‘मेरी कॉम’, ‘डेढ़ इश्किया’, ‘पीके’ और अब ‘बजरंगी भाईजान’। यूपी में एक के बाद एक कई फिल्मों को टैक्स फ्री तो किया जा रहा है, पर उसका पूरा फायदा राजधानी के दर्शकों को नहीं मिल पा रहा है।
मनोरंजन कर विभाग दर्शकों से प्रत्येक टिकट पर 40 प्रतिशत मनोरंजन कर वसूलता है। टैक्स फ्री होने पर इसी कर में छूट मिलती है, लेकिन विभागीय नियमों के फेर में दर्शकों को सिर्फ चुनिंदा सिनेमाघरों में ही टैक्स फ्री का लाभ मिल रहा है। जबकि एक बड़ी आबादी मल्टीप्लेक्स में फिल्में देखने जाती है।
विशेषज्ञों की मानें तो खामियां मनोरंजन कर विभाग के नियमों व मल्टीप्लेक्स मालिकों की मंशा में है, जिसे संशोधित करने की जरूरत है।
मनोरंजन कर आयुक्त सीपी सिंह बताते हैं कि पहले फिल्मों के टैक्स फ्री होने पर डिस्ट्रीब्यूटरों को सिर्फ 12 स्क्रीन ही मिलती थीं। एक जिले में केवल एक। इस नियम को 2014 में संशोधित किया गया।
इन सिनेमाघरों में हुई टैक्स फ्री
अब डिस्ट्रीब्यूटरों को टैक्स फ्री फिल्में चलाने के लिए प्रदेशभर में 200 स्क्रीन दी जाती हैं। डिस्ट्रीब्यूटर चाहे तो हफ्ते भर तक सभी स्क्रीनों का इस्तेमाल टैक्स फ्री फिल्मों के लिए कर लें या फिर तीन महीने तक टुकड़ों में इसका प्रयोग करे।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने हाल ही में कबीर खान निर्देशित ‘बजरंगी भाईजान’ को टैक्स फ्री करने की घोषणा की, जिसके बाद शुक्रवार को फिल्म का निर्माण करने वाली कंपनी इरोज इंटरनेशनल ने उन 65 सिनेमाघरों की लिस्ट मनोरंजन कर विभाग को सौंपी, जहां टैक्स फ्री फिल्म दिखाई जानी हैं।
इसमें लखनऊ के नॉवेल्टी लालबाग, नॉवेल्टी अलीगंज, प्रतिभा, साहू, हिंद, आनंद सिनेमाघर शामिल हैं। चूंकि, डिस्ट्रीब्यूटर को सिर्फ 200 स्क्रीन ही मिले हैं, जिसे वह चरणों में इस्तेमाल कर रहे हैं।
यूपी में ये फिल्में हो चुकी हैं टैक्स फ्री
मनोरंजन कर विभाग प्रत्येक टिकट पर 40 प्रतिशत इंटरटेनमेंट टैक्स वसूलता है। मसलन, यदि टिकट की दर सौ रुपये हैं तो 40 रुपये सीधे मनोरंजन कर विभाग के खाते में चले जाते हैं।
ऐसे में जब मल्टीप्लेक्स सिनेमाघरों की टिकट दरें दो सौ, चार सौ रुपये होती हैं तो अच्छी-खासी रकम टैक्स के रूप में दर्शकों को चुकानी पड़ती है। टिकट की दर तय करने का अधिकार विशुद्ध रूप से सिनेमाघर मालिकों के पास होता है।
पिछले एक वर्ष में प्रियंका चोपड़ा अभिनीत ‘मेरी कॉम’, रानी मुखर्जी की ‘मर्दानी’, अमिताभ बच्चन की ‘भूतनाथ रिटर्न्स’, ‘कटियाबाज द पावरलेस’, माधुरी दीक्षित की ‘डेढ़ इश्किया’, आमिर खान की सुपरहिट फिल्म ‘पीके’, अर्जुन कपूर की ‘तेवर’, आयुष्मान खुराना की ‘हवाईजादा’, ‘हमारी अधूरी कहानी’, ‘जय हो डेमोक्रेसी’ और सलमान खान अभिनीत ‘बजरंगी भाईजान’ टैक्स फ्री हो चुकी है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
मनोरंजक कर आयुक्त सीपी सिंह का कहना है, ‘हम नियमों के तहत ही टैक्स फ्री फिल्मों को स्क्रीन अलॉट करते हैं। इससे दर्शकों को दिक्कतें पेश आती हैं। पर, विभाग के अपने लक्ष्य होते हैं, जो पूरे करने होते हैं।
मसलन, वर्ष 2014 में विभाग का लक्ष्य 560 करोड़ रुपये रखा गया था, लेकिन फिल्मों के टैक्स फ्री होने से विभाग को आठ करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा था। इस वर्ष का टारगेट 600 करोड़ रुपये है, जिसमें से अभी तक 132 करोड़ रुपये अर्जित किए जा चुके हैं। नियमों में संशोधन की डिमाण्ड आएगी तो उसे कार्रवाई के लिए आगे प्रेषित किया जाएगा।’
वहीं उमराव (अब बंद) के सिनेमा प्रोग्रामर आजीत जैन का कहना है,‘दरअसल, फिल्म के टैक्स फ्री होने पर डिस्ट्रीब्यूटरों के सामने भी समस्याएं खड़ी हो जाती हैं। मल्टीप्लेक्स मनमानी करते हैं और टैक्स फ्री के लिए राजी नहीं होते। चूंकि, उन्हें पांच सालों के लिए सब्सिडी के तौर पर टैक्स माफ होता है।
इसलिए वे साफ मना कर देते हैं। इसके बाद डिस्ट्रीब्यूटर्स को 200 स्क्रीन्स में से उन सिनेमाघरों को चुनना पड़ता है, जहां दर्शक ज्यादा आते हों, ताकि अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें। इसलिए नियमों में संशोधन बहुत ही अनिवार्य है।’