आकाश शर्मा, लखनऊ। भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) लखनऊ में वैज्ञानिकों ने ऐसी स्ट्रिप (पट्टी) विकसित की है, जो मिनटों में सरसों के तेल में मिलावट का खुलासा कर देगी। एक रुपये से भी कम लागत से तैयार क्रोमोजेनिक टेस्ट स्ट्रिप में सरसों तेल की एक बूंद डालने पर अगर स्ट्रिप रंग बदल दे तो समझ जाएं कि तेल मिलावटी है। वरिष्ठ वैज्ञानिक संदीप शर्मा की लैब में तैयार यह टेस्ट स्ट्रिप मिलावटखोरी का खुलासा करने में मददगार होगी।
तीन तरह से होती है मिलावट
आर्जीमोन के बीज : आर्जीमोन के बीज सरसों या राई के दानों के बराबर होते हैं। अक्सर लोग शुद्ध तेल लेने के लिए सरसों खरीदना चाहते हैं, लेकिन मिलावट करने वाले सरसों में आर्जीमोन के बीज मिला देते हैं। हालांकि, दोनों को मिलाकर तेल निकालने पर बिना लैब में टेस्ट किए आसानी से इसकी पुष्टि नहीं हो सकती।
बटर येलो : यह एक सिंथेटिक रंग यानी एक प्रकार की डाई होती है। इसका रंग पीला होने के कारण इसमें फ्लेवरिंग एसेंस मिला देते हैं, जिससे इसकी खुशबू सरसों तेल की तरह आती है। बटर येलो से तेल में एक झार (सरसों की खुशबू) सी आती है, जिससे लोग इसे असली समझ बैठते हैं।
करंजा : यह ज्यादातर गंगा बेसिन के पास पाया जाता है। इसके बीज से निकाला गया तेल भी हल्का पीला होता है। सस्ता होने के कारण इसमें भी एसेंस मिलाकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है।
रंग से पहचानें मिलावट
आर्जीमोन - मिलावट है तो स्ट्रिप का रंग भूरा हो जाएगा।
बटर येलो - मिलावट है तो स्ट्रिप का रंग हल्का पिंक हो जाएगा।
करंजा - मिलावट है तो स्ट्रिप का रंग नारंगी हो जाएगा।
कंपनियां करें पहल
वरिष्ठ वैज्ञानिक संदीप शर्मा का कहना है कि तेल का नमूना इकट्ठा कर उसे लैब भेजने और फिर रिपोर्ट आने में लगने वाले समय से बचने के लिए पेपर बेस्ड क्रोमोजेनिक टेस्ट स्ट्रिप विकसित की गई है। सरसों तेल में इन तत्वों की मिलावट से गॉल ब्लेडर का कैंसर, ड्रॉप्सी, ग्लूकोमा और आंखों की रोशनी कम हो सकती है। मिलावटी खाद्य तेल के सेवन से हृदय रोग सहित कई स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां होती हैं। यदि कोई कंपनी इस स्ट्रिप को सरसों तेल की बोतल के साथ लगाकर बेचे, तो आम आदमी के लिए सरसों का तेल जांचना आसान हो जाएगा।
युवा प्रोजेक्ट साइंटिस्ट व रिसर्च फेलो की भी मेहनत
टेस्ट स्ट्रिप बनाने में लैब में संदीप के साथ-साथ सीनियर रिसर्च फेलो सृष्टि मेहरोत्रा व प्रोजेक्ट साइंटिस्ट पवन राय की भी एक साल से अधिक की मेहनत छिपी है। पवन व सृष्टि ने बताया कि उन्होंने हर रोज घंटों रिसर्च करके इस स्ट्रिप को विकसित किया है। अब देखना यह होगा कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए कौन सी कंपनी आगे आती है।