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यूपी: दावे फेल, बोर्ड परीक्षाओं में धड़ल्ले से नकल

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यूपी बोर्ड की परीक्षा के पहले हिंदी के पेपर में ही नकलचियों ने नकल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। एक तरफ जमकर नकल करवाई गई, वहीं इस नकल में सैंकड़ों छात्रों को भी पकड़ा गया।
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यूपी बोर्ड परीक्षा के पहले ही दिन एक मुन्नाभाई हत्थे चढ़ गया। गुन्नौर के डीएवी इंटर कालेज में पांच हजार रुपये लेकर दूसरे परीक्षार्थी के स्थान पर हाईस्कूल की परीक्षा देते एक युवक को पकड़ लिया गया। केंद्र व्यवस्थापक की तहरीर पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

माध्यमिक शिक्षा परिषद के बोर्ड परीक्षा केंद्र डीएवी इंटर कालेज गुन्नौर में गुरुवार को सुबह साढ़े सात बजे परीक्षा शुरू हुई। सचल दल और कक्ष निरीक्षक ने चेकिंग के  दौरान एक छात्र से उसका नाम पूछ लिया तो पहले उसने नीरज बताया फिर नीरेश कुमार। पिता का नाम पूछा तो वह सकपका गया, बोला प्रवेशपत्र देखकर बताता हूं। प्रवेश पत्र देखा गया तो उस पर छात्र का नाम मुहम्मद दाउद पुत्र मुहम्मद अयूब लिखा था, लेकिन फोटो नीरेश का लगा था। जिसे प्रेमपाल सिंह इंटर कालेज सैंजना मुस्लिम के प्रधानाचार्य आर. यादव द्वारा प्रमाणित किया गया था।
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केंद्र व्यवस्थापक योगेंद्र कुमार और सचल दल के अन्य सदस्य पहुंच गए। अब तक नीरेश दो पेजों पर उत्तर लिख चुका था। पड़ताल की गई तो पता चला कि नीरेश कुमार पुत्र चंदन सिंह निवासी मैढ़ोली ने 2014 में इंटरमीडिएट करके पढ़ाई छोड़ दी थी। उसने अपने परिचित मुहम्मद दाउद से पांच हजार रुपये लेकर उसके स्थान पर परीक्षा देने का जिम्मा लिया था। दाउद ने प्रेमपाल सिंह इंटर कालेज सैंजना मुस्लिम के प्रधानाचार्य से साठगांठ करके अपने प्रवेश पत्र पर नीरेश का फोटो लगवाकर प्रमाणित कराया था। केंद्र व्यवस्थापक योगेंद्र कुमार ने बताया कि छात्र को गुन्नौर कोतवाली पुलिस के हवाले करके उसके खिलाफ तहरीर दे दी गई। जिस पर पुलिस ने धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करके नीरेश को गिरफ्तार कर लिया।

विनोद कुमार जिला विद्यालय निरीक्षक संभल ने बताया कि गुन्नौर के डीएवी इंटर कालेज परीक्षा केंद्र से एक युवक को दूसरे छात्र के स्थान पर परीक्षा देते गिरफ्तार किया गया है। उसका फोटो प्रमाणित करने वाले प्रेमपाल सिंह इंटर कालेज के प्रधानाचार्य के खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की जा रही है। केंद्र व्यवस्थापकों को दिए गए सिम ठीक से कार्य नहीं कर सके। इसकी सूचना भी परिषद को भेजी गई है।

भारी अव्यवस्थाओं के बीच बोर्ड परीक्षा शुरू, पूरा सिस्टम फेल
कक्षा में 30 से 40 छात्र। सभी अपना पेपर करने में जुटे थे। हालात ऐसे थे जो सवाल नहीं आ रहा था उसे अपने साथी से पूछकर लिख रहे थे। कई छात्र एक-दूसरे की कॉपी में ताकाझांकी कर रहे थे। उन्हें रोकने और टोकने वाला कोई नहीं था। पूरी कक्षा लावारिस की तरह छोड़ दी गई थी। पानी पीने और बाथरूम जाने के लिए भी किसी की परमिशन की जरूरत नहीं थी। यह हाल बोर्ड परीक्षा का था। बृहस्पतिवार से शुरू हुई परीक्षा के पहले दिन पूरी तरह अव्यवस्था हावी रही। कक्ष निरीक्षकों की कमी के कारण दो कमरों में एक शिक्षक की ड्यूटी लगाई गई। शहर के कई केंद्रों पर पुलिस तक नहीं पहुंची। देहात की स्थिति तो और भी बदतर रही। ऐसी व्यवस्था से नकल विहीन परीक्षा कराने के दावों की पोल खुल गई।

