रात को नाकों पर निकलकर पुलिस सुरक्षा की जमीनी हकीकत जानना इनकी आदत में शुमार है। जन शिकायतों का निवारण भी यह अफसर जरा हट के करते हैं। खुद शिकायतकर्ता को फोन कर पूछते हैं समस्या हल हो गई क्या, जांच से संतुष्ट हो या नहीं।
अगर शिकायतकर्ता जांच से संतुष्ट न हो तो खुद मामले की पैरवी करने लगते हैं। जी हां, कुछ ऐसा ही अंदाज है धर्मशाला में तैनात एचपीएस कैडर 2010 के डीएसपी हितेश लखनपाल का। डीएसपी हितेश लखनपाल अपने व्यस्त शेड्यूल से थोड़ा समय निकालकर स्कूलों और कॉलेजों में जाकर छात्रों को एचपीएस बनने के टिप्स भी देते हैं।
29 वर्षीय हितेश कहते हैं कि बचपन से एचपीएस में जाने का जुनून था। पिता केडी लखनपाल एचपीएस अफसर थे, इसलिए घर से ही मार्गदर्शन मिला। वह बिलासपुर जिले के सोठी गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने आईएएस परीक्षा के लिए 2007 में तैयारी शुरू की थी।
साथ ही एचपीएस की परीक्षा भी दी। वर्ष 2010 में पहले ही प्रयास में हितेश लखनपाल आईएएस और एचपीएस की परीक्षा में पास हुए। इसके बाद प्रदेश पुलिस में बतौर एचपीएस अफसर ज्वाइन किया।
ऐसे की तैयारी
हितेश लखनपाल ने बताया कि उन्होंने दिल्ली में कोचिंग ली थी। सामान्य ज्ञान के लिए समाचार पत्रों सहित कंपीटिशन रिजार्ड और फ्रंटलाइन मासिक पत्रिकाएं पढ़ीं। एनसीईआरटी की किताबों का प्रयोग किया। इंटरनेट पर सरकारी वेबसाइटों, प्रेस सूचना ब्यूरो, प्लानिंग कमीशन और पीएमओ की वेबसाइटों का प्रयोग किया। किताबें खरीदने के लिए अकसर दिल्ली और चंडीगढ़ के सेक्टर 17 में जाते थे।
युवाओं को टिप्स
डीएसपी हितेश लखनपाल कहते हैं कि युवा पहले परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए लक्ष्य निर्धारित कर लें। परीक्षा के लिए किताबों का चयन करें। किताबों का गहन अध्ययन अध्ययन करने के लिए सामान्य ज्ञान की किताबें पढ़ें। इंटरनेट का इस्तेमाल करें।