राजधानी में वायु प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए सभी चौराहों पर नियमित रूप से फव्वारे चलाए जाएंगे। इससे हवा में धूल के कण कम होंगे। साथ ही सबसे व्यस्त समय में सड़कों व चौराहों पर जाम न लगने देने का इंतजाम ट्रैफिक पुलिस करेगी। वहीं, ऐशबाग, तालकटोरा में खुले में बिल्डिंग मैटेरियल बेचने वालों पर डीएम ने कार्रवाई का आदेश कर दिया है। पूरे शहर में भी इसे लेकर अभियान चलेगा।
प्रदूषण कम करने के लिए डीएम अभिषेक प्रकाश ने सभी विभागों की बैठक बुलाई थी। इसमें यूपीपीसीबी के माइक्रो लेवल एक्शन प्लान की समीक्षा के बाद जरूरी आदेश डीएम ने दिए। प्रमुख रूप से कू ड़ा जलाने, निर्माण साइटों, सड़कों में गड्ढों, ट्रैफिक जाम से निपटा जाएगा। डीएम ने कहा कि जो कूड़ा जलाते पकड़ा जाए, उस पर सख्त कार्रवाई हो। वहीं, चौराहों पर फव्वारों को लगातार चलाया जाए। साथ ही सबसे व्यस्त समय में ट्रैफिक डायवर्जन के लिए वैकल्पिक मार्ग चिह्नित किए जाएं। व्यस्त चौराहों पर आईटीएमएस से नियमित निगरानी होगी।
डीएम ने कहा कि निर्माण साइट पर ग्रीन नेट के इस्तेमाल के अलावा धूल नियंत्रण और पानी का छिड़काव सुनिश्चित हो। बड़ी साइटों पर यूपीपीसीबी पीटीजेड कैमरा लगाकर निगरानी करे। नगर निगम, एलडीए, आवास विकास परिषद भी प्रदूषण रोकने को कार्यवाही कराएंगे। सभी विभागों को रोजाना शाम छह बजे तक रिपोर्ट भी देनी होगी।
इन कामों की रहेगी प्राथमिकता
- सड़कों पर धूल की सफाई हो, सिल्ट तुरंत हटेगी।
- सड़कों को गड्ढामुक्त करने के अलावा साइट पटरी पर घास या इंटरलॉकिंग लगे।
- मुख्य सड़कों की मशीनों से सफाई व धुलाई, इसमें एसटीपी का शोधित पानी डस्ट सपरसेंट के साथ उपयोग हो।
- मलबा, बिल्डिंग मैटेरियल जैसे मौरंग, बालू खुले में न रखी जाए।
- राजधानी से 100 फीसदी कूड़ा उठे, जिससे जलाने की शिकायतें न मिले।
- कूड़े में आग लगने पर अधिकतम 30 मिनट में नगर निगम और अग्निशमन विभाग कार्यवाही करें।
- परिवहन विभाग वाहनों के प्रदूषण की जांच शुरू करे, अवैध रूप से डीजल-टेंपो न चलें।
- इलेक्ट्रिक वाहनों के अधिक उपयोग के लिए चार्जिंग स्टेशन बढ़वाए जाएं।
- राजधानी के आसपास की सड़कों को भी एनएचएआई ठीक करेगा।
- जल निगम सीवरलाइन व अन्य कामों को ढककर करेगा, काम पूरा होने के तुरंत बाद सड़कें बनाई जाएंगी।
- सेतु निगम भी पुल, फ्लाईओवर बनाने के दौरान वायु प्रदूषण की निगरानी करे।
- पराली व अन्य फसल अवशेष जलाने से रोके जाएं और इसके लिए जागरूकता लाई जाए।
- यूपीपीसीबी औद्योगिक इकाईयों की निगरानी करेगा।
- रोडवेज व सिटी बसों के प्रदूषण की नियमित जांच होगी।