पहले दिन सुबह की पाली में हाईस्कूल की हिंदी और इंटरमीडिएट में सैन्य विज्ञान की परीक्षा थी। दूसरी पाली में इंटर हिंदी का पेपर था। दोनों पाली की परीक्षा कराने में केंद्र व्यवस्थापकों के पसीने छूट गए। ग्रामीण के साथ शहरी क्षेत्र में भी कक्ष निरीक्षकों का भारी टोटा रहा। केंद्र व्यवस्थापकों ने कॉलेज के बाबू और चपरासी तक को कक्ष निरीक्षक के तौर पर तैनात कर दिया। उसके बाद भी कमरे खाली रह गए। विद्यालयों की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि ऐसी स्थिति में नकल विहीन परीक्षा कराना संभव नहीं है।

इन केंद्रों की स्थिति रही खराब
डीएन इंटर कॉलेज, केके इंटर कॉलेज, एसडी सदर और एसएसडी लालकुर्ती में अन्य स्टाफ को भी ड्यूटी पर लगाया गया। उसके बाद भी कई कमरे खाली रह गए। जिस कारण भारी अव्यवस्था रही। छात्रों ने उसका फायदा उठाया और जमकर नकल की। ग्रामीण क्षेत्र के बड़े परीक्षा केंद्रों का तो और भी बुरा हाल रहा। क्योंकि यहां बनाए गए परीक्षा केंद्रों पर अधिकांश शिक्षक पहले से ही ड्यूटी देने को तैयार नहीं थे।

एप की व्यवस्था धराशाई
परीक्षा के दौरान उपस्थित और अनुपस्थित की व्यवस्था लागू करने का माध्यमिक शिक्षा परिषद का सपना धराशाई हो गया है। बोर्ड की तरफ से सभी केंद्र व्यवस्थापकों को बांटे गए बीएसएनएल के अधिकांश सिम एक्टिवेट ही नहीं हो पाए हैं, जिस कारण से पहले दिन एप पर जानकारी अपलोड नहीं की जा सकी। दरअसल परिषद की तरफ से सभी परीक्षा केंद्र को सिम कार्ड दिये थे जो केंद्र व्यवस्थापकों को एंड्रायड फोन में डालकर परिषद की तरफ से जारी एप की जानकारी को डाउनलोड करना था, फिर उस पर प्रतिदिन की परीक्षा की जानकारी को एप पर अपलोड करना था।

मेरठ में सबसे ज्यादा अनुपस्थित रहे छात्र
शिक्षा विभाग की तरफ से पहली पाली की उपस्थिति का ब्योरा दिया गया है। मंडल में 14042 छात्रों ने परीक्षा छोड़ी है, जिसमें से सबसे ज्यादा 5931 छात्र मेरठ के हैं। हाईस्कूल हिंदी की परीक्षा के लिए 55172 छात्र पंजीकृत थे, जिनमें से 49241 छात्रों ने परीक्षा दी।

मंडल में पकड़े आठ नकलची
मेरठ मंडल में दोनों पालियों में आठ छात्र नकल करते पकड़े गए। बागपत में तीन, बुलंदशहर में 2, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर में एक -एक नकलची पकड़ा गया। इसके अलावा मेरठ के केके इंटर कॉलेज में एक छात्र नकल करते पकड़ा गया। पहली पारी में कोई भी छात्र नकल करते नहीं मिला था।

खानापूर्ति के लिए गए पुलिसकर्मी
सुबह और शाम की पाली में सुरक्षा व्यवस्था भी रामभरोसे रही। थाने की ओर से परीक्षा केंद्रों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। सिपाही ड्यूटी पर तो पहुंचे, लेकिन बीच में ही केंद्र छोड़कर चले गए। अधिकांश समय केंद्र बिना सुरक्षाकर्मियों के रहे।

एक्टिव रहा सचल दल
तमाम अव्यवस्थाओं के बीच सचल दल के एक्टिव रहने से कुछ राहत की सांस मिली। दोनों पालियों में सचल दल ने परीक्षा का जायजा लिया। हालांकि संख्या कम होने के कारण सभी केंद्रों पर सचल दल नहीं पहुंच पाया।

