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Corona Effect: कितनी बदल गई हैं हमारी आदतें, कैसे प्रभावित हो रही हमारी जीवनशैली?

Sat, 25 Apr 2020 10:06 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना ने हमारी जीवनशैली बदल दी है - फोटो : Pexels
कोरोना वायरस के कारण हमारी आदतें और हमारी दिनचर्या काफी हद तक बदल गई है। हमारी जीवनशैली में हो रहे इन बदलावों को हम हर दिन अनुभव भी कर रहे हैं। इतिहास की कई बड़ी आपदाओं के बाद सामाजिक, आर्थिक समझ और जीवनशैली में बदलाव देखे गए हैं।  कोरोना संकट के दौर में भी देश दुनिया में सामाजिक जीवन काफी हद तक प्रभावित हो रहा है। हमारे खानपान और तौर-तरीकों से लेकर हमारी कार्यशैली बदल रही है। आने वाले समय में इन बदलावों का बड़ा असर पड़ने वाला है। हो सकता है कि इस दौरान हमारी बदली आदतें हमारे जीवन का स्थाई हिस्सा बन जाए। आइए, जानते हैं कि किस तरह कोरोना ने हमारी जीवनशैली बदल दी है: 
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नमस्ते करिए, कोरोना से बचिए - फोटो : Social Media
नमस्ते से शुरुआत करते हैं
भारतीय संस्कृति में हाथ जोड़कर 'नमस्ते' से अभिवादन करने की परंपरा रही है। कोरोना महामारी जब फैली तो स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने हाथ मिलाने की आदत से परहेज करने की सलाह दी, क्योंकि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को होने वाली इस बीमारी में हाथों के जरिए संक्रमण फैलने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। सोशल मीडिया में #DontShakeHands और #Namaste जैसे हैशटैग वायरल हुए और इसके साथ ही भारत में भी हैंडशेक करने वाले लोग अपनी पुरानी संस्कृति में लौटे, जबकि पूरी दुनिया ने हाथ मिलाने की जगह नमस्ते करने की भारतीय संस्कृति अपना ली है।
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Handwash - फोटो : Social Media
साफ-सफाई बरतने की आदत
कोरोना संक्रमण के डर से हमारी साफ-सफाई की आदतों में काफी सुधार आया। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना से बचने के लिए दिनभर समय-समय पर हाथ धोते रहने की सलाह दी। हाथों को 20 सेकेंड तक साबुन और पानी से धोना जरूरी है। यह हमारी आदत बन गई।  इंटरनेट पर हाथ धोने के सही तरीके खूब सर्च हुए। पास रखे जाने वाले अन्य जरूरी सामानों में एल्कोहल युक्त सैनिटाइजर भी शामिल हुआ। घर के सामानों से लेकर छूने वाली सतहों के सैनिटाइजेशन के प्रति हम जागरूक हुए।

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work from home
वर्क फ्रॉम होम संस्कृति
कोरोना संकट के दौरान एक बड़ा बदलाव ऑफिस कल्चर यानी कार्यालयी संस्कृति में भी हुआ। संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए आईटी से लेकर मार्केटिंग सेक्टर ने भी घर से काम करने की सुविधा दी है। लोग ऑफिस जाने की बजाय घर से काम कर रहे हैं। आर्किटेक्ट विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले समय में हमारे कार्यस्थलों की संरचना भी बदल सकती है। सहकर्मियों के बीच शारीरिक दूरी बढ़ाई जा सकती है। फर्नीचर से लेकर आधारभूत संरचना में भी बदलाव देखा जा सकता है।
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पहनावे और रहन-सहन में बदलाव
कोरोना के कारण देश दुनिया में घोषित लॉकडाउन के दौरान हमारे पहनावे और रहन-सहन में बड़ा बदलाव हुआ है। ऑफिस, बैंक या अन्य कार्यस्थल जाना नहीं है, इसलिए शर्ट, पैंट, जींस, कोर्ट या अन्य किसी प्रोफेशनल आउटफिट की जगह लोग टीशर्ट, पायजामा जैसे कंफर्ट कपड़े पहन रहे हैं। कामकाजी महिलाएं भी घर में साड़ी, कुर्ती वगैरह या किसी अन्य प्रोफेशनल आउटफिट की जगह नाइटी या अन्य कंफर्टेबल यानी आरामदेह घरेलू कपड़े पहन रही हैं।  वार्डरोब कलेक्शन से लेकर हमारे फैशन और स्टाइल में भी लोग प्रयोग करते नजर आ रहे हैं।
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kitchen
किचन में तैयार हो रहे नए शेफ
इन दिनों लोगों का होटल या रेस्त्रां जाना बंद है। गलियों और चौराहों पर चटपटे चाट और पानीपुरी से लेकर छोले-कुलचे और अन्य चटखारों का आनंद लेना संभव नहीं है। उत्तर भारत की मिठाइयों से लेकर दक्षिण भारतीय जायकों का लजीज स्वाद हमारे मुंह तक नहीं पहुंच पा रहा। ऐसी स्थिति में घर के किचन में ही लगातार प्रयोग हो रहे हैं। कुछ प्रयासों के बाद लोग सफल भी हो रहे हैं। इंटरनेट पर ऑनलाइन रेसिपी खूब सर्च की जा रही हैं। लोग टीवी पर भी रेसिपी देख कर घर में बना रहे हैं। किचन से दूरी बनाकर रखने वाले लोग भी अब शेफ बनकर उभर रहे हैं। यह अभ्यास खासकर छात्रों और युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने वाला है। आज, जबकि महिलाएं, किचन से निकलकर पुरुषों के साथ कदमताल करते हुए हर तरह के जॉब कर रही हैं तो इन दिनों पुरुष भी महिलाओं के साथ किचन में सहभागी हो रहे हैं।
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Lockdown Learning - फोटो : Amar Ujala
सीखने की कला
इन दिनों लोगों में नई-नई चीजें सीखने की ललक बढ़ी है। इंटरनेट पर तो ऑनलाइन कोर्सों की भरमार है। लोग अपनी हॉबी यानी शौक को विस्तार दे रहे हैं। गाना गाने से लेकर गिटार बजाने तक, चित्रकारी से लेकर अदाकारी तक, फोटोग्राफी से लेकर बागवानी तक लोग काफी कुछ सीख रहे हैं। सोशल मीडिया पर यदि एक चक्कर लगा कर आएंगे तो हर तीसरा व्यक्ति अपना कौशल दिखाता, बढ़ाता नजर आएगा। इस लॉकडाउन पीरियड का उपयोग लोग अपनी कला और कौशल को निखारने में लगा रहे हैं। ये चीजें भविष्य में काम ही आएंगी, कम से कम नुकसान तो नहीं ही देंगी। 

