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Kartik Aaryan Interview: उन्होंने मुझे करियर की पहली फिल्म, पहली हिट दी, उनकी एक आवाज पर मैं हाजिर मिलूंगा

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कार्तिक आर्यन - फोटो : अमर उजाला
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ठेठ हिंदी पट्टी से आए कार्तिक आर्यन नई सदी के ऐसे पहले अभिनेता हैं जो उत्तर भारत से आए और मुंबई की फिल्म नगरी में सुपरस्टार बनकर छा गए। और, वह भी बिना यशराज फिल्म्स या धर्मा प्रोडक्शन्स की किसी फिल्म के सहारे के। कार्तिक आर्यन का एक बड़ा इम्तिहान इस हफ्ते रिलीज हो रही फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ में होने वाला है। यह उनके करियर की पहली बायोपिक है। पैरालंपिक चैंपियन मुरलीकांत पेटकर की कहानी पर बनी इस फिल्म के बारे में, अपने व्यक्तिगत विकास और गॉसिप के सहारे सुर्खियों से दूर रहने के अपने फैसले के बारे में कार्तिक आर्यन ने ये खास बातचीत की ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल से।
 
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कबीर खान के साथ चंदू चैंपियन के सेट पर कार्तिक आर्यन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
‘सत्यप्रेम की कथा’ के बाद फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ निर्माता साजिद नाडियाडवाला के साथ आपकी दूसरी फिल्म है। इस फिल्म के लिए आपने कहानी को हां की या फिर निर्दशक कबीर खान के नाम को?
जब मैं ‘सत्यप्रेम की कथा’ की शूटिंग कर रहा था उसी दरम्यान कबीर खान मुझे एक कहानी सुनाने के लिए मिले थे। जो कहानी उन्होंने मुझे सुनाई, उसने मेरे होश उड़ा दिए। मैं ऐसा हो गया कि ये कहानी सच्ची कहानी कैसे हो सकती है? इस पर यकीन करना मुश्किल था लेकिन ये सच है और सब तथ्यों पर आधारित है। आश्चर्य मुझे ये भी हुआ कि इतने वक्त तक ये  कहानी बाहर क्यों नहीं आई और लोगों को इस कहानी के बारे में अब तक पता क्यों नहीं है?
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कार्तिक आर्यन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
लेकिन बहुत मशहूर लोगों की बायोपिक करना भी बहुत मुश्किल होता है। जिनके बारे में पता न हो तो उन किरदारों की कहानियां कर रहे कलाकारों से उतनी उम्मीदें नहीं होतीं..
मेरी पहली बायोपिक है तो मुझे ये पता नहीं कि इन दोनों परिस्थितियों का अंतर कैसा होता है। मैंने जो ‘चंदू चैंपियन’ के लिए किया, वह मेरे लिए बहुत ज्यादा मुश्किल रहा है। मुझे तमाम ऐसे हुनर सीखने पड़े जिनके पास से भी मैं जिंदगी में नहीं गुजरा। गहरे पानी में जाना मुझे शुरू से डराता रहा है। मुक्केबाजी मैंने सपने में भी नहीं की। लंगोट पहनकर अखाड़ा उतरने की बात भी दूर की कौड़ी है। और ये सारी चीजें मैं एक साथ एक ही फिल्म में कर रहा हूं। यूं भी लगता है कि मैं ‘दंगल’ और ‘सुल्तान’ एक साथ कर रहा हूं। लेकिन, फिर ये फिल्म एक वॉर फिल्म भी है। ये फिल्म मेरे जीवन की सबसे कठिन फिल्म रही है।

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कार्तिक आर्यन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, पहली बार आप एक बार में सिर्फ एक ही फिल्म करते रहे?
हां, पहले ऐसा तब होता था जब मेरे पास फिल्में नहीं होती थीं। जब से गाड़ी थोड़ा चली है तो मैं फिल्में भी जल्दी जल्दी करता हूं। लेकिन ये पहली बार था कि जैसे ही मुझे कहानी सुनाई गई मैं तुरंत फिल्म करने को तैयार हो गया। थोड़े दिन बाद इस बात का एहसास हुआ कि ये  फिल्म तो एक साथ बनेगी। तैयारी शूटिंग से साल भर पहले शुरू होगी और तब मैं कोई फिल्म नहीं कर पाऊंगा और जब शूटिंग शुरू हो जाएगी तब तो दूसरी फिल्म सोच भी नहीं पाऊंगा। मुझे समझ आया कि ये फिल्म मेरी जिंदगी के डेढ़ दो साल लेकर जाने वाली है पर मुझे इस कहानी से इतना प्यार हो चुका था कि मेरे दिमाग में कभी कोई दूसरी बात आई ही नहीं।
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कार्तिक आर्यन, कबीर खान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
निर्देशक कबीर खान को यशराज फिल्म्स स्पाई यूनिवर्स का संस्थापक माना जा सकता है, उन्होंने और भी बड़ी फिल्में बनाईं तो जब उनके कद का कोई निर्देशक कार्तिक आर्यन के पास फिल्म लेकर आता है, तो कहीं आप उनके आभामंडल से चौंधियाते तो नहीं..?
कबीर खान जैसा निर्देशक जिसका काम उनके नाम से पहले आपके जहन में पहुंचता है, वह जब मेरे जैसे एक युवा कलाकार पर ये भरोसा करते हैं कि मैं उनका सोचा हुआ ‘चंदू चैंपियन’ जैसा किरदार कर सकता हूं, तो ये इस बात पर मोहर लगाता है कि मैं सही रास्ते पर हूं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि कबीर खान जैसे उम्दा निर्देशक मेरे पास फिल्म लेकर आएंगे और वह भी ऐसी फिल्म लेकर आएंगे जो मेरी स्थापित छवि की फिल्मों से बिल्कुल ही अलग होगी।
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कार्तिक आर्यन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अपनी इस रूमानी और हंसमुख नायक की स्थापित छवि से इतर फिल्में ‘फ्रेडी’ और ‘धमाका’ भी आप कर ही चुके हैं। किसी फिल्म के लिए जोखिम लेने का फैसला आप कब करते हैं?

