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बड़ा सवाल: क्या ओमिक्रॉन के जाते ही खत्म हो जाएगी कोरोना महामारी? वैज्ञानिकों ने दिए राहत भरे संकेत, जानिए विस्तार से

Thu, 13 Jan 2022 07:21 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस का संक्रमण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
दुनियाभर में कोरोना का ओमिक्रॉन वेरिएंट इस वक्त लोगों के लिए बड़ी समस्या का कारण बना हुआ है। देश में ओमिक्रॉन के बढ़ते मामले तीसरी लहर का कारण बन रहे हैं। भारत में बुधवार को 2.47 लाख से ज्यादा कोविड-19 के नए मामले दर्ज किए गए, जोकि मई 2020 के बाद सबसे अधिक है। कोरोना के इस तरह से तेजी से बढ़ते संक्रमण के कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंतित हैं और सभी लोगों को लगातार सावधानी बरतते रहने की अपील कर रहे हैं। ओमिक्रॉन से पहले, भारत पिछले साल डेल्टा वेरिएंट के कारण दूसरी और बेहद खतरनाक लहर झेल चुका है।

अध्ययनों में बताया जा रहा है कि वैसे तो ओमिक्रॉन वेरिएंट के कारण हल्के लक्षण होते हैं, लेकिन इसके प्रसार की दर डेल्टा की तुलना में 4 गुना अधिक है। यह न केवल भारत बल्कि दुनियाभर में जंगल की आग की तरह फैल रहा है। कोरोना के कारण बने डर और अनिश्चितता के बीच कुछ रिपोर्ट्स में जो दावा किया जा रहा है, वह काफी राहत भरा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि संभवत: ओमिक्रॉन वेरिएंट के जाते ही दुनिया को कोरोना महामारी से राहत मिल जाएगी। वैज्ञानिक किस आधार पर इस तरह का दावा कर रहे हैं और क्या वास्तव में अब हमें कोरोना महामारी से जल्द ही राहत मिलने वाली है? आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 
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कोरोना वायरस होता जाएगा हल्का - फोटो : Pixabay
कम होता जाएगा कोरोना का असर
इंग्लैंड स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के वायरोलॉजिस्ट प्रोफेसर इयान जोन्स कहते हैं, हम उम्मीद कर सकते हैं कि कोरोना महामारी संभवत: अब अपने आखिरी चरणों में है। फ्लू जैसे तमाम संक्रमणों की ही तरह कोरोना भी समय के साथ हल्का होता जाएगा। जैसा कि ओमिक्रॉन के मामले में अध्ययनों से पता चलता है कि यह स्वस्थ और फिट लोगों के लिए ज्यादा समस्या पैदा नहीं करता है, खतरा उन लोगों के लिए ज्यादा है जोकि पहले से ही कमजोर इम्युनिटी के शिकार है। वायरस की अब तक ऐसी ही प्रवृत्ति देखी जाती रही है, उसके लक्षण हर लहर के साथ कम होते जाते हैं।

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ओमिक्रॉन संक्रमण का असर - फोटो : iStock
लोगों में विकसित हो रही है मजबूत प्राकृतिक प्रतिरक्षा
प्रोफेसर इयान जोन्स कहते हैं, जैसा कि ओमिक्रॉन वैरिएंट में देखा जा रहा है कि इसके कारण संक्रमितों में हल्के लक्षण देखे जा रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह लोगों की संक्रमण से लड़ने की प्रतिरक्षा को बढ़ा सकती है। यदि आप किसी वायरस से संक्रमित हो चुके हैं, तो शरीर में  निश्चित स्तर की प्रतिरक्षा विकसित हो जाती है, जो अगले संक्रमण के समय में रोग की गंभीरता को कम कर देती है। डेल्टा संक्रमण के समय लोगों में गंभीर लक्षण देखे गए, वहीं अब ओमिक्रॉन के लक्षण भी समय के साथ हल्के हो गए हैं, उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में कोरोना के लक्षण और भी हल्के होते जाएंगे और फ्लू की ही तरह कोरोना वायरस भी सामान्य और कम प्रभाव वाला हो जाएगा। 

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लोगों में बढ़ेगी कोरोना के खिलाफ प्रतिरक्षा - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
ओमिक्रॉन की प्रकृति को लेकर अब भी वैज्ञानिक बहुत सारी बातों से अंजान हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वेरिएंट को रोक पाना मुश्किल लगता है, यह दुनियभार में बड़ी आबादी में संक्रमण का कारण बन सकता है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ मोनिका गांधी का मानना है जिस तरह से रुख हैं, ऐसे में लगता है कि महामारी जल्द ही खत्म होने की तरफ बढ़ रही है। वायरस जरूर हमेशा हमारे साथ रहने वाला है, लेकिन आशा है कि यह वेरिएंट लोगों में इतनी प्रतिरक्षा विकसित कर देगा जिससे आने वाले वर्षों में संक्रमण का असर बेहद निम्न हो जाएगा। 
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कोरोना महामारी जल्द हो सकती है खत्म - फोटो : Pixabay
वायरल संक्रमण का ऐसा ही रहा है पैटर्न
विशेषज्ञों  का कहना है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट बड़ी आबादी को प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रदान कर सकता है जो भविष्य में वायरस के अन्य वैरिएंट्स को बेअसर करने में मदद करेगी। पहले भी कई तरह के वायरल संक्रमणों में यही पैटर्न रहा है। फिलहाल हम सभी को मिलकर कोरोना के इस खतरे से मुकाबला करने की आवश्यकता है जिससे आने वाले वर्षों के लिए हम अच्छी उम्मीद कर सकें।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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