लापता लेडीज
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मेरे साथ भी ‘अच्छे घर की बेटी’ वाला फ्रॉड हुआ
जैसा कि आपने पूछा फिल्म के जो संवाद हैं जैसे कि सास- बहू या देवरानी-जेठानी दोस्त क्यों नहीं हो सकतीं? तो ये सब मैंने अपने आसपास से ही लिया है। हमारे देश में किचन पॉलिटिक्स बहुत हद दरजे की होती है और ये क्यों होती है, ये आज तक कोई समझ नहीं पाया है। दूसरा संवाद जो फिल्म में मंजू माई बोलती है कि देश में लड़कियों के साथ बहुत बहुत बड़ा फ्रॉड चला आ रहा है, ‘अच्छे घर की बेटी का’ तो ये मेरे साथ भी हुआ है। मेरे ऊपर भी कपडों को लेकर पाबंदी रही। उम्र में बड़े लड़कों से बात करने पर पाबंदी रही। और, ये सब हमारे आसपास अब भी हो रहा है। फिल्म में ये सब शामिल करने का बस एक ही मकसद रहा कि लोग इस पर बात करें, सोचें और सोच को बदलें। अच्छा लग रहा है ये सब हकीकत में तब्दील होते हुए। मेरी तीसरी फिल्म की शूटिंग पूरी हो चुकी है। चौथी बस फ्लोर पर जाने ही वाली है।