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सावधान: वैक्सीनेशन के बाद एनाफिलैक्सिस के कारण हुई मौत, जानिए क्या है यह गंभीर समस्या

Tue, 15 Jun 2021 04:50 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वैक्सीन के बाद मौत का मामला (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
Medically reviewed by-
डॉ शुचिन बजाज
निदेशक
उजाला सिग्नस ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स 


कोरोना संक्रमण से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए टीकाकरण को सबसे प्रभावी उपाय के रूप में देखा जा रहा है। 13 जून 2021 तक के आंकड़ों के अनुसार देश के 22 फीसदी वयस्कों, 45 से अधिक आयु के करीब 42 फीसदी और 60 वर्ष से अधिक आयु के करीब 46 फीसदी लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक खुराक मिल चुकी है। इस आधार पर कहा जाए तो देश की 15 फीसदी आबादी को कम से कम एक खुराक जबकि 3.5 फीसदी आबादी को दोनों खुराक मिल चुकी हैं।
इस बीच टीकाकरण के साइड-इफेक्ट्स का अध्ययन कर रही सरकारी पैनल ने वैक्सीन के कारण मौत के पहले मामले की पुष्टि की है। मृतक की उम्र  68 साल बताई जा रही है, उसे  8 मार्च को वैक्सीन लगाई गई थी। विशेषज्ञों ने बताया कि बुजुर्ग में टीकाकरण के बाद एनाफिलैक्सिस के लक्षण देखे गए, जिसकी वजह से उसकी मौत हुई है। इस खबर ने लोगों के मन में डर का माहौल पैदा कर दिया है। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कि आखिर क्या है एनाफिलैक्सिस की समस्या? किन लोगों में वैक्सीनेशन के बाद इस तरह की समस्या के विकसित होने का खतरा हो सकता है?
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वैक्सीनेशन के कारण एनाफिलैक्सिस की समस्या - फोटो : PTI
वैक्सीनेशन के बाद सेंटर पर 30 मिनट रुकना जरूरी
भारत सरकार ने एडवर्स इवेंट फॉलोइंग इम्यूनाइजेशन (एईएफआई) को जानने के लिए एक कमेटी गठित की है। इस कमेटी ने वैक्सीन लगने के बाद हुई 31 मौतों की जांच करने के बाद पहली मौत की पुष्टि की है। एईएफआई समिति के अध्यक्ष डॉ एनके अरोड़ा ने बताया कि यह कोविड -19 टीकाकरण के बाद एनाफिलैक्सिस से जुड़ी पहली मौत है। इस मौत की पुष्टि ने टीकाकरण के बाद सेंटर पर 30 मिनट तक प्रतीक्षा करने की आवश्यकता पर फिर से जोर दिया है। एनाफिलैक्सिस जैसी अधिकांश प्रतिक्रियाएं इस अवधि के दौरान होती हैं।
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एलर्जिक रिएक्शन के बारे में जानिए - फोटो : Pixabay
क्या है एनाफिलैक्सिस
एनाफिलैक्सिस के बारे में जानने के लिए हमने उजाला सिग्नस हॉस्पिटल्स के निदेशक डॉ शुचिन बजाज से बात की। डॉ शुचिन बताते हैं कि एनाफिलैक्सिस अचानक होने वाली एलर्जी की समस्या है। यह एलर्जी किसी भी चीज से हो सकती है। किसी भी एलर्जी के बाद शरीर में सूजन  होना सामान्य है। एलर्जी के संपर्क में आने के कुछ सेकंड या मिनट के भीतर प्रतिक्रिया हो सकती है। एनाफिलैक्सिस कई मामलों में जानलेवा भी हो सकती है, जैसा कि वैक्सीन के कारण हुई एनाफिलैक्सिस से इस मौत के मामले में देखा गया है।
 

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कोरोना टीका लगवाने से पहले कुछ बातों का रखें ध्यान - फोटो : PTI
वैक्सीनेशन के बाद किन लोगों को एनाफिलैक्सिस हो सकती है?
डॉ शुचिन बताते हैं कि जिन लोगों को पहले से ही किसी भी चीज से गंभीर एलर्जी की शिकायत रही है, उन्हें वैक्सीन लगवाने के बाद एनाफिलैक्सिस जैसी दिक्कत होने का खतरा ज्यादा होता है। जिन लोगों को पहले से ही खाने की किसी चीज, ब्रश या धूल आदि से गंभीर एलर्जी रही हो,  उन लोगों में एनाफिलैक्सिस होने की आशंका अधिक होती है। ऐसे लोगों को विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए।
 
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एनाफिलैक्सिस के कारण सांस नली में हो सकती है सूजन - फोटो : iStock
डॉ शुचिन बताते हैं कि एनाफिलैक्सिस एक गंभीर समस्या है, इसके कारण कुछ लोगों को शॉक लगने या सदमे में जाने का भी खतरा हो सकता है। एनाफिलैक्सिस, वायुमार्ग में गंभीर सूजन का कारण बन सकती है, जिसके कारण लोगों को सांस लेने में तकलीफ महसूस होने लगती है। कभी-कभी, यह दिल के दौरा पड़ने का कारण भी बन सकती है। ये सभी जटिलताएं घातक हैं। 
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वैक्सीनेशन के पहले डॉक्टर से सलाह लें - फोटो : Social media
जिन लोगों को पहले से एलर्जी है उन्हें वैक्सीन नहीं लगवानी चाहिए?
इस सवाल के जवाब में डॉ शुचिन बताते हैं कि जिन लोगों को पहले से ही किसी चीज से गंभीर एलर्जी की शिकायत रह चुकी है, उन्हें टीकाकरण कराने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इसके लिए डॉक्टर आपको कुछ दवाइयां देते हैं जो इस तरह की एलर्जी की प्रतिक्रियाओं को बढ़ने नहीं देती हैं। इसके अलावा वैक्सीनेशन कराने के बाद सभी लोगों को सेंटर पर कम से कम 30 मिनट तक जरूर बैठना चाहिए, क्योंकि एनाफिलैक्सिस जैसी एलर्जी के लक्षण वैक्सीन लगने के कुछ मिनटों बाद ही दिखने लगते हैं। इस स्थिति में वैक्सीनेशन सेंटर पर मौजूद डॉक्टर इसे नियंत्रित करने के लिए दवाइयां दे सकते हैं।

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नोट: यह लेख एईएफआई द्वारा दी गई जानकारी और उजाला सिग्नस के डायरेक्टर डॉ शुचिन बजाज से एक बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

 
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