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अध्ययन में बड़ा खुलासा : ऐसे लोगों में जीवनभर बनी रह सकती है इम्यूनिटी, तमाम वेरिएंट्स के खिलाफ मिलेगी सुरक्षा

Mon, 31 May 2021 06:57 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
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कोरोना से लॉंग लास्टिंग सुरक्षा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
दुनियाभर में कोरोना संक्रमण को डेढ़ साल से ज्यादा का समय बीत चुका है। महामारी की शुरुआत से ही वैज्ञानिक नोबल कोरोनावायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर ढंग से समझने की कोशिश कर रहे हैं। कोविड संक्रमण या वैक्सीन लगने के बाद या फिऱ दोनों ही स्थितियों के बाद व्यक्ति को वायरस से किस स्तर तक सुरक्षित माना जा सकता है? यह ऐसे गंभीर सवाल रहे हैं जिनपर खूब चर्चा की गई है। इन सवालों के सही जवाब क्या हो सकते हैं, इसपर बात करना फिलहाल जल्दबाजी होगी, लेकिन सुकून की बात यह है कि विशेषज्ञ इस कोड को क्रैक करने के काफी करीब पहुंच गए हैं। हाल ही में हुए दो अध्ययनों में वैज्ञानिकों ने शरीर में बनी इम्यूनिटी के बारे में कुछ ऐसे खुलासे किए हैं जिसने लोगों में एक सकारात्मक उम्मीद जगा ही है।
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कोरोना से सुरक्षा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
कोरोना से ठीक होने  के बाद वैक्सीनेशन
साइंस नेचर और बायोरिक्सिव जर्नल में हाल ही में प्रकाशित दो अध्ययनों के मुताबिक  कोरोना संक्रमण के बाद ज्यादातर लोगों में बनीं एंटीबॉडीज कम एक साल तक बनी रहती हैं। इसके पश्चात टीकाकरण के बाद एंटीबॉडीज की गुणवत्ता में और सुधार आता है, जो ता-उम्र उन्हें वायरस से सुरक्षित रख सकती है। इन दोनों अध्ययनों के आधार पर विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना से ठीक होने के बाद वैक्सीन की एक डोज ले चुके लोगों को बूस्टर की आवश्यकता नहीं होती है, यानी कि ऐसे लोगों को वैक्सीन के दूसरे खुराक की कोई खास जरूरत नहीं है।
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कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज जरूर लें - फोटो : iStock
ऐसे लोगों के लिए वैक्सीन की दोनों डोज जरूरी
अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों का मानना है कि जिन लोगों को कभी भी कोरोना का संक्रमण नहीं हुआ है, ऐसे लोगों को संक्रमण से सुरक्षित रहने के लिए दोनों डोज लेना जरूरी है। इसके अलावा कई लोगों में संक्रमित होने के बाद भी पर्याप्त मात्रा में एंटीबॉडीज विकसित नहीं हो पाती हैं, इन लोगों को भी वैक्सीन के दोनों खुराक जरूर लेनी चाहिए। 

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बी-कोशिकाओं को लेकर हुआ अध्ययन - फोटो : Social media
बी-कोशिकाओं पर  मिली खास जानकारियां
वैज्ञानिकों ने अध्ययन के लिए उन लोगों को शामिल किया था जो करीब एक साल पहले कोरोना से संक्रमित रह चुके हों। जर्नल में सोमवार को प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, वायरस को याद रखने वाली कोशिकाएं (बी-कोशिकाएं) बोन मैरी में लंबे समय तक मौजूद रहते हुए जरूरत पड़ने पर शरीर को एंटीबॉडीज प्रदान करती रहती हैं। वहीं दूसरे अध्ययन (समीक्षाधीन) में वैज्ञानिकों ने बताया है कि पहले संक्रमण के बाद बी-कोशिकाएं शरीर में करीब एक साल तक बनी रह सकती हैं। 
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वैक्सीन के बाद बनी एंटीबॉडीज सभी वेरियंट पर प्रभावी - फोटो : iStock
सभी वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी एंटीबॉडीज
रॉकफेलर यूनिवर्सिटी में इम्यूनोलॉजिस्ट और इस अध्ययन से जुड़े डॉ मिशेल नुसेनज़वेग बताते है कि कोरोना संक्रमण के बाद बनी एंटीबॉडीज वैक्सीन के बाद इतनी शक्तिशाली हो जाती हैं कि बिना बूस्टर डोज के भी वे कोरोना वायरस के तमाम वेरिएंट को विफल कर सकती हैं। नुसेनज़वेग उम्मीद जताते हैं कि यह एंटीबॉडीज पूरी उम्र व्यक्ति को कोरोना से सुरक्षा दे सकती हैं। 
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कोरोना से संक्रमित रह चुके लोगों के लिए एक डोज ही काफी - फोटो : pixabay
सभी के लिए टीकाकरण जरूरी
नुसेनज़वेग कहते हैं कि आप कोरोना से संक्रमित रह चुके हैं या नहीं, सभी लोगों को टीकाकरण जरूर कराना चाहिए। अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि जो लोग कोविड-19 से ठीक होकर
वैक्सीनेशन कर चुके हैं उन्हें बूस्टर डोज के बिना भी तमाम वेरिएंट के खिलाफ उच्च स्तर की सुरक्षा मिलती रह सकती है। अन्य सभी लोगों को वैक्सीन की दोनों खुराक जरूर लेना चाहिए।

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स्रोत और संदर्भ: 
SARS-CoV-2 infection induces long-lived bone marrow plasma cells in humans
Persistent Cellular Immunity to SARS-CoV-2 Infection


अस्वीकरण नोट: यह लेख नेचर जर्नल में प्रकाशित वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। इसमें बताई गई किसी भी दवा के उपयोग को लेकर अमर उजाला कोई दावा नहीं करता है।
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