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यूपी के 22 लाख बच्चों ने अपने परिवार के लिए छोड़ा स्कूल

Wed, 29 Jun 2016 12:51 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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बाल मजदूर - फोटो : demo pic
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भारत में इस समय एक करोड़ बच्चे किसी ने किसी कारण से पढ़ाई छोड़कर काम करके अपने परिवारों के लिए पैसा कमा रहे हैं। इनमें से 22 लाख बच्चे यूपी के हैं।
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जबकि शिक्षा के अधिकार  के अनुसार 6 से 14 साल के इन बच्चों को स्कूल जाना चाहिए। यूनिसेफ ने दुनिया भर में बच्चों के हालात पर जारी 2016 की रिपोर्ट में ऐसे कई तथ्य सामने रखे हैं। मंगलवार को राजधानी में इसे जारी किया गया।

इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम में यूनिसेफ की यूपी प्रमुख निलोफर पोरजाद ने बताया कि स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों ही महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बच्चे दयनीय स्थिति में हैं। अमीर और गरीब परिवारों में पल रहे बच्चों के लिए स्थितियां इतनी अलग हैं कि कई पीढ़ियों तक यह भेद मिटाना मुश्किल है। 
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पांच साल से कम उम्र के 3,500 बच्चे हर साल देश में किसी न किसी बीमारी, कुपोषण या अन्य वजहों से मर रहे हैं। उन्होंने कहा, आज भी देश में 61 लाख बच्चे कभी स्कूल नहीं जाते। उप्र में यह संख्या 16 लाख है। 

करीब 18.3 प्रतिशत लड़कियां पांचवीं तक की पढ़ाई पूरी होने से पहले स्कूल जाना बंद कर देती हैं, वहीं 47 प्रतिशत लड़कियां दसवीं से पहले पढ़ाई छोड़ देती हैं। उन्होंने सरकार को इन दोनों ही क्षेत्रों में बड़े स्तर पर काम करने की जरूरत बताई। 
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बच्चों के लिए मूल शिक्षा बेहद जरूरी

बाल मजदूर - फोटो : demo pic
साथ ही शिक्षकों को बेहतर ट्रेनिंग और गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया। यूनिसेफ के अधिकारी अमित वर्मा और विवेक नौटियाल ने रिपोर्ट के  कई और तथ्यों पर प्रकाश डाला।

एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक अजय कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश में 1.12 लाख प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें से करीब 80 हजार में अर्ली चाइल्ड केयर एंड एजूकेशन (ईसीसीई) सेंटर भी चल रहे हैं। लेकिन ईसीसीई और प्राथमिक विद्यालयों में कोई सामंजस्य नहीं है। 

इस कारण यहां बच्चों को इंग्लिश मीडियम या प्राइवेट स्कूल के बच्चों की तरह पहले से प्ले स्कूल की तैयारी नहीं करवाई जाती। उधर, सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को लगता है कि कक्षा-एक में आ रहे बच्चे अंकों और फोनेटिक्स की समझ रखते होंगे। 

वे सीधे आगे की गणित और वर्णमाला सिखाने लगते हैं और बच्चे मूल चीजें नहीं सीख पाते। अगर बच्चों को 8 वर्ष की उम्र तक मूल शिक्षा न मिले तो आगे की पढ़ाई में दिक्कत आ सकती है। इस नाते भी बच्चे पढ़ाई छोड़ रहे हैं। 

 यह तथ्य भी आए सामने
- गरीब परिवारों के आधे बच्चे अविकसित रह जा रहे हैं।
- 74 लाख बच्चे ढाई किलो से कम वजन के पैदा हो रहे।
- 10 से 18 साल की 18 प्रतिशत लड़कियां कुपोषित हैं।
- तीसरी में पढ़ रहे 41 प्रतिशत बच्चे कुछ लिखा हुआ पढ़ नहीं सकते। 
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