इसकी तमाम वजहें हो सकती हैं लेकिन सबसे बड़ी वजह जोखिम लेने की जो होती है, वह मेरे लिए किसी फिल्म की पटकथा है। हो सकता है कि जो पटकथा मैंने चुनी या सुनी, उसके मुताबिक कोई फिल्म नहीं भी बनी, लेकिन ये मानवीय भूल भी हो सकती है। अधिकतर समय मेरी छठी इंद्रिय किसी पटकथा को लेकर जो संकेत देती है, मैं उस पर भरोसा करता हूं। ‘भूल भुलैया 2’ की घोषणा से लेकर इसके बनने तक क्या क्या नहीं कहा लोगों ने, लेकिन मुझे अपने फैसले पर भरोसा था और ये भरोसा सही भी साबित हो चुका है।
 
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तू झूठी मैं मक्कार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, ‘भूल भुलैया 2’ की सफलता के बाद क्या आप उस निर्देशक के साथ फिर काम करना चाहेंगे जिन्होंने शुरुआत आपके साथ की और करियर की सबसे बड़ी फिल्म किसी और के साथ बनाई?
मुझे जोखिम लेना आता है ये बात मैं कह ही चुका हूं। लेकिन, मैं अपनी टीम के साथ बहुत जुड़ाव भी महसूस करता हूं। ऐसे में जब कोई टीम से छिटकता है तो दुख तो होता ही। लेकिन, उन्होंने मुझे ये फिल्म (तू झूठी मैं मक्कार) बनाते समय इसके बारे में बता दिया था। मेरी सफलता तब नई नई थी और तब शायद मेरे ऊपर उतना पैसा लगाने वाले लोग नहीं थे, जितना पैसा उस फिल्म के लिए चाहिए होगा। लेकिन, अब भी वह कोई फिल्म मुझे करने के लिए कहेंगे तो मैं आंख बंद करके हां ही कहूंगा क्योंकि उन्होंने मुझे मेरी पहली फिल्म दी थी और पहली बड़ी हिट फिल्म भी दी थी। हमारा रिश्ता अब भी वैसा ही है।

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कार्तिक आर्यन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
किसी निर्देशक का काम पसंद आता हो तो कभी उससे अपनी तरफ से मिलने की कोशिश करते हैं?
नहीं, बस इसी मामले में मैं बहुत शर्मीला हूं। मुझे अब तक काम मांगना नहीं आया है। किसी का काम पसंद आता है तो मैं संदेश के जरिये बधाई जरूर भेजता हूं। लेकिन, खुद किसी निर्देशक से काम मांगने में मुझे संकोच होता है। जब तक मैं किसी व्यक्ति के साथ घुल मिल न जाऊं, मुझे ऐसे खुलकर कुछ भी कहना बहुत अजीब सा लगता है। मुझे लगता है कि निर्देशक इस मामले में ज्यादा बेफिक्र होते हैं, क्योंकि वह अपनी कहानियों के लिए कलाकार तलाश रहे होते हैं।

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अपनी बहन के साथ कार्तिक आर्यन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
चलते चलते एक सवाल, आपके किस्सों को लेकर। अरसा हो गया किसी हीरोइन से मिलने-मिलाने की आपकी कोई खबर नहीं आई?
नहीं अब मैं इन सब चीजों से मीलों दूर हूं। मुझे खुद पर काबू रखना भी आ गया है। मुझे भी इस बात का एहसास है कि मेरे बारे में जो कुछ भी पहले छपता रहता था, वह ठीक नहीं था। लेकिन, तब उस पर मेरा नियंत्रण नहीं होता था। अभी कम से कम मैं उस स्थिति में आ गया हूं जहां मैं इसे नियंत्रित कर पाता हूं। मैं अब उन सारी परिस्थितियों से दूर रहता हूं जिनकी वजह से किस्से बनने शुरू होते हैं। मेरा पूरा ध्यान अब सिर्फ काम पर है और अपनी टीम को भी मैंने साफ कह दिया है कि ऐसी किसी चीज में मेरा समय व्यर्थ न करें।
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