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बिस्मिल की बहन की मदद को वेश बदल पूर्व प्रधानमंत्री लखनऊ पहुंचे, पढें ये वाक्या

Fri, 30 Nov 2018 07:00 PM IST
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
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जवाहर लाल नेहरू
काकोरी कांड के बाद अंग्रेजी हुकूमत राम प्रसाद बिस्मिल से काफी चिढ़ी हुई थी। उनके परिवार व रिश्तेदारों में कोई भी ऐसा नहीं बचा था जिस पर अंग्रेजी हुकूमत ने कहर न ढाया हो। जवाहर लाल नेहरू सहित तमाम बड़े नेता अपने घर में नजरबंद।
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राम प्रसाद बिस्मिल - फोटो : डेमो
बिस्मिल के परिवार की आर्थिक स्थिति तो पहले से खराब थी। रही-सही कसर अंग्रेजों के अत्याचार ने पूरी कर दी। उनकी बहन शास्त्री देवी से अंग्रेजी हुकूमत बेइंतहा नाराज थी। हो भी तो क्यों न जब वह खुद क्रांतिकारी थीं। जब कभी घर पर छापा पड़ता तो वह हथियार पैरों पर बांधकर ऊपर से लहंगा पहनकर छिपा लेती। अंग्रेजों की पुलिस झक मारकर खाली हाथ लौट जाती। बिस्मिल पर लिखी पुस्तक में शास्त्री देवी के एक संस्मरण से पता चलता है, ‘घर पर एक-एक पैसे का संकट।
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जवाहर लाल नेहरू - फोटो : डेमो
मजबूरी में परिवार को लखनऊ आना पड़ा। जैसे-तैसे दिन गुजर रहे थे। एक दिन अचानक घर पर एक आदमी आया। मैला-कुचैला कुर्ता और पाजामा। सिर पर अंगोछा। देखने में बेहद गरीब। आते ही पैर छुए। मैं जब तक कुछ समझ पाऊं उसने जेब में हाथ डाला और पांच सौ रुपये निकालकर मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा, ‘बहन यह कुछ रुपये हैं रख लो। काम आएंगे।’

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जवाहर लाल नेहरू - फोटो : डेमो
मैं अचकचा गई। अंजान आदमी और वह भी देखने में बेहद गरीब। मैं कैसे रुपये ले लेती। कहा, ‘नहीं मैं किसी की मदद ले सकती।’ उसने हाथ जोड़े और कहा, ‘मैं जवाहर लाल हूं। पुलिस से बचने के लिए वेश बदलकर आना पड़ा क्योंकि घर में कैद हूं। 
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राम प्रसाद बिस्मिल
बिस्मिल तो नहीं है। पर, उनकी जगह हिंदुस्तान का हर नौजवान आपका भाई है। आप संकट में जीवन गुजारें तो बिस्मिल की आत्मा को भी कष्ट होगा।’ एक तरह से जबरन रुपये देकर वह लौट गए।
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