ब्रज में पर्ची ही नहीं, बोलकर भी कराई नकल

यूपी बोर्ड की हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं के पहले दिन ही मैनुपरी में चार, एटा में चार, आगरा में दो, मथुरा में हाईस्कूल के छह और इंटर की परीक्षा में चार पकड़े गए। मथुरा में एक परीक्षार्थी कापी लेकर भाग गया। उधर, मैनपुरी के किशनी के केंद्र में बोलकर नकल कराने पर दो कक्ष निरीक्षकों को डीआईओएस ने कार्यमुक्त कर दिया है।

आगरा के केदारनाथ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में वित्त एवं लेखा अधिकारी वैभव कुमार को सभी कापियां एक जैसी लिखी मिलीं। इनकी स्कैनिंग के लिए लिखा गया। संभावना जताई जा रही है कि यहां बोलकर नकल कराई गई। वहीं, चार केंद्रों से आठ ऐसे कक्ष निरीक्षक पकड़ में आए जो संबंधित विषय के ही थे। आगरा में हाईस्कूल हिंदी में 86996 छात्र पंजीकृत थे, यहां 12362 अनुपस्थित रहे।

जनपद---------पंजीकृत छात्र---अनुपस्थित
फीरोजाबाद---------61,109---9,689
एटा---------51064---9263
कासगंज---------29465---5442
मैनपुरी---------56117---12023
मथुरा---------65785---9680

पहले दिन फेल हुए परीक्षा के इंतजाम
यूपी बोर्ड परीक्षा के पहले दिन बोर्ड की ओर से किए गए सारे इंतजाम फेल हो गए। केंद्र व्यवस्थापकों को बोर्ड की ओर से तैयार मोबाइल ऐप फेल हो गया। क्विक रिस्पांस कोड (क्यूआरसी) के लिए दिए गए मोबाइल सिम पहले दिन काम नहीं कर सके। बोर्ड की ओर से इस सिम को रिचार्ज तक नहीं करवाया गया था। हेल्पलाइन पर डायल करने पर लगातार व्यस्त टोन मिल रही थी।

प्रधानाचार्यों ने बताया कि सिम को 500 रुपये से रिचार्ज करना है। केंद्र व्यस्थापकों के सामने समस्या खड़ी हो गई कि वह किस नंबर पर सिम को रिचार्ज करवाएं। प्रधानाचार्यों ने बताया कि दूसरी पाली की परीक्षा में क्यूआरसी सिस्टम पूरी तरह से फेल रहा। इसमें परीक्षार्थियों का रिकार्ड खुला ही नहीं। पहले दिन ही बोर्ड की ओर से लागू क्यूआरसी सिस्टम फेल होने के बाद अब केंद्र व्यवस्थापकों को पुरानी व्यवस्था के आधार पर परीक्षार्थियों का विवरण बोर्ड को भेजना होगा।

प्रदेश सरकार की ओर से लागू किया गया मोबाइल ऐप फेल होने के संबंध में प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री विजय बहादुर पाल से सवाल करने पर वह इस संबंध में कुछ भी बोलने से मना कर दिए। बार-बार सवाल करने के बाद उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था को सफल होने में समय लगता है। अमर उजाला की ओर इस  ऐप लागू किए जाने के मामले में मोबाइल कंपनी का लाभ पहुंचाने का आरोप लगाने पर माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री ने कोई जवाब नहीं दिया।

क्यूआरसी फेल, सीसीटीवी से हाथ खींचा
बोर्ड की ओर से पहली बार लागू क्यूआरसी फेल होने तथा सीसीटीवी व्यवस्था लागू नहीं होने से परीक्षा केंद्रों पर मनमानी रही। सीसीटीवी नहीं लगाने के बोर्ड के फैसले से नकल रोकना कठिन हो गया। परीक्षा केंद्रों पर अबकी बार केंद्र व्यवस्थापकों की ओर से वीडियो रिकार्डिंग भी नहीं करवाई गई। 2015 की बोर्ड परीक्षा से पहले तत्कालीन प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा एसपी सिंह ने परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी लगाने की बात कही थी, उनके हटने के बाद कोडिंग वाली कॉपी की व्यवस्था लागू होने से कई केंद्र व्यवस्थापकों को परेशानी हुई।

