फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Punjab Election Result 2022: माझा व दोआबा के वो दिग्गज, जिन्होंने कभी हार नहीं देखी, इस बार टक्कर कड़ी

Thu, 10 Mar 2022 08:21 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
विज्ञापन
1 of 7
पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 - फोटो : फाइल
पंजाब में गुरुवार यानी 10 मार्च को विधानसभा चुनाव के परिणाम आएंगे। चुनाव में कुछ दिग्गज नेता ऐसे भी हैं जिन्हें कभी हार का सामना नहीं करना पड़ा है। इस बार भी उनकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। माझा से बिक्रम सिंह मजीठिया, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और दोनों डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा और ओपी सोनी मैदान में हैं। इन्होंने कभी हार का सामना नहीं किया। वहीं दोआबा से राणा गुरजीत सिंह व पद्मश्री परगट सिंह मैदान में हैं। 
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 7
सुखजिंदर सिंह रंधावा - फोटो : फाइल फोटो
सुखजिंदर सिंह रंधावा मूलरूप से पंजाब के माझा क्षेत्र के गुरदासपुर के रहने वाले हैं, वह डेरा बाबा नानक सीट से विधायक हैं। वे लगातार दो बार 2002 और 2007 में विधायक रहे और फिर पिछले चुनाव 2017 में कांग्रेस से विधायक बने। राज्य कांग्रेस के उपाध्यक्ष और महासचिव पद पर भी वह रह चुके हैं। डेरा बाबा नानक से विधायक और डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा को राजनीति विरासत में मिली है। वे ऐसे परिवार से आते हैं जिनकी तीन पीढ़ियां कांग्रेस में रहीं। उनके पिता संतोख सिंह दो बार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे हैं। 
विज्ञापन

3 of 7
डिप्टी सीएम ओपी सोनी - फोटो : फाइल फोटो
दूसरे डिप्टी सीएम ओपी सोनी भी माझा से हैं। इन्होंने भी कभी हार का मुंह नहीं देखा। पांच बार के विधायक ओपी सोनी 1997, 2002, 2007, 2012 और 2017 में विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में सोनी ने अमृतसर सेंट्रल सीट से भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को 21 हजार से ज्यादा मतों से हराया था। वह 1991 में अमृतसर के पहले मेयर बने थे। वह पंजाब कांग्रेस पब्लिक कमेटी के महासचिव और दो वर्ष तक ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ मेयर के चेयरमैन भी रह चुके हैं। 

4 of 7
नवजोत सिंह सिद्धू - फोटो : फाइल फोटो
नवजोत सिंह सिद्धू ने भी कभी हार का मुंह नहीं देखा। 2004 के लोकसभा चुनाव से नवजोत सिंह सिद्धू ने राजनीति पारी की शुरुआत की थी। वह भाजपा की टिकट पर अमृतसर से लोकसभा का चुनाव जीता था। 2007 के उपचुनाव में सिद्धू दोबारा सांसद बने। 2009 के लोकसभा चुनाव में भी वह फिर जीते। 2017 के पंजाब चुनाव से पहले सिद्धू ने भाजपा छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया था। 2017 में पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनी और नवजोत सिंह सिद्धू कैबिनेट मंत्री बने। कैप्टन के साथ मनमुटाव के बीच सिद्धू को कांग्रेस की पंजाब इकाई का अध्यक्ष बनाया गया। उनका मुकाबला बिक्रम सिंह मजीठिया से है।
विज्ञापन

5 of 7
बिक्रम सिंह मजीठिया - फोटो : फाइल फोटो
बिक्रम सिंह मजीठिया पहली बार वर्ष 2007 में चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे और पहली बार पंजाब सरकार में मंत्री बने। मजीठिया का राजनीतिक रसूख का पता इस बात से लगाया जा सकता है कि उनकी बहन हरसिमरत कौर और उनके बहनोई सुखबीर सिंह बादल हैं। 2012, 2017 में लगातार विधायक बने और इस बार अमृतसर पूर्वी सीट से नवजोत सिंह सिद्धू से टक्कर दे रहे हैं।
विज्ञापन

6 of 7
मंत्री परगट सिंह - फोटो : फाइल
परगट सिंह जालंधर कैंट से विधायक हैं। पद्मश्री परगट सिंह भी कभी हारे नहीं है। 2012 में अकाली दल की तरफ से कैंट विधानसभा हलका से चुनाव लड़ा और जीता। 2017 में कांग्रेस में शामिल होकर विधानसभा चुनाव जीता। वह चन्नी सरकार में शिक्षा मंत्री हैं। इस बार उनके इलाके में कांटे की टक्कर है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
राणा गुरजीत सिंह - फोटो : फाइल फोटो
राणा गुरजीत सिंह कपूरथला से कांग्रेस के विधायक और चन्नी सरकार में मंत्री हैं। राणा भी कभी चुनाव नहीं हारे हैं। उन्होंने नरेश गुजराल को संसदीय चुनाव हराकर सियासत में कदम रखा था। इसके बाद वह लगातार विधायक बनते रहे। कपूरथला में उनका सिक्का चलता है। मगर इस बार पार्टी में ही उनका विरोध है और कड़ी टक्कर भी मिल रही है।  
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें