मोर मुकुट कटि काछनी, कर मुरली उर माल, ऐही बानिक मो मन बसौं सदा बिहारीलाल..शरद पूर्णिमा पर सुबह और शाम जब ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज ने अपने स्वर्ण रजत सिंहासन पर बैठ बंसी धारण की तो भक्तों में अपने आराध्य के दर्शन की मानो होड़ सी लग गई। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी के इस दिव्य दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु आराध्य को देख भर लेने की आशा लिए पट खुलने से घंटे भर पहले ही मंदिर के गेट पर पहुंच गए। स्वर्ण आभूषणों के साथ ठाकुरजी स्वेत वस्त्र में मोर मुकुट कटि काछनी के साथ बंसी धारण कर भक्तों को दर्शन दे रहे थे। बुधवार सुबह करीब 8 बजे जैसे ही मंदिर के पट खुले, वैसे ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर में प्रवेश करने लगी। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी के जयकारों का उद्घोष आस्था के समुद्र को प्रमाणित कर रहा था।