पांच सितंबर को रिलीज हो रही फिल्म मैरीकॉम के प्रमोशन के सिलसिले में लखनऊ पहुंची प्रियंका चोपड़ा ने अमर उजाला से खास बात की।
प्रियंका ने कहा कि शिक्षक दिवस पर फिल्म रिलीज हो रही है, जो कि महज संयोग है। चूंकि, जीवन में गुरुओं का बहुत महत्व होता है और फिल्म के लिए मैरी कॉम सबसे बड़ी टीचर रही हैं। लिहाजा फिल्म उनको गुरू दक्षिणा है।
टैक्स फ्री किए जाने के सवाल पर उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से कहा कि फिल्म टैक्स फ्री होती है तो अच्छा है। टैक्स फ्री करने को लेकर प्रदेश सरकार से प्रोड्यूसरों के स्तर पर बातचीत हो रही होगी, जिसकी मुझे जानकारी नहीं है।
‘असली बॉक्सरों के घूसे खाए’
फिल्म पर अभिनेत्री ने कहा कि ट्रेनिंग काफी मुश्किल रही। चूंकि, मैरी लेफ्ट हैण्डर है और मैं राइट। लिहाजा तीन महीने तक कड़ी प्रैक्टिस करनी पड़ी। इंडियन टीम के बॉक्सरों के घूसे खाने पड़े। इतना ही नहीं मणिपुरी स्टाइल की हिंदी सीखनी पड़ी। अन्य फिल्मों की तरह मैरी कॉम का रोल भी काफी चुनौतीपूर्ण रहा।
मैरी कॉम से तुलना पर प्रियंका ने कहा कि हम दोनों की जिंदगी में बहुत समानताएं हैं। मसलन, छोटे शहर से होने के बावजूद एक मुकाम हासिल किया। पुरुषप्रधान समाज में हम दोनों ने महिलाओं का परचम फहराया। हंसते हुए कहा हालांकि, मैरी अच्छी कुक है और मैं...।
शेयर कीं लखनऊ से जुड़ी यादें
लामार्टीनियर से पढ़ाई करने वाली प्रियंका चोपड़ा कहती हैं कि लखनऊ पहुंचकर लगता है घर लौट आई हूं। जीवन के यादगार लमहे शहर से जुड़े हैं। स्कूल से स्टेशन, फिर बरेली। ऐसे ही रिक्शे से गंज घूमना आज भी याद आता है।
प्रियंका ने खेलों के बारे में कहा कि बेशक फिल्म से बॉक्सिंग ही नहीं, खेल लाइमलाइट में आएंगे। लेकिन यह जरूरी है कि स्कूलों में खेलों को अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए। ताकि और भी मैरी कॉम देश को मिल सकें।
मैरी कॉम मणिपुर की ही हैं। इसलिए मणिपुर में फिल्म रिलीज होने पर वहां के लोगों की हिन्दी के प्रति सोच बदलेगी। हालांकि, इस बाबत मणिपुर सरकार से मैरी कॉम और प्रोड्यूसरों की बातचीत चल रही है। सकारात्मक जवाब मिल सकता है।