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देवभूमि स्थित इस मंदिर के बारे में प्रचलित एक मान्यता के कारण पहुंचते हैं सैकड़ों भक्त

Mon, 25 Mar 2019 01:44 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : uttarakhandarshann
देवभूमि स्थित मां के इस मंदिर में एक बार जाने से सातजन्मों के पापों से मुक्ति मिल जाती है। पंडित ओमप्रकाश सती ने बताया कि सुरकंडा देवी मंदिर के बारे यह मान्यता बेहद प्रचलित है। जिस कारण मंदिर में रोजाना भक्तों का तांता लगा रहता है। 
 
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उन्होंने बताया कि सिद्धपीठ मां सुरकंडा देवी का मंदिर टिहरी के जौनुपर पट्टी में सुरकुट पर्वत पर स्थित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार जब राजा दक्ष ने कनखल में यज्ञ का आयोजन किया तो उसमें भगवान शिव को नहीं बुलाया। शिवजी के मना करने पर भी सती यज्ञ में पहुंच गईं। वहां सती और भगवान शिव का अपमान किया गया। जिसके बाद माता सती यज्ञ कुंड में कूद गईं।
 
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इसके बाद भगवान शिव रौद्र रूप में आ गए। वह सती का शव त्रिशूल में टांगकर आकाश भ्रमण करने लगे। इस दौरान सती का सिर सुरकुट पर्वत पर गिरा। तभी से ये स्थान सुरकंडा देवी सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

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पंडित सती ने बताया कि इसका उल्लेख केदारखंड व स्कंद पुराण में मिलता है। सुरकंडा मंदिर में गंगा दशहरा के मौके पर देवी के दर्शनों का विशेष महत्व है।
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मां सुरकंडा मंदिर
माना जाता है कि इस समय जो देवी के दर्शन करता है। उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

 
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surkanda devi temple
मां के दरबार से बद्रीनाथ, केदारनाथ, तुंगनाथ, चौखंबा, गौरीशंकर, नीलकंठ आदि सहित कई पर्वत श्रृखलाएं दिखाई देती हैं। मां सुरकंडा देवी के कपाट साल भर खुले रहते हैं।(  अमर उजाला किसी तरह अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देता। यह लेख केवल रीडर्स की पसंद को ध्यान में रखकर पेश किया गया है। )
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