ओटीटी की दुनिया ने सिनेमा का अलग रूप गढ़ा है। वेब सीरीज में क्राइम और हिंसा का खुल्लमखुल्ला खेला दिखाया जाने लगा है। अधिकांश में अपराधियों और आपराधिक ठिकानों की पृष्ठभूमि का नाता उत्तर प्रदेश से जोड़ दिया जाता है। यूं तो सिनेमा में उत्तर प्रदेश को दिखाए जाने की परंपरा नई नहीं है। न ही यहां के क्राइम की कहानी को फिल्मों में भुनाना नया है। फिल्म 'गंगा जमना' से लेकर 'जिला गाजियाबाद' तक तमाम फिल्मों में यूपी के अपराध और हिंसा को दिखाया गया है। लेकिन, इसके साथ-साथ यहां की सामाजिक स्थितियों पर भी बराबर बात हुई है। मगर, हाल के दिनों का जो दौर है, उसमें समाज कहीं पीछे छूट रहा है और अपराध, हिंसा एक मसाले के रूप में फिल्मों में शामिल होते नजर आ रहे हैं। बेशक उत्तर प्रदेश का चरित्र अपराध और हिंसा वाला रहा है, लेकिन यहां की गंगा-जमुनी तहजीब, साहित्य-कला-संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहरें इस प्रदेश की गौरवगाथाएं कहती हैं। ओटीटी के जमाने में प्रदेश की यह खूबियां गुम-सी हैं। हालांकि, 'पंचायत' वेबसीरीज इस मामले में जरूर अलग कहानी कहती है, जो ग्रामीण पिछड़ेपन और भ्रष्टाचार पर केंद्रित है। यह मुद्दा प्रासंगिक भी है। लेकिन, इससे इतर कई वेब सीरीज में यूपी की छवि 'गनतंत्र' वाली बना दी गई है। इसका उदाहरण हैं यह पांच वेब सीरीज...