आगरा के श्री पारस अस्पताल प्रकरण में पुलिस की जांच एक महीने बाद भी वीडियो पर अटकी है। 22 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। दो मोबाइल भी वीडियो बनाने के शक में जब्त हो चुके है। इसके बावजूद जांच का नतीजा शून्य है। अब पीड़ित लोग भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने लगे हैं। अस्पताल संचालक डॉ. अरिन्जय जैन का सात जून को एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें वह 22 मरीजों की छंटनी की बात कह रहे थे। ऑक्सीजन की मॉकड्रिल की बात भी कही थी।
वीडियो सामने आने के बाद मृतकों के परिजनों ने अपनी शिकायत दर्ज कराई। थाना न्यू आगरा में मुकदमा दर्ज किया गया, जो महज वीडियो के जरिये भ्रम फैलाने का ही था। इसमें सिर्फ डॉक्टर पर ऑक्सीजन की कमी को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया गया। मगर, हकीकत में मॉकड्रिल से मरीजों की छंटनी को लेकर कोई जिक्र नहीं किया गया।
पुलिस की जांच आगे बढ़ी भी तो सिर्फ वीडियो बनाने वाले और उसे वायरल करने वाले की तरफ अटक कर रह गई। एक महीने के अंदर 22 लोगों से पूछताछ हो चुकी है। उनसे यही पूछा गया कि वीडियो किसने और कब बनाया। वीडियो में जो बात कही गई, उसके संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई।