यूपी बोर्ड की परीक्षा के पहले हिंदी के पेपर में ही नकलचियों ने नकल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। एक तरफ जमकर नकल करवाई गई, वहीं इस नकल में सैंकड़ों छात्रों को भी पकड़ा गया।
यूपी बोर्ड परीक्षा के पहले ही दिन एक मुन्नाभाई हत्थे चढ़ गया। गुन्नौर के डीएवी इंटर कालेज में पांच हजार रुपये लेकर दूसरे परीक्षार्थी के स्थान पर हाईस्कूल की परीक्षा देते एक युवक को पकड़ लिया गया। केंद्र व्यवस्थापक की तहरीर पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
माध्यमिक शिक्षा परिषद के बोर्ड परीक्षा केंद्र डीएवी इंटर कालेज गुन्नौर में गुरुवार को सुबह साढ़े सात बजे परीक्षा शुरू हुई। सचल दल और कक्ष निरीक्षक ने चेकिंग के दौरान एक छात्र से उसका नाम पूछ लिया तो पहले उसने नीरज बताया फिर नीरेश कुमार। पिता का नाम पूछा तो वह सकपका गया, बोला प्रवेशपत्र देखकर बताता हूं। प्रवेश पत्र देखा गया तो उस पर छात्र का नाम मुहम्मद दाउद पुत्र मुहम्मद अयूब लिखा था, लेकिन फोटो नीरेश का लगा था। जिसे प्रेमपाल सिंह इंटर कालेज सैंजना मुस्लिम के प्रधानाचार्य आर. यादव द्वारा प्रमाणित किया गया था।
केंद्र व्यवस्थापक योगेंद्र कुमार और सचल दल के अन्य सदस्य पहुंच गए। अब तक नीरेश दो पेजों पर उत्तर लिख चुका था। पड़ताल की गई तो पता चला कि नीरेश कुमार पुत्र चंदन सिंह निवासी मैढ़ोली ने 2014 में इंटरमीडिएट करके पढ़ाई छोड़ दी थी। उसने अपने परिचित मुहम्मद दाउद से पांच हजार रुपये लेकर उसके स्थान पर परीक्षा देने का जिम्मा लिया था। दाउद ने प्रेमपाल सिंह इंटर कालेज सैंजना मुस्लिम के प्रधानाचार्य से साठगांठ करके अपने प्रवेश पत्र पर नीरेश का फोटो लगवाकर प्रमाणित कराया था। केंद्र व्यवस्थापक योगेंद्र कुमार ने बताया कि छात्र को गुन्नौर कोतवाली पुलिस के हवाले करके उसके खिलाफ तहरीर दे दी गई। जिस पर पुलिस ने धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करके नीरेश को गिरफ्तार कर लिया।
विनोद कुमार जिला विद्यालय निरीक्षक संभल ने बताया कि गुन्नौर के डीएवी इंटर कालेज परीक्षा केंद्र से एक युवक को दूसरे छात्र के स्थान पर परीक्षा देते गिरफ्तार किया गया है। उसका फोटो प्रमाणित करने वाले प्रेमपाल सिंह इंटर कालेज के प्रधानाचार्य के खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की जा रही है। केंद्र व्यवस्थापकों को दिए गए सिम ठीक से कार्य नहीं कर सके। इसकी सूचना भी परिषद को भेजी गई है।
भारी अव्यवस्थाओं के बीच बोर्ड परीक्षा शुरू, पूरा सिस्टम फेल
कक्षा में 30 से 40 छात्र। सभी अपना पेपर करने में जुटे थे। हालात ऐसे थे जो सवाल नहीं आ रहा था उसे अपने साथी से पूछकर लिख रहे थे। कई छात्र एक-दूसरे की कॉपी में ताकाझांकी कर रहे थे। उन्हें रोकने और टोकने वाला कोई नहीं था। पूरी कक्षा लावारिस की तरह छोड़ दी गई थी। पानी पीने और बाथरूम जाने के लिए भी किसी की परमिशन की जरूरत नहीं थी। यह हाल बोर्ड परीक्षा का था। बृहस्पतिवार से शुरू हुई परीक्षा के पहले दिन पूरी तरह अव्यवस्था हावी रही। कक्ष निरीक्षकों की कमी के कारण दो कमरों में एक शिक्षक की ड्यूटी लगाई गई। शहर के कई केंद्रों पर पुलिस तक नहीं पहुंची। देहात की स्थिति तो और भी बदतर रही। ऐसी व्यवस्था से नकल विहीन परीक्षा कराने के दावों की पोल खुल गई।
