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पाकिस्तान की वो जगह, जहां महिलाएं 80 साल की उम्र में भी लगती हैं जवान और खूबसूरत

Sun, 26 May 2019 09:04 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हुंजा समुदाय की लड़कियां - फोटो : Facebook
अपने आप को जवान और खूबसूरत कौन नहीं रखना चाहता है। हालांकि उम्र के साथ-साथ लोगों की जवानी और खूबसूरती दोनों ढलने लगती है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि पाकिस्तान में एक ऐसी भी जगह है, जहां की महिलाएं 80 साल की उम्र में भी महज 30-40 की लगती हैं। 
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हुंजा समुदाय की लड़की - फोटो : Facebook
पाकिस्तान की ये महिलाएं दुनिया की सबसे खूबसूरत कही जाती हैं। एक ओर जहां यहां की औरतें बूढ़ी होने पर भी जवान दिखती हैं, तो वहीं यहां के पुरुष 90 साल की उम्र में भी पिता बन सकते हैं। 
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हुंजा समुदाय की महिलाएं - फोटो : Facebook
हम बात कर रहे हैं हुंजा समुदाय के बारे में, जो उत्तरी पाकिस्तान की काराकोरम पहाड़ियों में स्थित हुंजा घाटी में रहते हैं। कहते हैं कि यहां के लोग औसतन 120 साल तक जिंदा रहते हैं। 

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हुंजा समुदाय की महिलाएं - फोटो : Facebook
हुंजा समुदाय के लोगों को बुरुशो भी कहते हैं। ये बुरुशास्की भाषा बोलते हैं। कहा जाता है कि ये समुदाय सिकंदर महान की सेना के वंशज हैं, जो चौथी सदी में भारत आए थे। 
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हुंजा समुदाय की लड़कियां - फोटो : Facebook
कहते हैं कि हुंजा समुदाय के लोग पाकिस्तान के अन्य समुदाय के लोगों से कहीं ज्यादा शिक्षित हैं। हुंजा घाटी में इनकी संख्या 85 हजार से भी ज्यादा हैं। यह समुदाय मुस्लिम धर्म को मानता है और इनके सारे क्रियाकलाप भी मुस्लिमों जैसे ही हैं। 
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हुंजा घाटी - फोटो : Facebook
हुंजा घाटी पाकिस्तान के मशहूर पर्यटन स्थलों में से एक है। दुनियाभर से लोग यहां पहाड़ों की खूबसूरती देखने आते हैं। इस समुदाय के ऊपर कई किताबें भी लिखी जा चुकी हैं, जिसमें 'द हेल्दी हुंजाज' और 'द लॉस्ट किंगडम ऑफ द हिमालयाज' शामिल हैं। 
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हुंजा समुदाय की महिलाएं - फोटो : Facebook
इस समुदाय के लोग शारीरिक और मानसिक तौर पर बहुत मजबूत होते हैं। कहते हैं कि यहां के लोगों की जीवनशैली ही उनके लंबे जीवन का राज है। ये लोग सुबह पांच बजे उठ जाते हैं। यहां के लोग साइकिल या गाड़ियों का इस्तेमाल बहुत कम ही करते हैं और पैदल ज्यादा चलते हैं। 

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हुंजा समुदाय की लड़की - फोटो : Facebook
कहते हैं कि यहां के लोग दिन में सिर्फ दो बार ही खाना खाते हैं। पहली बार दोपहर में 12 बजे और दूसरी बार रात को 8-9 बजे के करीब। इनका खाना भी पूरी तरह कुदरती होता है, मतलब कि उनकी सब्जियों, दूध, फल, मक्खन आदि में किसी तरह की मिलावट नहीं होती है। 
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हुंजा समुदाय की लड़कियां - फोटो : Facebook
हुंजा समुदाय के लोग आमतौर पर जौ, बाजरा, कुट्टू और गेहूं का आटा ही खाते हैं, जो इन्हें शारीरिक तौर पर मजबूत बनाने में काफी मदद करता है। कहते हैं कि ये लोग मांस का सेवन बहुत कम ही करते हैं। किसी खास अवसर पर ही यहां मांस बनता है, लेकिन उसमें भी ये लोग बहुत हिसाब से ही खाते हैं। 
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