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Dhanteras 2020: ये रहेगा खरीदारी का शुभ मुहूर्त, 17 साल बाद दिवाली पर सर्वार्थ सिद्धि योग

Wed, 11 Nov 2020 03:23 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
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धनतेरस 2020 तिथि, शुभ मुहूर्त - फोटो : अमर उजाला
जिस प्रकार देवी लक्ष्मी सागर मंथन से उत्पन्न हुई थी उसी प्रकार भगवान धन्वंतरि भी अमृत कलश के साथ सागर मंथन से उत्पन्न हुए हैं। कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन ही धन्वंतरि का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन को धनतेरस के नाम से जाना जाता है। धन्वंतरि जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था। भगवान धन्वंतरि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परंपरा है।
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धनतेरस 2020 - फोटो : pinterst
13 नवम्बर शुक्रवार को मनाए जाने वाले धनतेरस पर्व पर खरीदारी करने के लिए लोगों में खासा उत्साह है। प्रथा के मुताबिक धनतेरस के दिन सोने, चांदी, तांबे व स्टील आदि की वस्तुएं खरीदने पर उसमें धन्वंतरि देवता 13 गुणा वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। यही कारण है कि इस पावन बेला पर बाजारों में भीड़ उमड़ती है और खरीदारी के नए रिकॉर्ड बनाती है।
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धनतेरस 2020 - फोटो : अमर उजाला
शिमला के राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी उमेश नौटियाल ने बताया कि धनतेरस पर पूजा का समय सुबह 6:45 से लेकर 10:46 बजे तक  रहेगा। चौघड़िया मुहूर्त में भी पूजा की जा सकती है। वहीं इसके बाद सुबह 11:30 से 12:30 बजे तक धनतेरस पर पूजा अर्चना की जा सकती है। जबकि बर्तन खरीदारी का शुभ मुहूर्त शाम 4 बजे से लेकर 5:59  तक है। हालांकि बर्तन की खरीदारी सुबह से शाम तक कर सकते हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
वहीं कई सालों बाद दिवाली शनिवार को मनाई जाएगी। यह दुर्लभ संयोग है। इस साल दिवाली 14 नवम्बर शनिवार को पड़ रही है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिवार और शनि का स्वराशि मकर में होना सभी के लिए लाभकारी है। इसके अलावा दिवाली 17 साल बाद सर्वार्थ सिद्धि योग में है। इस दिन मां लक्ष्मी और गणेश, सरस्वती, कुबेर आदि की पूजा करें जो कि शुभ और लाभदायक रहेगा।
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दिवाली - फोटो : अमर उजाला
दिवाली पर शनिवार को घर-घर में मां लक्ष्मी की पूजा होगी। मां लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमा चौकी पर लाल वस्त्र के ऊपर रखें। मूर्तियों का मुख पूर्व या पश्चिम दिशा की तरफ हो। लक्ष्मी की प्रतिमा गणेश के दाहिनी ओर रखें तथा उसके साथ ईशान कोण में कलश स्थापित करें। घी का दीपक कलश के पास और तेल का दीपक गणेश के पास रखें।
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दिवाली - फोटो : Pixabay
ओम गं गणपताय नम: तथा ओम श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम: इन मंत्रों से पूजन करें तथा यथाशक्ति इन मंत्रों का जप करें। इस दिन मां लक्ष्मी के साथ गणेश पूजन, कुबेर का भी पूजन किया जाता है। लक्ष्मी को लाल कमल पुष्प विशेष प्रिय है। इस दिन 108 कमलपुष्पों व कमलवीजों से लक्ष्मी के 108 नामों के अर्चन करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। दिवाली के दिन घर में पांच दीपक घी और पांच दीपक तेल के जलाकर दिवाली का विशेष पूजन किया जाता है।

लक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त 
14 नवम्बर- शाम 5:28 से 7:24 तक।
सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त- 5:49 से 6:02 तक।
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