लखनऊ। एसटीएफ टीम पर जानलेवा हमला करने के मामले में हुई जांच में पता चला है कि आरोपी सपा नेता अरुण यादव की तहसील में तैनात लेखपाल व कानूनगो ने अवैध कब्जा करने में मदद की। वहीं दो पुलिसकर्मियों ने भी सरकारी जमीन पर कब्जा कराने में सहयोग किया था। हर स्तर पर मिलीभगत की वजह से ही उसने सरकारी जमीन पर आलीशान, अहाता, पार्क और गोशाला बनवा रखा था। एसीपी और प्रशासन की ओर से गठित चार सदस्यीय टीम को कुछ ऐसे ही तथ्य हाथ लगे हैं। दावा किया जा रहा है कि जांच रिपोर्ट दो दिन में डीएम और पुलिस कमिश्नर को सौंप दी जाएगी।
अरुण यादव के इन अवैध कब्जों की पोल तब खुली थी जब उसके अहाते में टैंकर से पेट्रोल-डीजल और डिनेचर्ड स्प्रिट चोरी करने की सूचना पर एसटीएफ ने 23 मई को छापा मारा था। अरुण ने अपने साथियों के साथ सफारी गाड़ी से एसटीएफ को कुचलने का प्रयास किया था। उसके साथियों ने टीम को घेर लिया था। इसी दौरान सपा नेता अरुण भाग निकला था। उसके दो साथी पकड़ गए थे। दो दिन बाद ही अरुण व उसके तीन साथी गिरफ्तार हो चुके हैं। इसके बाद ही सामने आया था कि अरुण ने चरागाह की पौने दो बीघा जमीन पर कब्जा कर रखा था।