पुलिस की गिरफ्त में आरोपी दादा-दादी
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तहरीर में देरी बनी परिवार पर शक का दूसरा कारण
पुलिस को परिवार पर सबसे पहला शक उस वक्त हुआ, जब परिवार बार-बार दबाव डालने के बाद भी घटना वाली रात तक तहरीर देने को तैयार नहीं हुआ था। पुलिस उसी समय इस बात को दबी जुबां से कह रही थी कि कहीं ऐसा तो नहीं कि कोई खिचड़ी पकाई गई हो। चूंकि बच्ची की मौत हुई थी, इसलिए पुलिस ने परिवार की बात मान ली। शव पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंचने पर पुलिस को तहरीर मिली।
खास बात यह भी है कि परिवार हत्या में उसी खेत स्वामी को नामजद करने का मन बना रहा था। मगर, शव मिलने के बाद शाम होते होते पूरे गांव में इस बात की चर्चा होने लगी थी कि जिसकी बेटी से दुष्कर्म के आरोप में लेखराज के बेटे को जेल भेजा गया था, उसे ही फंसाने की साजिश हो रही थी।