कापियों पर एक नहीं दो-दो कोड पड़े होने और कोड मिसिंग होने से परेशानी हुई। जिला विद्यालय निरीक्षक कोमल यादव क्यूआरसी के सफल होने का दावा कर रहे है, जब उनसे कहा गया कि दूसरी पाली में क्यूआरसी काम नहीं किया तो उनका कहना था कि सर्वर के कारण परेशानी हुई।

प्रधानाचार्य, शिक्षकों, सिपाहियों को तमंचा दिखाकर धमकाया
हनुमानगंज (इलाहाबाद)। बोर्ड परीक्षा के पहले दिन पहली पाली में ही सरायइनायत इलाके में ककरा दुबावल स्थित परीक्षा केंद्र में गुंडई की हद हो गई। तमंचा लेकर तीन बदमाश परीक्षा केंद्र में जबरन घुसे और विरोध पर प्रधानाचार्य, शिक्षकों, चपरासी के साथ ही सिपाहियों को भी धमकाया। छात्रों पर फब्तियां कसीं। एक छात्र से परचा छीनकर स्कूल के बाहर फेंक दिया। सिपाहियों से खबर पाकर पहुंचे थानाध्यक्ष सरायइनायत पर भी पथराव कर दिया। इतनी गुंडई के बावजूद पुलिस बदमाशों को पकड़ नहीं सकी। आलम यह कि दूसरी पाली की परीक्षा के दौरान भी यही गुंडे स्कूल के बाहर दिखे।

यह घटना है ककरा दुबावल स्थित महर्षि दुर्वासा इंटर कॉलेज की। बृहस्पतिवार सुबह की पाली में हाईस्कूल बोर्ड की परीक्षा चल रही थी। वहां दो सिपाहियों की ड्यूटी थी लेकिन वे आए साढ़े आठ बजे। तब तक वहां नकल कराने वालों का मजमा लग गया था। तभी उसी गांव के विकास समेत तीन गुंडे आए। विकास के बारे में बताया गया कि वह तमंचा खोंसे था। सिपाहियों के सामने वे तीनों स्कूल के गेट के पास पहुंचे और अंदर जाने से रोकने पर चपरासी अच्युतानंद को धमकाते हुए धकेल दिया। भीतर घुसने पर इन तीनों को प्रधानाचार्य डॉ.लवकुश सिंह और शिक्षकों ने रोका तो उन्हें भी गुंडों ने बुरा-भला कहते हुए गोली मारने की धमकी दी। वे तीनों टहलते हुए उस तरफ गए जहां छात्राएं परीक्षा दे रही थीं। छात्राओं पर फब्तियां कसीं और अश्लील इशारे किए। फिर एक छात्र से परचा छीनकर छत पर जाकर बाहर फेंक दिया।

प्रधानाचार्य के बुलाने पर दोनों सिपाही अंदर आए तो गुंडों ने उनसे भी गालीगलौज कर दी। सिपाहियों से खबर पाकर थानाध्यक्ष सरायइनायत अमित मिश्रा पहुंच गए। तब तक वे तीनों कॉलेज के पीछे चले गए थे। थानेदार के उधर जाते ही गुंडों ने ईंट-पत्थर चला दिए। ऐसे में फोर्स की कमी के कारण थानेदार को रुकना पड़ा। पुलिस गुंडों को पकड़े बगैर लौट गई। बेखौफ अपराधी दूसरी पाली में भी स्कूल के सामने टहलते रहे।

पिछले साल भी विकास सेक्टर मजिस्ट्रेट के सामने तमंचा लेकर इसी स्कूल में घुसा था। तब उसके खिलाफ मुकदमा लिखा गया था। गांव में भी वह कई बार फायरिंग कर चुका है लेकिन पुलिस ध्यान नहीं देती। इसी वजह से वह इस कदर गुंडई कर रहा है। इन्हीं अराजक तत्वों के चलते प्रधानाचार्य ने पत्र लिखकर अपने स्कूल को परीक्षा केंद्र नहीं बनाने की मांग की थी। इस घटना के बाद प्रधानाचार्य (केंद्र व्यवस्थापक) डॉ.लवकुश सिंह और थानाध्यक्ष ने पहली पारी की परीक्षा निरस्त करने के लिए लिखा है।