पहले दिन सुबह की पाली में हाईस्कूल की हिंदी और इंटरमीडिएट में सैन्य विज्ञान की परीक्षा थी। दूसरी पाली में इंटर हिंदी का पेपर था। दोनों पाली की परीक्षा कराने में केंद्र व्यवस्थापकों के पसीने छूट गए। ग्रामीण के साथ शहरी क्षेत्र में भी कक्ष निरीक्षकों का भारी टोटा रहा। केंद्र व्यवस्थापकों ने कॉलेज के बाबू और चपरासी तक को कक्ष निरीक्षक के तौर पर तैनात कर दिया। उसके बाद भी कमरे खाली रह गए। विद्यालयों की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि ऐसी स्थिति में नकल विहीन परीक्षा कराना संभव नहीं है।
इन केंद्रों की स्थिति रही खराब
डीएन इंटर कॉलेज, केके इंटर कॉलेज, एसडी सदर और एसएसडी लालकुर्ती में अन्य स्टाफ को भी ड्यूटी पर लगाया गया। उसके बाद भी कई कमरे खाली रह गए। जिस कारण भारी अव्यवस्था रही। छात्रों ने उसका फायदा उठाया और जमकर नकल की। ग्रामीण क्षेत्र के बड़े परीक्षा केंद्रों का तो और भी बुरा हाल रहा। क्योंकि यहां बनाए गए परीक्षा केंद्रों पर अधिकांश शिक्षक पहले से ही ड्यूटी देने को तैयार नहीं थे।
एप की व्यवस्था धराशाई
परीक्षा के दौरान उपस्थित और अनुपस्थित की व्यवस्था लागू करने का माध्यमिक शिक्षा परिषद का सपना धराशाई हो गया है। बोर्ड की तरफ से सभी केंद्र व्यवस्थापकों को बांटे गए बीएसएनएल के अधिकांश सिम एक्टिवेट ही नहीं हो पाए हैं, जिस कारण से पहले दिन एप पर जानकारी अपलोड नहीं की जा सकी। दरअसल परिषद की तरफ से सभी परीक्षा केंद्र को सिम कार्ड दिये थे जो केंद्र व्यवस्थापकों को एंड्रायड फोन में डालकर परिषद की तरफ से जारी एप की जानकारी को डाउनलोड करना था, फिर उस पर प्रतिदिन की परीक्षा की जानकारी को एप पर अपलोड करना था।
मेरठ में सबसे ज्यादा अनुपस्थित रहे छात्र
शिक्षा विभाग की तरफ से पहली पाली की उपस्थिति का ब्योरा दिया गया है। मंडल में 14042 छात्रों ने परीक्षा छोड़ी है, जिसमें से सबसे ज्यादा 5931 छात्र मेरठ के हैं। हाईस्कूल हिंदी की परीक्षा के लिए 55172 छात्र पंजीकृत थे, जिनमें से 49241 छात्रों ने परीक्षा दी।
मंडल में पकड़े आठ नकलची
मेरठ मंडल में दोनों पालियों में आठ छात्र नकल करते पकड़े गए। बागपत में तीन, बुलंदशहर में 2, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर में एक -एक नकलची पकड़ा गया। इसके अलावा मेरठ के केके इंटर कॉलेज में एक छात्र नकल करते पकड़ा गया। पहली पारी में कोई भी छात्र नकल करते नहीं मिला था।
खानापूर्ति के लिए गए पुलिसकर्मी
सुबह और शाम की पाली में सुरक्षा व्यवस्था भी रामभरोसे रही। थाने की ओर से परीक्षा केंद्रों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। सिपाही ड्यूटी पर तो पहुंचे, लेकिन बीच में ही केंद्र छोड़कर चले गए। अधिकांश समय केंद्र बिना सुरक्षाकर्मियों के रहे।
एक्टिव रहा सचल दल
तमाम अव्यवस्थाओं के बीच सचल दल के एक्टिव रहने से कुछ राहत की सांस मिली। दोनों पालियों में सचल दल ने परीक्षा का जायजा लिया। हालांकि संख्या कम होने के कारण सभी केंद्रों पर सचल दल नहीं पहुंच पाया।