"ओशो" इनके बचपन का नाम चंद्रमोहन जैन था। इनका जन्म 11 दिसंबर 1932 में मध्यप्रदेश के कुचवाड़ा में हुआ था। इन्हें बालपन से ही दर्शन में रुचि पैदा हो गई थी। इन्होंने अपनी शिक्षा जबलपुर में पूर्ण की और बाद में जबलपुर यूनिवर्सिटी में ही प्रोफेसर के तौर पर काम करने लगे। इन्होंने मुंबई से शुरुआत करने के बाद अलग-अलग विचारधारा और धर्म पर देशभर में प्रवचन देना आरंभ किया। बाद में इन्होंने नौकरी छोड़कर नवसन्यास आंदोलन की शुरुआत की जिसके बाद ये स्वयं को ओशो कहने लगे। तब से इन्हें रजनीश या फिर श्री रजनीश के नाम से जाना जाने लगा। इनको ओशो कहे जाने के संबंध में भी कई धारणाएं मिलती हैं। स्वयं ओशो ने कहा है कि ओशो शब्द को कवि विलयम जेम्स की एक कविता 'ओशनिक एक्सपीरियंस' के शब्द 'ओशनिक' से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है 'इसका अर्थ होता है सागर में विलीन हो जाना। ओशनिक शब्द अनुभव का वर्णन करता है। ये एक भारतीय विचारक एवं आध्यात्मिक धर्म गुरु थे। इन्होंने ये धार्मिक रुढ़िवादिता के कठोर आलोचक थे। इन्होंने अपने देश से लेकर विदेशों तक में अपने प्रवचन दिए। इनके प्रवचन आज भी मनुष्य को जीवन की गहराई का अनुभव कराते हैं। ओशो के वचन जीने की सही राह दिखाते हैं इनकी मृत्यु के इतने वर्षों के पश्चात भी ये लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। तो आइए जानते हैं इनके प्रवचन के ऐसे ही कुछ खास अंश।