अमर उजाला शब्द सम्मान समारोह में जहां एक ओर शब्द साधकों को अलंकृत किया गया। वहीं मंच पर एक साथ तीन पीढ़ियों के सुरों की गूंज ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में हिंदी के प्रख्यात रचनाकार गोविंद मिश्र और गुजराती के विख्यात लेखक सितांशु यशश्चंद्र को 'आकाशदीप' सम्मान से नवाजा गया। साथ ही पांच कृतिकारों को श्रेष्ठ कृति सम्मान से अलंकृत किया गया। इसके अलावा पद्मभूषण और प्रख्यात वायलिन वादक डॉ. एन. राजम, उनकी बेटी संगीता शंकर और नातिन रागिनी शंकर की प्रस्तुति ने शाम को सुरमयी बनाया।
समारोह में प्रख्यात रचनाकार गोविंद मिश्र को 'आकाशदीप' अलंकरण से सम्मानित किया गया। साहित्यकार गोविंद मिश्र ने कहा कि लेखकों को जानने का सबसे अच्छा तरीका उन तक रचनाओं के माध्यम से पहुंचना है। मनुष्य की स्थिति गाजर मूली जैसी हो गई है, युद्ध को रोकने के बजाय खनिज पर लोगों की नजर है। शब्दों के अर्थ धुंधले और उल्टे सीधे हो रहे हैं।
समारोह में प्रख्यात कवि व नाटककार सितांशु यशश्चंद्र को भी 'आकाशदीप' अलंकरण से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि एक भाषा जब एक साहित्य को जन्म देती है जैसे गुजराती हिन्दी उड़िया आदि तो गत समय में साहित्य को जन्म देने लगी, तो समस्त भाषा कुल में एक हलचल मच जाती है, भले ही दिखे नहीं। हमारी भाषा हमारा कारागार नहीं बनना चाहिए, बल्कि पंख बने।
छाप (कविता) में ज्योति चावला को यह उनींदी रातों का समय है कृति के लिए सम्मान दिया गया। उन्होंने कहा कि स्त्री की दुनिया ने मुझे हमेशा आकर्षित किया है। स्त्री की दुनिया वास्तव में मेरे लिए विषयों का अंबार है। मेरे नए संग्रह ‘यह उनींदी रातों का समय है’ का मूल स्वर भी स्त्री कविता और राजनीतिक कविता ही है।
थाप (पहली किताब) श्रेणी में किंशुक गुप्ता को ये दिल है कि चोर दरवाजा के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि मेरी पीढ़ी के सामने एक अनिश्चित भविष्य अट्टहास कर रहा है। मैं इस भविष्य की आंखों में आंखें डालने के साहस को आज लेखन की सबसे बड़ी जरूरत समझता हूं।
छाप (कथेतर) में ध्रुव शुक्ल को वा घर सबसे न्यारा श्रेष्ठ कृति सम्मान से नवाजा गया। उन्होंने कहा कि हम उस पीढ़ी के लोग हैं, जिन्होंने कुमार गंधर्व के संगीत की पुनर्नवा हुई आंदोलित काया को अपने हृदयप्रांत के बसाव में अनुभूत किया है। लकदक संगीतकारों की दुनिया में उनकी सादगी अलग दिखती थी, जिन्होंने संगीत घरानों में चली आ रही संगीत शिक्षा की विधियों और उनके रूढ़ अभ्यास पर अनेक प्रश्न उठाए और स्वयं उनके सटीक उत्तर भी खोजे हैं।
श्रेष्ठ अनुवाद 'भाषाबंधु' श्रेणी में सुभाष नीरव को तुम क्यों उदास हो के लिए सम्मानित किया गया। सुभाष नीरव ने मानव-मन को परत-दर-परत उधेड़ने वाली कहानियों का अनुवाद किया है। मगर उनका अनुवाद भी हिंदी की ही कहानी लगती हैं। कथ्य और कथन, दोनों इन रचनाओं को विशिष्ट बना देते हैं।
श्रेष्ठ कृति सम्मान में पद्मभूषण और प्रख्यात संगीतज्ञ डॉ. एन राजम ने सभी कृतिकारों को एक-एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र और मां गंगा की प्रतिमा देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में प्रख्यात संगीतज्ञ और वायलिन वादक डॉ. एन. राजम ने वायलिन वादन किया। उनकी बेटी संगीता शंकर और उनकी पुत्री रागिनी शंकर ने भी वायलिन वादन किया। समारोह में वायलिन वादन में तीन पीढ़ियों के सुर एक साथ गूंजे। तबले पर बनारस घराने से अभिषेक मिश्र ने संगत की। इस दौरान उन्होंने राग श्याम कल्याण से वायलिन वादन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने पायो जी मैंने रामरतन धन पायो भजन, बनारस होली संगीत, राग भैरवी की भी प्रस्तुति दी।