मोबाइल से मॉनीटरिंग की व्यवस्था फेल

यूपी बोर्ड की गुरुवार से शुरू हुई हाईस्कूल, इंटरमीडिएट की परीक्षा की मोबाइल से मॉनीटरिंग की व्यवस्था पहले ही दिन फेल हो गई। बोर्ड की ओर से मुहैया कराए गए सिम कार्ड के काम न करने से ज्यादातर केंद्राध्यक्ष परीक्षार्थियों की उपस्थिति का ब्योरा एसएमएस के जरिये नहीं भेज सके। वहीं, कक्ष निरीक्षकों की कमी भी परेशानी का सबब बनी।

जिला विद्यालय निरीक्षक के मुताबिक देर से ड्यूटी पाने वाले कक्ष निरीक्षकों को इसकी जानकारी नहीं हो सकी। ग्रामीण इलाकों में तमाम केंद्रों पर सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी दिखे।

यूपी बोर्ड ने इस साल परीक्षा की मोबाइल से मॉनीटरिंग की व्यवस्था लागू की है। इसके तहत केंद्राध्यक्षों को प्रतिदिन परीक्षा में उपस्थित छात्रों का विवरण एसएमस के जरिये बोर्ड को भेजना है। इसके लिए बोर्ड की ओर से केंद्राध्यक्षों को सिम कार्ड मुहैया कराए गए हैं। ज्यादातर सिम कार्डों के काम न करने से यह व्यवस्था पहले ही दिन फेल हो गई। वहीं, बोर्ड ने कापी, पेपर तो मुहैया करा दिया लेकिन पर्याप्त संख्या में कक्ष निरीक्षकों की तैनाती नहीं हो सकी। पहली पाली की हाईस्कूल हिंदी की परीक्षा में केंद्राध्यक्ष कक्ष निरीक्षकों के आने का इंतजार करते रहे। कई केंद्रों पर परीक्षा कक्ष में दो की बजाय एक शिक्षक से ही काम चलाना पड़ा।

उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के जिलाध्यक्ष डॉ. हरेंद्र राय का कहना है कि बोर्ड को इस दिशा में विशेष ध्यान देना होगा, ताकि केंद्राध्यक्षों को परेशानी न हो। उन्होंने बताया कि बोर्ड ने जो सिम कार्ड दिया है, वह काम नहीं कर रहा है। ऐसे में यह व्यवस्था फेल साबित हुई।
 
रोहनिया संवाददाता के अनुसार मातादीन सुकुल स्मारक इंटर कॉलेज, भाष्करा तालाब रोहनिया के प्रधानाचार्य रंगनाथ दूबे और जगतपुर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य आरपी सिंह ने बताया कि कक्ष निरीक्षकों की कमी की वजह से परीक्षा संचालन में परेशानी का सामना करना पड़ा। आरपी सिंह ने बताया कि अधिकांश केंद्रों पर सुरक्षाकर्मी भी नहीं पहुंचे।

सिम काम न करने परीक्षार्थियों का ब्यौरा नहीं भेजा जा सका। उधर कैंप कार्यालय पर देर शाम हुई बैठक में डीएम राजमणि यादव ने अधिकारियों को नकल विहीन परीक्षा कराने का निर्देश दिया। कहा कि ग्रामीण इलाकों में तहसीलदार, नायब तहसीलदार के साथ ही जरूरत पड़ने पर लेखपाल, कानूनगो की भी ड्यूटी लगाई जाए।

सात हजार से अधिक रहे गैरहाजिर

जिले में पहले दिन की परीक्षा में सात हजार से अधिक विद्यार्थी अनुपस्थित रहे। जिला विद्यालय निरीक्षक अवध किशोर सिंह ने हाईस्कूल की परीक्षा में 7026 और इंटरमीडिएट में पांच सौ से अधिक परीक्षार्थी गैरहाजिर रहे।

मंडल में पकड़े गए 19 नकलची
बोर्ड परीक्षा के पहले दिन वाराणसी मंडल में 19 नकलची पकड़े गए। संयुक्त शिक्षा निदेशक ओमप्रकाश शुक्ल ने बताया कि बनारस में एक भी नकलची नहीं पकड़ा गया। गाजीपुर में सबसे अधिक आठ, जौनपुर में पांच, चंदौली छह परीक्षार्थियों को उड़ाका दल ने नकल करते पकड़ा। नकलचियों में 15 छात्र और चार छात्राएं शामिल हैं।

