इसके पहले उन्होंने रेलवे टिकट महंगे करने और बढ़ती महंगाई पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देश के अधिकांश लोग महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी व कमाई घटने से परेशान हैं। ऐसे में केंद्र सरकार की ओर से रेल का किराया बढ़ाना जनहित के खिलाफ है। यह संविधान के कल्याणकारी उद्देश्य के बजाय व्यावसायिक सोच वाला फैसला ज्यादा लगता है। सरकार को इस पर तुरंत पुनर्विचार करना चाहिए।
देश की आबादी में से लगभग 95 करोड़ लोग सरकार की कम से कम किसी एक सामाजिक कल्याण योजना का लाभार्थी बनने को मजबूर हुए हैं, जिससे ऐसे लाचार व मजबूर लोगों की संख्या अब बढ़ते-बढ़ते 64.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है। जबकि 2016 में यह संख्या करीब 22 प्रतिशत थी। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के इन आंकड़ों को भी सरकार अपनी उपलब्धि बता रही है, जो उचित नहीं है। सबको मालूम है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को कितनी परेशानी झेलनी पड़ती है।