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UPI
कितने डिजिटल फ्रेंडली हुए हम
इस डिजिटल युग में हम काफी हद तक अपडेट हुए हैं। खासकर इस लॉकडाउन पीरियड में जबकि रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास भी कैश की जगह डिजिटल लेनदेन की अपील कर चुके हैं, लोगों में यह संस्कृति बढ़ी है। लोग कैश की जगह पेटीएम, फोनपे और गूगल-पे जैसे मोबाइल प्लेटफॉमों के जरिए यूपीआई लेनदेन कर रहे हैं। शॉपिंग ऑनलाइन हो रही है, बैंकिंग ऑनलाइन, पढ़ाई-लिखाई से लेकर ऑफिस के काम तक ऑनलाइन हो रहे हैं और बिल भी ऑनलाइन भरी जा रही है। यहां तक कि इंटरनेट पर ऑनलाइन आरती की सर्चिंग में 73 फीसदी बढ़ोतरी बताती है कि लोगों द्वारा भगवान के दर्शन और उनकी प्रार्थना करने का तरीका भी ऑनलाइन हो चला है। 

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No Smoking - फोटो : pixabay
धूम्रपान की आदत 
कोरोना वायरस से संबंधित रिसर्च में यह बात तो प्रमाणित हो चुकी है कि कमजोर इम्यून सिस्टम वालों को इसके संक्रमण का खतरा ज्यादा है। धूम्रपान व्यक्ति के इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है और शोधकर्ताओं के मुताबिक, धूम्रपान करने वाले लोगों को भी कोरोना संक्रमण का ज्यादा खतरा है। ऐसे में बहुत सारे लोग अब धूम्रपान की आदत छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। भारतीय सूचना सेवा के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में क्षेत्र प्रचार पदाधिकारी के रूप में कार्यरत प्रेम कुमार बताते हैं कि इंटरनेट पर 'धूम्रपान कैसे छोड़ें' की सर्चिंग का आंकड़ा बढ़ा है, जिसका मतलब साफ है कि लोग धूम्रपान छोड़ना चाह रहे हैं। यह सकारात्मक बदलाव है। 

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नि:शुल्क सलाह-सुझाव
लॉकडाउन के दौरान खानपान से लेकर फिटनेस, स्वास्थ्य, पढ़ाई-लिखाई, खेल, इनहाउस एक्टिविटी वगैरह को लेकर हम बहुत सारे सवालों के जवाब ढूंढ रहे हैं। हमारी इसी क्यूरेसिटी यानी जिज्ञासाओं ने इंटरनेट पर टिप्स, सलाह और सुझावों की भरमार ला दी है। फेसबुक, वॉट्सएप से लेकर यूट्यूब पर आपके मन में उठ रहे हर तरह के सवालों के जवाब मौजूद हैं। और इस लॉकडाउन पीरियड में यह सारा ज्ञान मुफ्त में बांटा जा रहा है यानी नि:शुल्क। आने वाले समय में यह बदलाव स्थाई हो सकता है। हमारी निर्भरता ऐसे प्लेटफॉर्मों पर बढ़ सकती है। 
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FACEBOOK
पुराने दौर की यादों में गोते लगाता मन
बाहर घूम-फिर न पाने और दोस्त-यारों से न मिल पाने की बंदिशों के बीच लोग पुराने दौर को याद करते हुए समय बिता रहे हैं। घर में पुराने एल्बम पलटना, मोबाइल या लैपटॉप में पुरानी तस्वीरें देखते हुए मुस्कुराना अच्छा लग रहा है। और फिर इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर शेयर करने और उनपर चर्चा कर लोग मन बहला रहे हैं। इधर, दूरदर्शन पर रामायण, महाभारत जैसे धारावाहिकों के जरिए हमारा मनोरंजन हो रहा है तो दूसरी ओर सोशल मीडिया पर '10 साल पहले', 'तब और अब' जैसे 'फोटो चैलेंज' चल रहे हैं। इन क्रियाकलापों के जरिए हमारा यात्री मन पुराने दौर की यात्रा कर रहा है। 
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