बैंड बाजा, लाउडस्पीकर पर लगे रोक
सामाजिक संस्था सत्या फाउंडेशन ने पुलिस महानिदेशक से बोर्ड परीक्षा के मद्देनजर रात दस बजे से सुबह छह बजे तक बैंडबाजा, लाउडस्पीकर, डीजे के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है। सचिव चेतन उपाध्याय ने बताया कि 31 जनवरी को भी इस संबंध में ज्ञापन दिया गया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कहा कि ध्वनि प्रदूषण से परीक्षार्थियों को परेशानी हो रही है।

बारह मुन्ना भाई, 77 नकलची पकड़े

पूर्वांचल के जिलों में गुरुवार से माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटर की बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो गई। परीक्षा में अव्यवस्था देखने को मिली।  पहले ही दिन परीक्षार्थियों की ऑनलाइन उपस्थिति भेजने की व्यवस्था फेल हो गई। दूसरे की जगह परीक्षा देते 12 और नकल करते 77 विद्यार्थी पकड़े गए।
 
वाराणसी में छात्रों की उपस्थिति, अनुपस्थिति भेजने के लिए बोर्ड ने जो सिम दिया है, वह काम नहीं कर रहा है। ऐसे में पारदर्शिता के लिहाज से बनाई गई यह व्यवस्था पूरी तरह फेल साबित हुई। यहां पहले दिन सात हजार परीक्षार्थी गैरहाजिर रहे। गाजीपुर में दूसरे की जगह परीक्षा दे रहे नौ मुन्ना भाई पकड़ लिए गए।

आजमगढ़ में दूसरे के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचे तीन मुन्नाभाई पकड़े गए। एक छात्र नकल करते पकड़ा गया और 24 कक्ष निरीक्षक कार्यमुक्त किए गए। जौनपुर में ग्रामोदय इंटर कॉलेज, गौराबादशाहपुर में एक ही कोड की कापियां दो परीक्षार्थियों को दे दी गईं। जिले में कुल पांच नकलची पकड़े गए।

बलिया में हाईस्कूल की परीक्षा में 34 तथा इंटरमीडिएट में 30 छात्रों को नकल में पकड़ा गया तो चंदौली में अव्यवस्था के बीच हुई परीक्षा में हाईस्कूल में दो और इंटर में चार छात्र और मिर्जापुर में एक छात्र नकल के आरोप में पकड़ा गया। भदोही में 50 फीसदी कक्ष निरीक्षक परीक्षा केंद्रों पर नहीं पहुंचे। इससे दो के बजाए एक-एक कक्ष निरीक्षक लगाकर परीक्षा दिलाई गई। मऊ में नकल विहीन परीक्षा कराने के दावे की हवा निकल गई और विभिन्न केंद्रों पर जमकर नकल हुई।
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पढ़ने की ललक हो तो उम्र आड़े नहीं आती

अगर इंसान में कुछ कर गुजरने की ललक हो तो उम्र भी आड़े नहीं आती है। वह अपनी लगन और मेहनत से अपनी मंजिल तक पहुंच सकता है। यह कर दिखाया है कि 45 साल की उम्र में बलवंत सिंह ने।

औंछा के गांव कुम्रहुआ निवासी बलवंत सिंह (45) का कहना है कि उसका पढ़ने का बहुत मन करता था। आर्थिक परिस्थितियां अच्छी न होने से वह नहीं पढ़ सका।

वर्तमान समय में वह एक विद्यालय में चपरासी की नौकरी करता है। उसने बताया कि इस वर्ष इंटर की परीक्षा दे रहा है। उसका सेंटर डीएवी इंटर कालेज में पड़ा है। उसने इस परीक्षा को पास करने के लिए दिनरात पढ़ाई की है। वह आगे के भी पढ़ाई करना चाहता है।

मेरिट से भर्ती, नकल रोकने में सबसे बड़ी बाधा
सरकारी नौकरियों में मेरिट से होने वाला चयन प्रदेश में नकल रोकने में सबसे बड़ी बाधा है। मेरिट व्यवस्था खत्म करके परीक्षाओं में 50 फीसदी नकल पर बिना किसी प्रयास के रोक लगाई जा सकती है। यह बातें प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री विजय बहादुर पाल ने अमर उजाला से बातचीत केदौरान कहीं। उन्होंने कहा कि नौकरियों के साथ ही बीटीसी में भी प्रवेश मेरिट के आधार पर दिया जाता है, इस पर भी रोक लगनी चाहिए।

