फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मॉस्किटो कॉयल और लिक्विड बच्चों के लिए खतरनाक, बन सकते हैं मौत की वजह

Tue, 20 Dec 2016 01:23 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
विज्ञापन
डेमो - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
सर्दियों के दौरान बंद कमरों में रूम हीटर, मॉस्किटो कॉयल, लिक्विड रिपेलेंट और रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल नवजातों के लिए खतरनाक है। डॉक्टरों का मानना है कि मॉस्किटो कॉयल और लिक्विड में मौजूद केमिकल्स और गैस से सांस की नली में सिकुड़न आने लगती है और बच्चों को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।
विज्ञापन


गंभीर स्थिति में मौत भी हो सकती है। डॉक्टर मॉस्किटो कॉयल और लिक्विड का इस्तेमाल तुरंत बंद कर मच्छरदानी के इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं।
डफरिन अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान खान बताते हैं कि मॉस्किटो कॉयल और लिक्विड के जलने पर निकलने वाला धुआं और गैस श्वांस नलिका को नुकसान पहुंचता है।

डॉ. सलमान के मुताबिक, ओपीडी में रोजाना 150 से अधिक बच्चे आते हैं। उसमें 40 से अधिक बच्चे ब्रांकियोलाइटिस अस्थामा से पीड़ित होते हैं। इनमें इनकी सांस की नली सिकुड़ जाती है।
विज्ञापन


मां से जब पूछा गया तो पता चला कि सोते वक्त अधिकतर लोग मॉस्किटो कॉयल और लिक्विड रूम में जलाकर सोते हैं, जो बीमारी का प्रमुख कारण है।डाॅ सलमान बताते हैं कि छोटे बच्चों की श्वांस नलिका बहुत छोटी और कोमल होती है।

उसके आसपास मांसपेशियां होती हैं। श्वांस नली के बीच नियमित स्राव होता रहता है। इस स्राव के जरिये गंदगी बाहर निकलती रहती है। श्वांस नलिका जिसे विंड पाइप कहते हैं इससे हवा भीतर जाती है। फेफड़े के पास नली दो हिस्सों में बंट जाती है जिसे ब्रॉनक्यिोल्स कहते हैं। 

वह बताते हैं कि मॉस्किटो कॉयल और लिक्विड के जलने पर उसमें से निकलने वाली एस-2 गैस नली को सिकोड़ने लगती है और फेफड़ों पर बुरा असर डालती है। अमेरिका में एस-2 केमिकल युक्त कॉयल या लिक्विड की बिक्री पर बैन है लेकिन भारत में कोई प्रतिबंध नहीं है और यही बीमारी की वजह है।
विज्ञापन

श्वांस नली की नमी को सूखा देता है रूम हीटर

डेमो - फोटो : demo pic
रूम हीटर की सीधी गर्मी से बचाएं
डॉ. सलमान बताते हैं कि रूम हीटर की सीधी गर्मी बच्चों की श्वांस नली की नमी को सूखा देता है। श्वांस नली जैसे ही सूखेगी बच्चे की सांस फूलने लगेगी और पसलियां तेज चलने लगती हैं।

बचाव के लिए रूम हीटर दीवार की तरफ करके लगाना चाहिए जिससे गर्मी दीवार से टकराकर रूम में पहुंचे। इसके अलावा जिस कमरे में नवजात सो रहा है और कोई सिगरेट पी रहा है तो उसका धुआं श्वास नली की कोशिकाओं को नुकसान करता है।

पालतू जानवरों से भी बच्चों को रखें दूर
घर के पालतू जानवर जैसे कुत्ते, बिल्ली, खरगोश और चिड़ियों की पहुंच से बच्चों को दूर रखना चाहिए। डॉ. सलमान बताते हैं कि जानवरों के बालों से निकलने वाली दुर्गंध और गंदगी श्वांस नलिका को ब्लॉक कर सकती है और कई बार बाल मुंह में जाकर श्वांस नलिका में फंस कर सडेन डेथ की वजह भी बनती है।

बेचैनी हो तो  डॉक्टर से लें सलाह
केजीएमयू के बाल रोग विभाग के विशेषज्ञ डॉ. एसएन सिंह बताते हैं कि परेशानी बढ़ने पर नवजात लगातार मुंह खोलकर रोता रहता है। उसे हमेशा उलझन और बेचैनी रहेगी और दूध पीना पूरी तरह बंद कर देगा। माता-पिता को नवजात को इस परेशानी को समझना होगा और बिना देर किए डॉक्टर के पास पहुंचना चाहिए। वह बताते हैं कि मच्छरों से बचाव के लिए मच्छदानी का इस्तेमाल बेहतर और सुरक्षित तरीका है। 

ब्रांको डायलेटर से बचेगी जान
डॉ. सलमान बताते हैं कि श्वास नलिका को सामान्य स्थिति में लाने के लिए ब्रांको डायलेटर का इस्तेमाल किया जाता है। वो बताते हैं कि ये इलेक्ट्रॉनिक मशीन हैं जिसमें तेज प्रेशर के साथ लिक्विड ऑक्सीजन निकलता है।

डायलेटर से लिक्विड बॉल्स सीधे श्वास तंत्रिका में पहुंचती हैं और नवजात की श्वांस नली में नमी वापस आते ही उसकी स्थिति सुधरने लगती है। वो बताते हैं कि ऐसे में बच्चे को एंटीबायोटिक दवा नहीं देनी चाहिए।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें