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विदुर नीति: इन कार्यों को करने वाले कहलाते हैं मूर्ख

Mon, 07 Jun 2021 11:02 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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vidur niti - फोटो : Social Media
महाभारत काल के सबसे बड़े बुद्धिजीवियों में से एक महात्मा विदुर एक महान विचारक थे। ये कुशाग्र बुद्धि के विद्वान होने के साथ ही साथ दूरदर्शी भी थे। ये समय से पहले ही आने वाली परिस्थितियों को भापने में सक्षम थे। महाभारत के युद्ध से पहले ही विदुर जी महाराज धृतराष्ट्र को युद्ध परिणामों के बारे मे अवगत करवा दिया था। इनका स्वभाव बहुत ही शांत था। ये धृतराष्ट्र और पांडु की तरह ही ऋषिवेदव्यास के पुत्र थे परंतु इनका जन्म एक दासी के गर्भ होने के कारण ये राजा नहीं बन पाए। ये हस्तिनापुर के महामंत्री थे। महाराज धृतराष्ट्र हर महत्वपूर्ण विषय पर विदुर जी से खुलकर बात किया करते थे। इन दोनों के बीच के संवाद को ही विदुर नीति के रुप में जाना जाता है। विदुर जी ने अपनी नीतियों में समाज कल्याण और लोगों को सही जीवन जीने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इनकी नीतियां आज के जीवन में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। यदि इनकी मनुष्य इनकी बताई गई नीतियों का अनुसरण करें तो वह अपने जीवन को सुखी बना सकता है। विदुर जी ने कुछ ऐसे कार्यों के बारे में बताया है, जिन्हें करने वाले को मूर्ख कहा जाता है। तो चलिए जानते हैं कि क्या कहती है विदुर नीति।
 
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vidur - फोटो : Social Media
महात्मा विदुर कहते हैं कि जो व्यक्ति शत्रु अपने मित्रों और शुभचिंतकों को दुख देता है, उनसे द्वेष रखता है और गलत कार्य करने वालों के साथ रहता है वह सदैव  मूर्ख कहलाता है।
 
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vidur niti - फोटो : pinterest
विदुर नीति कहती है कि जिस व्यक्ति में हर कार्य हर व्यक्ति को लेकर संदेह रहता है जो व्यक्ति हमेशा दूसरों को संदेह की दृष्टि से देखता है, कार्यों में बिलंब करता है और अनावश्य कार्यों में लगा रहता है। वह व्यक्ति सदा मूर्ख कहलाता है।

 

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VIDHURA - फोटो : SELF
महात्मा विदुर के अनुसार जो व्यक्ति दूसरों के बात करते समय बिना आज्ञा लिए बीच में बोलता है या किसी की आज्ञा लिए बिना किसी के भी कक्ष में प्रवेश करता और किसी की सलाह न मानते हुए दूसरों पर अपनी बाते थोपता है। किसी अजनबी पर आंख मूद कर भरोसा कर लेता है, ऐसा व्यक्ति मूर्ख कहलाता है। 
 
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vidur - फोटो : self
महात्मा विदुर जी  कहते हैं कि जो व्यक्ति अपनी गलती होते हुए भी दूसरे की गलती निकालता है। स्वंय को सबसे अधिक बुद्धिमान मानता है और अक्षम होते हुए भी क्रोध करता है। वह व्यक्ति मूर्ख कहलाता है। 
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