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ग्राउंड रिपोर्ट अवध क्षेत्र-1: मुद्दों से ज्यादा जाति-मजहब पर जोर, जानें- क्या है मतदाताओं के दिल में

Tue, 04 Jan 2022 11:39 AM IST
ishwar ashish अजीत बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ

सार

यूपी चुनाव में यह बात खुलकर सामने आ रही है कि मुकाबला सपा और भाजपा के बीच ही होगा। भाजपा के पास राष्ट्रवाद और ध्रुवीकरण है जिसका जनता में प्रभाव है। मतदाता दोनों दलों को परख रहे हैं और राय बना रहे हैं। देखें, ये पूरी ग्राउंड रिपोर्ट:
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मलिहाबाद कस्बे में एक दुकान के बाहर लगी चुनावी चौपाल में अपने-अपने तर्क रखते लोग। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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जमी झील में कंकड़ी, फेंक रहे हैं लोग।

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क्यों हिलोर उठती नहीं, लगा रहे अभियोग।

चुनावी चौसर का मिजाज कुछ-कुछ कवि सत्यप्रसन्न की इन पंक्तियों जैसा ही है। रैलियों में नेता अपनी कह रहे हैं। मतदाता उनको परख रहे हैं। वे भी जमी झील में कंकड़ फेंक रहे हैं। हवा के रुख को भांपने के लिए। नेताओं के तरकश में राष्ट्रवाद, ध्रुवीकरण और जातियां हैं। इन सबके समीकरण हैं। मुद्दों का शोर भी तो है। सिर्फ शोर! जोर तो सिर्फ ध्रुवीकरण में है। अजीत बिसारिया बता रहे हैं लखनऊ, बाराबंकी और हरदोई का मौजूदा हाल...

मतदाताओं की दिल की बातों से पहले बातें चुनावी समरभूमि की। लखनऊ में विधानसभा की 9 सीटें हैं। बाराबंकी में 6 तो हरदोई में 8 सीटें हैं। यानी कुल 23 सीटें। बहरहाल 19 सीटों पर भगवा परचम फहरा रहा है। सपा के हिस्से चार सीटें हैं। बाकी दलों की दाल ही नहीं गली। न 2017 के चुनाव में नउपचुनाव में। बात वर्तमान की करें, तो मतदाताओं को कुरेदने पर जो कुछ सामने आ रहा है वह रोचक मुकाबले की तैयार होती पटकथा की ओर इशारा करता है। ज्यादातर सीटों पर भाजपा-सपा के बीच सीधी जंग के आसार बन रहे हैं। एक चीज और भी साफ हो जाती है कि मुद्दों से ज्यादा जोर जाति-मजहब का है। ऐसे में जो दल अपने आधार वोट बैंक के साथ सोशल इंजीनियरिंग से अन्य को साधने में कामयाब हो गया, उसके सिर पर ही ताज सजेगा। अलबत्ता कहीं-कहीं कांग्रेस, बसपा और आम आदमी पार्टी भी रोचक मुकाबले का हिस्सा बनेंगी।
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लखनऊ मध्य : किंतु-परंतु तो बहुत, पर राष्ट्रवाद और ध्रुवीकरण हावी
राजधानी के मध्य विधानसभा क्षेत्र में इस बार दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा। रोजगार और महंगाई को लेकर लोगों में सवाल तो हैं, पर ये मुद्दे कोई गुल खिलाएंगे भी, इसको लेकर किंतु-परंतु भी बहुत हैं। युवा मतदाताओं के बीच आम आदमी पार्टी का दखल बढ़ा है, तो कांग्रेस और बसपा भी सेंध लगाती दिख रही हैं। पर, मतदाताओं की चर्चाआें में मुख्य मुकाबला भाजपा और सपा के बीच होता ही ज्यादा सुनाई दे रहा है। बालू अड्डा पर मिले युवा सूरज गंगवार जरनल स्टोर चलाते हैं। क्या चुनावी समीकरण हो सकते हैं, इस सवाल पर सूरज कहते हैं, इस बार युवाओं में आम आदमी पार्टी का असर दिखेगा। कैसे? इस सवाल पर वह कहते हैं, आप की घोषणाएं युवाओं के दिलो-दिमाग पर ज्यादा असर करती हुई दिख रही हैं। एक बार आप को भी आजमा लेने में क्या हर्ज है? हालांकि, पास ही खड़े बारिक अली उनकी दलील से इत्तफाक नहीं रखते। बारिक कहते हैं, देख लेना इस बार साइकिल का काफी असर रहेगा। महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। वहीं, अनुज कुमार मानते हैं कि भाजपा बेहतर स्थिति में रहेगी। डालीबाग के सागा चौधरी कहते हैं कि इस चुनाव में रोजगार और महंगाई सबसे अहम मुद्दे हैं। उनकी राय में दो-तीन साल में रोजगार के अवसर कम हुए हैं। डालीबाग के अरुण वाल्मीकि भी उन्हीं की हां में हां मिलाते हैं। पर, वह यह भी जोड़ना नहीं भूलते कि चुनाव आते-आते राष्ट्रवाद और ध्रुवीकरण इतना हावी हो जाएगा कि भाजपा ही फायदे में रहेगी।

कैंट : सपा और भाजपा की ओर देख रहे मतदाता
हजरतगंज से बापू भवन होते हुए लालकुआं पहुंचे तो फ्लाईओवर के नीचे मुईद अहमद अपनी टीम के साथ फूल बेचते मिले। चुनावी माहौल पर सवाल करते ही मुईद बोल पड़े, देखिए हमारे कैंट क्षेत्र में तो माहौल भाजपा का ही दिख रहा है। पप्पू केशव और दीपक गुप्ता भी यही कहते हैं। अलबत्ता मो. सिराज कहते हैं कि सपा टक्कर में रहेगी। वह कहते हैं, हमें तो सपा के अलावा अन्य कोई पार्टी नहीं दिखाई दे रही है।

लखनऊ की इन सीटों पर ये मुद्दे हैं हावी

भवानीगंज में सियासी चर्चा में मशगूल लोग। - फोटो : amar ujala
मलिहाबाद : ध्रुवीकरण निभाएगा अहम भूमिका
मलिहाबाद सुरक्षित सीट भाजपा के पास है। पिछले चुनाव में यहां ध्रुवीकरण बड़े पैमाने पर हुआ। यहां पासी समाज के लगभग डेढ़ लाख मतदाता हैं। गौतम, मुस्लिम, यादव भी निर्णायक भूमिका में रहते हैं। पुरवा गांव के हनुमान रावत का कहना है कि मौजूदा सरकार ने अच्छा काम किया है। भदेसरमