इंदौर में शुरू हुई मेट्रो ट्रेन में खुश महिलाएं। फोटो- जयेश मालवीय
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
11. इंदौर में मेट्रो में महिला यात्रियों की मुफ्त सुविधाएं
मेट्रो की पहली राइड महिलाओं को समर्पित की गई। मां अहिल्या की जन्म जयंती के मौके पर मिली मेट्रो की पहली राइड को सिर्फ महिलाओं ने ही संचालित किया। ड्राइवर से लेकर पूरा स्टाफ महिलाओं का था। पहली राइड में सिर्फ महिला पैसेंजर्स को ही मौका दिया गया। एक सप्ताह तक इंदौर के नागरिकों के लिए मेट्रो का सफर पूरी तरह से निःशुल्क रहा। बड़ी संख्या में महिलाएं यहां पर पहुंची और उन्होंने जमकर आनंद लिया। कोई मेट्रो में भजन गा रहा था तो कोई ज्योर्तिलिंग बनाकर लाया था। सभी का उत्साह देखते ही बन रहा था। महिलाएं अगले सात दिनों तक मुफ्त यात्रा कर सकेंगी।
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12. अहिल्या बाई के सम्मान में डाक टिकट और 300 का सिक्का जारी हुआ
देवी अहिल्या बाई की 300वीं जयंती के मौके पर पीएम मोदी ने डाक टिकट जारी किया। साथ ही 300 रुपये का सिक्का जारी किया गया है। ये सिक्का संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी किया जा रहा है। इस सिक्के के मुख्य भाग के मध्य भाग में अशोक स्तंभ का तीन शीश और नीचे सत्यमेव जयते लिखा है। पीछे की ओर मध्य में देवी अहिल्याबाई का चित्र बना है।
13. महिलाओं के नाम पर इंदौर मेट्रो के स्टेशन के नाम,महिलाओं ने संभाली कमान :
इंदौर मेट्रो के टर्मिनल का नाम देवी अहिल्या बाई होल्कर के नाम पर रखा गया है। इसके अलावा सभी स्टेशनों के नाम भी वीरांगनाओं के नाम पर रखे गए हैं, जिनमें महारानी लक्ष्मीबाई स्टेशन, रानी अवंती बाई लोधी स्टेशन, रानी दुर्गावती स्टेशन और वीरांगना झलकारी बाई स्टेशन शामिल हैं। 6 किलोमीटर का यह यलो लाइन का सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर है।
इंदौर मेट्रो के शुभारंभ हुआ। यहां भी हर जगह महिलाओं ने मोर्चा संभाल लिया। स्टेशन पर एंट्री, मेट्रो की सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी नारी शक्ति ने संभाली। कार्यक्रम के बाद में स्टेशन की सफाई भी महिलाओं ने की। हर काम को महिलाओं ने बखूबी तरीके से किया।
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14 देवी अहिल्या की 300 जयंती पर प्रोग्राम
इंदौर के राजवाड़ा चौक पर स्थित देवी अहिल्या प्रतिमा पर सामाजिक, धार्मिक संगठनों ने माल्यार्पण किया। शहरभर के 70 से अधिक बैंड और भजन मंडलों ने सुबह सात बजे से राजवाड़ा चौक पर अपनी प्रस्तुति दी। भजन मंडलों में ज्यादातर महिलाएं ही आगे रहीं। अलग-अलग क्षेत्रों से आए भजन मंडलों ने देवी अहिल्या प्रतिमा की परिक्रमा की। महिलाएं भगवा साडि़यां पहन कर आई थी और हाथ में भगवा पताकाएं लहरा कर भजन गा रही थी। युवतियों के समूह ने लेझिम और बड़े ढोल पर जय घोष किया। संस्था पुण्यश्लोक ने उषा नगर क्षेत्र से एक रैली निकाली। संस्था जयंती के उपलक्ष्य में जागरण गोंधल भी करने जा रही है। इसके अलावा जाल सभागृह में देवी अहिल्या नारी गौरव अलंकरण समारोह भी आयोजित किया गया। समारोह में अलग-अलग समाजों की उन महिलाओं का सम्मान किया, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम किए हैं।
15. इंदौर के अलग अलग प्रोग्राम में महिलाओं की भागीदारी
देवी अहिल्या की 300 वीं जयंती के समापन समारोह में वक्ताओं ने देवी अहिल्या के जीवन से जुड़े प्रसंग सुनाए। बास्केटबाल स्टेडियम में आयोजित समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि अहिल्या बाई निर्भीक भी और निर्मल भी। वो तिजोरी भी संभलना जानती थी और तोपखाना भी। उन्होंने कहा कि मालवा के साम्राज्य को चुनौती थी तो अहिल्याबाई ने मातृशक्ति की फौज बनाई युद्ध किए बगैर कूटनीतिक जीत हासिल कर ली। चंद्रकला पहाड़िया ने कहा कि अहिल्या बाई के व्यवहार और सिद्धान्त में अंतर नहीं था। सती प्रथा का उन्होंने विरोध किया। लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने कहा कि अहिल्या बाई के पास नीति चातुर्य था। राज्य को संगठित रखने की ताकत थी। इन्होंने खुद को कभी रानी नहीं माना। उनके लिए राज्य एक परिवार था। उन्होंने कहा कि 300 साल पहले अहिल्या बाई ने दूर दूर की यात्रा कर मंदिरों का पुनर्निर्माण कराया। उनकी दृष्टि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की थी। नृत्यांगना सोनल मान सिंह ने कहा कि अहिल्याबाई धर्मनिष्ठ थी। वे प्रजा की भलाई के बारे में हमेशा सोचती थी। इन्होंने कहा कि देवी अहिल्याबाई गौरव सम्मान की स्थापना होना चाहिए।
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