सर्दियों के दौरान बंद कमरों में रूम हीटर, मॉस्किटो कॉयल, लिक्विड रिपेलेंट और रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल नवजातों के लिए खतरनाक है। डॉक्टरों का मानना है कि मॉस्किटो कॉयल और लिक्विड में मौजूद केमिकल्स और गैस से सांस की नली में सिकुड़न आने लगती है और बच्चों को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।
गंभीर स्थिति में मौत भी हो सकती है। डॉक्टर मॉस्किटो कॉयल और लिक्विड का इस्तेमाल तुरंत बंद कर मच्छरदानी के इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं।
डफरिन अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान खान बताते हैं कि मॉस्किटो कॉयल और लिक्विड के जलने पर निकलने वाला धुआं और गैस श्वांस नलिका को नुकसान पहुंचता है।
डॉ. सलमान के मुताबिक, ओपीडी में रोजाना 150 से अधिक बच्चे आते हैं। उसमें 40 से अधिक बच्चे ब्रांकियोलाइटिस अस्थामा से पीड़ित होते हैं। इनमें इनकी सांस की नली सिकुड़ जाती है।
मां से जब पूछा गया तो पता चला कि सोते वक्त अधिकतर लोग मॉस्किटो कॉयल और लिक्विड रूम में जलाकर सोते हैं, जो बीमारी का प्रमुख कारण है।डाॅ सलमान बताते हैं कि छोटे बच्चों की श्वांस नलिका बहुत छोटी और कोमल होती है।
उसके आसपास मांसपेशियां होती हैं। श्वांस नली के बीच नियमित स्राव होता रहता है। इस स्राव के जरिये गंदगी बाहर निकलती रहती है। श्वांस नलिका जिसे विंड पाइप कहते हैं इससे हवा भीतर जाती है। फेफड़े के पास नली दो हिस्सों में बंट जाती है जिसे ब्रॉनक्यिोल्स कहते हैं।
वह बताते हैं कि मॉस्किटो कॉयल और लिक्विड के जलने पर उसमें से निकलने वाली एस-2 गैस नली को सिकोड़ने लगती है और फेफड़ों पर बुरा असर डालती है। अमेरिका में एस-2 केमिकल युक्त कॉयल या लिक्विड की बिक्री पर बैन है लेकिन भारत में कोई प्रतिबंध नहीं है और यही बीमारी की वजह है।