अचानक इतनी संख्या में कैदियों के बीमार पड़ने के पीछे कैंटीन में बिकने वाले पेय पदार्थ को भी कारण माना जा रहा है। जेल प्रशासन मामले की पड़ताल कर रहा है।
चार की तैनाती पर एक डॉक्टर के भरोसे 3500 कैदी
3540 कैदियों की क्षमता वाली जेल में करीब 3500 कैदी हैं। इनके इलाज को जेल अस्पताल में चार चिकित्सक हैं, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर एक डॉक्टर ही 24 घंटे रहता है। एक ही डॉक्टर 24 घंटे ड्यूटी करता है और फिर तीन दिन तक नहीं आता। वहीं, जेल नियमों के मुताबिक, डॉक्टर को छह घंटे नियमित और दो घंटे आनकॉल ड्यूटी का नियम है। ऐसे में एक डॉक्टर अकेले जेल आने वाले नए कैदियों के स्वास्थ्य परीक्षण से लेकर ओपीडी में मरीजों को देखने के अलावा महिला सर्किल में भी मरीज देखता है। जेल लाइन में डॉक्टरों के रहने के लिए आवास हैं, बावजूद कोई डॉक्टर जेल लाइन में नहीं रुकता।
सभी बंदियों का स्वास्थ्य सामान्य
दवा खाने से कैदियों के शरीर में ऐंठन, घबराहट और कंपकंपी आदि लक्षण सामने आए थे। जिन्हें दवा दी गई थी उनकी स्क्रीनिंग कराके प्रभावित बंदियों को जेल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। भर्ती सभी बंदियों का स्वास्थ्य सामान्य है। - आशीष तिवारी, जेल अधीक्षक
की जा रही पड़ताल
एंटी एलर्जी के लिए कैदियों को सिट्रीजिन दी जानी थी। फार्मासिस्ट ने इसके बजाय हेलोपेरिडोल दवा दे दी। यह हाई पावर दवा होती है, नतीजतन कैदियों के हाथ पैर ऐंठना, नींद व बेहोशी होने लगी। इस पर सभी को जेल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मामले की पड़ताल की जा रही है। - डॉ. शरद कुलश्रेष्ठ, अपर महानिरीक्षक, कारागार