिसमें बयान दर्ज कराने के लिए कहा गया है। होटल कर्मचारी को भी बयान दर्ज कराने को कहा गया है।
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मृतक कारोबारी मनीष गुप्ता।
- फोटो : amar ujala
बयानों से तय होनी हैं केस की धाराएं
पुलिस ने एफआईआर में हत्या की धारा लगाई है। वारदात हत्या की है या गैर इरादतन हत्या इस बिंदु पर जांच चल रही है। मगर एसआईटी चश्मदीदों के बयानों पर निर्भर है। कोर्ट में इन तीनों के बयान होने हैं। जो बयान होंगे उसी आधार पर केस की धारा तय की जाएगी कि केस हत्या में चलेगा या गैर इरादतन हत्या में चलेगा। बयानों में अगर कोई और आरोप लगाया गया तो धाराओं में बढ़ोत्तरी की जाएगी।
मृतक व्यापारी मनीष गुप्ता व मानसी अस्पताल के बाहर मौजूद पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला।
इसलिए इन सभी के बयान होने बेहद जरूरी हैं। हालांकि मनीष की पत्नी मीनाक्षी का कहना है कि नवरात्र के बाद मनीष के दोस्तों ने बयान के लिए कहा था मगर अभी तक एसआईटी ने संपर्क नहीं किया है। तो ऐसे में वह कैसे बयान दर्ज कराने पहुंच जाएं।