महारानी देवी अहिल्या बाई होल्कर के प्रति संपूर्ण देश में अटूट श्रद्धा थी। देश के कई राजा महाराजा देवी अहिल्या बाई को आदर के भाव से देखते थे। उनके द्वारा देश भर में करवाए गए धार्मिक कार्यों की एक लंबी फेहरिस्त है। उन्होंने जहां जरूरत देखी और उन्हें जहां उचित लगा, वहां उन्होंने कार्य करवाने में कोई संकोच नहीं किया। मालवा की रियासतों के कार्य को देखने वाले कई अंग्रेज एजेंट देवी अहिल्या बाई की कार्यप्रणाली से खुश थे। मालवा में सर्वाधिक समय व्यतीत करने वाले सर जॉन माल्कम ने अपने संस्मरण ''मेमॉयर ऑफ सेंट्रल इंडिया'' में देवी अहिल्या बाई होल्कर के बारे में लिखा था- ''जितने भी शुद्धतम एवं आदर्शवत शासक अस्तित्व में रहे हैं, उनमें से एक'', यह कथन था देवी अहिल्या बाई के बारे में था।
कई बार तुलादान किया : कवि खुशालीराम
संस्कृत के सुप्रसिद्ध विद्वान और कवि खुशालीराम ने अहिल्या कामधेनु ग्रंथ लिखा था, जो एक दुर्लभ ग्रंथ है। उन्होंने देवी अहिल्या बाई होल्कर के बारे में लिखा-''वे सदा देव, ब्राह्मण और पुजारियों को दान देती थी तथा धर्मकार्य में परायण रहकर अपना समय बिताती थीं। कुरुक्षेत्र में कई बार स्वर्ण और चांदी का तुला दान भी किया था।
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गंगा की तरह प्रसिद्ध : मोरोपंत
मोरोपंत मराठी के कवि और विद्वान थे, वे अपनी बात स्पष्ट कहने के लिए जाने जाते थे। मोरोपंत ने देवी अहिल्या बाई के गुणों से काफी प्रभावित थे, उन्होंने एक बार गंगा स्नान करने के बाद लिखा- ''गंगे, मैं अहिल्या बाई के दर्शन करूंगा, हे गंगा मां जैसे तुम संसार में प्रसिद्ध हो, उसी तरह वे भी प्रसिद्ध हैं, तुम दोनों से संसार का उपकार होगा''।