कार्यदायी संस्थाओं की गड़बड़ी रोकने में नगर निगम खुद लापरवाह बना हुआ है। 7000 स्मार्ट मोबाइल आए तीन महीने हो गए हैं और महज साढ़े तीन हजार मोबाइल ही कर्मचारियों को दिए गए हैं। ऐसे में कार्यदायी संस्थाओं की कारस्तानी जारी है।
कार्यदायी संस्था के जरिये करीब 11 हजार सफाईकर्मी लगाए गए हैं। जिनको करीब नौ हजार रुपये प्रतिमाह के हिसाब से भुगतान कार्यदायी संस्थाओं को किया जाता है, लेकिन कार्यदायी संस्थाएं कर्मचारी लगाने में फर्जीवाड़ा करती रही हैं।
संस्थाएं जितने कर्मचारी का पैसा लेती हैं उतने कर्मचारी नहीं लगाती हैं। यह कई बार सामने आ चुका है और एक सप्ताह में जोन एक के 14 वार्डों में हुई जांच में भी 50 से 70 प्रतिशत तक कर्मचारी नदारद मिले।
इस पर लगाम लगाने के लिए नगर निगम स्मार्ट मोबाइल लाया, पर खुद लापरवाह बना हुआ है। डिजिटल निगरानी और ऑनलाइन अटेंडेंस के लिए तीन महीने पहले 7000 स्मार्ट मोबाइल फोन खरीदे गए, पर अब तक महज 3500 कर्मचारियों को ही बांटे गए हैं।
ऐसे में साढ़े सात हजार कर्मचारियों की निगरानी पुराने ढर्रे पर ही है, जिसमें एक से दो प्रतिशत कर्मचारी ही गायब दिखाए जाते हैं।
घड़ी बांटने में भी हुई थी लापरवाही
इसी तरह की सुस्ती स्मार्ट घड़ी बांटने में भी दो साल पहले देखने को मिली थी। इसे लेकर सूत्रों का कहना है कि कुछ सफाई संगठनों और ठेकेदारों का विरोध तो होता है, पर निगम प्रशासन खुद लागू नहीं करना चाहता है। दिखावे के लिए वह प्रयास तो करता है पर कड़ाई नहीं करता।
स्मार्ट मोबाइल को अभी पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया गया है। आठ में से तीन जोन में यह बंट पाए हैं। मोबाइल में हाजिरी को लेकर बनाई गई प्रोग्रामिंग को पहले मोबाइल मे अपलोड किया जाता है। इसके बाद दिया जा रहा है। सभी कर्मचारियों तक मोबाइल पहुंचने में दो महीने लग जाएंगे।
- अभय पांडेय, अपर नगर आयुक्त प्रशासन