यूपी बोर्ड परीक्षा में नकल पर नकेल लगाने के सवाल पर माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए अभिभावक जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के फेल होने में अभिभावकों का बड़ा रोल है। उन्होंने कहा कि मेरिट से चयन रोक देने पर बोर्ड परीक्षाओं में 50 फीसदी नकल अपने आप थम जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार नकल रोकने के लिए पूरी तरह से चाक चौबंद व्यवस्था लागू कर रही है।

माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री का यह बयान उनके सरकार के मुखिया और प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की घोषणा के एकदम से उलट है, जिसमें उन्होंने सिपाही भर्ती में लिखित परीक्षा हटाकर मेरिट के आधार पर चयन की व्यवस्था लागू की है। माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री से जब पूछा गया कि प्रदेश के अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड लिखित परीक्षा से करता है, जबकि राजकीय इंटर कॉलेज में शिक्षकों की भर्ती मेरिट से हो रही है। इस व्यवस्था में बदलाव के बारे में उन्होंने सहमति व्यक्त की।

अलीगढ़ में परीक्षा केंद्र के कर्मचारी की हत्या 
यूपी बोर्ड परीक्षा के पहले दिन ही प्रवेश पत्र को लेकर विवाद में चली गोली से परीक्षा केंद्र के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी मनोज कुमार की  मौत हो गई। घटना गुरुवार दोपहर करीब साढे़ 11 बजे श्री बाबूलाल इंटर कॉलेज मढ़ी भंगरा से सटे कॉलेज संचालक रामकुमार शर्मा के आवास पर हुई। मृतक के पिता रामवीर सिंह ने कॉलेज संचालक रामकुमार शर्मा, केंद्र व्यवस्थापक व प्रधानाचार्य बबलू शर्मा सहित छह लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। संदेह के आधार पर एक युवक को हिरासत में लिया गया है।

श्री बाबूलाल इंटर कॉलेज में हाईस्कूल प्रथम पाली की हिंदी की परीक्षा समाप्त होने के बाद दोपहर करीब साढे़ 11 बजे कुछ परीक्षार्थी अपना प्रवेश पत्र लेने कॉलेज पहुंचे। इस बीच प्रवेश पत्र को लेकर कॉलेज संचालक रामकुमार शर्मा के घर पर उनका केंद्र व्यवस्थापक व प्रधानाचार्य बबलू शर्मा से विवाद हो गया। बात इतनी बढ़ी कि हंगामा होने के साथ उनके बीच मारपीट शुरू हो गई। तभी किसी ने गोली चला दी जिससे 30 वर्षीय मनोज कुमार घायल हो गया। लेकिन कुछ देर बाद ही उसने दम तोड़ दिया। वह रजावल का रहने वाला था। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों के लोग इकट्ठे हो गए तथा हंगामा करने लगे। मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझाकर किसी तरह शांत किया। तभी मृतक के परिजन भी मौके पर पहुंच गए।

एसपीआरए संसार सिंह राठी, सीओ इगलास विजयेंद्र सिंह द्विवेदी और सीओ खैर भी मौके पर पहुंच गए और घटना की जांच की। इस दौरान आरोपी के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया। ग्राम बेलौठ के एक युवक को संदेह के आधार पर हिरासत में लिया गया, पर वह पुलिस जीप से कूदकर भाग गया। लेकिन 10 मिनट बाद वह खुद ही पुलिस के पास आ गया, जिससे पुलिस की पूछताछ जारी है।

संसार सिंह राठी, एसपीआरए ने बताया कि गोली किस बोर की थी इसका पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद चलेगा। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऊदल सिंह, एसओ गोंडा मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच में सही तथ्यों की जानकारी कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अवैध वसूली के लग रहे आरोप
गोंडा। मौके पर मौजूद अभिभावकों ने कॉलेज संचालक पर प्रवेश पत्र देने व नकल कराने के नाम पर अवैध वसूली का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अवैध वसूली ही घटना का मुख्य कारण है। उनका तर्क है कि घटनास्थल इंटर कॉलेज नहीं बल्कि संचालक का आवास है। प्रवेश पत्रों का वितरण आवास पर किया जा रहा था, जिससे कॉलेज संचालक की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है ।
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