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मध्यप्रदेश के कूनो में चीता प्रोजेक्ट के 4 साल: 52 चीते, 32 भारत में जन्मे; आज हजारों दीयों से रोशन होगा जंगल

Thu, 17 Sep 2026 07:51 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

कूनो में चीतों की वापसी के चार साल पूरे हो गए हैं। अब यहां 49 चीते हैं, जिनमें 32 का जन्म भारत में हुआ है। 17 सितंबर को इस उपलब्धि के मौके पर कूनो के टिकटोली गेट पर हजारों दीप जलेंगे।
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भारत में चीता देखने कहां जाएं - फोटो : Instagram
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विस्तार
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चार साल पहले 17 सितंबर 2022 को मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की वापसी हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो में छोड़ा था। अब इस परियोजना के चार साल पूरे होने पर 17 सितंबर को कूनो के टिकटोली गेट पर हजारों दीप जलाए जाएंगे। यह आयोजन सेवा संकल्प अभियान के तहत होगा। चीतों की वापसी के चार साल बाद कूनो में उनकी संख्या बढ़ी है और यहां भारत में भी शावकों का जन्म हुआ है। परियोजना ने श्योपुर को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई है।
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4 साल में क्या बदला?
चीता परियोजना के चार वर्ष पूरे होने पर देश में 52 चीते हैं। इनमें 49 कूनो नेशनल पार्क और 3 मंदसौर के गांधी सागर अभयारण्य में हैं। कुल 52 चीतों में से 32 का जन्म भारत में हुआ है। कूनो का प्राकृतिक वातावरण चीतों के प्रजनन के लिए अनुकूल साबित हुआ है। भारत में जन्मे शावकों ने परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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17 सितंबर को कूनो में क्या होगा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और चीता परियोजना के चार साल पूरे होने के मौके पर टिकटोली गेट पर हजारों दीप जलाए जाएंगे। दीपों के जरिए चीता संरक्षण और भारत में चीतों की वापसी के प्रति आभार व्यक्त किया जाएगा। 

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कूनो में अभी कितने चीते खुले जंगल में हैं?
कूनो में मौजूद 49 चीतों में से 17 चीते खुले वन क्षेत्र में घूम रहे हैं। इनमें 10 नर और 7 मादा हैं। वहीं 32 चीते सॉफ्ट रिलीज बाड़ों में हैं। इनमें 5 नर, 8 मादा और एक साल से कम उम्र के 19 शावक शामिल हैं।

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चीते भारत कब आएं?
भारत में चीता पुनर्स्थापना की प्रक्रिया लंबे प्रयासों के बाद शुरू हुई। 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते भारत लाए गए। इसके बाद 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए। 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से भी 9 चीते भारत पहुंचे।
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कूनो ही क्यों चुना गया?
चीता पुनर्स्थापना के लिए देश में कई स्थानों का अध्ययन किया गया था। 2010 में भारतीय वन्य जीव संस्थान ने संभावित स्थलों का सर्वे किया। मध्यप्रदेश के नौरादेही, कूनो-पालपुर और राजस्थान के शाहगढ़ सहित 10 स्थानों का अध्ययन किया गया। इनमें कूनो को सबसे उपयुक्त पाया गया। कूनो नेशनल पार्क का करीब 750 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र चीतों के रहवास के लिए उपयुक्त है। इसके अलावा श्योपुर और शिवपुरी जिलों में करीब 3,000 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र चीतों के स्वच्छंद विचरण के लिए उपयुक्त माना गया है।

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चीतों के लिए कूनो में क्या इंतजाम हैं?
चीतों के लिए पानी की उपलब्धता, रहवास और जरूरी सिविल कार्यों पर काम किया गया है। कूनो से लगे गांवों के लोगों को ‘चीता मित्र’ बनाया गया है। यहां चीतों के लिए पर्याप्त शिकार प्रजातियां भी मौजूद हैं।

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श्योपुर को क्या फायदा हुआ?
चीता परियोजना से श्योपुर की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी है। क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिला है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी विकसित हुए हैं। टिकटोली गेट को कूनो के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां सफारी के लिए जिप्सियां और ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध है। जल्द ही श्योपुर वनमंडल कार्यालय में भी बुकिंग काउंटर शुरू किया जाएगा। 

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कूनो सिर्फ चीतों के लिए ही खास नहीं
कूनो विंध्य की पहाड़ियों से घिरा हुआ है और यहां कूनो नदी भी बहती है। पार्क में पक्षियों की 174 प्रजातियां पाई जाती हैं। यहां सैकड़ों प्रजातियों के वन्यजीव हैं, जिनमें 12 पक्षी प्रजातियां दुर्लभ श्रेणी में मानी गई हैं। चार साल बाद कूनो में चीते सिर्फ एक संरक्षण परियोजना का हिस्सा नहीं रहे, बल्कि श्योपुर की पहचान और पर्यटन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।
 
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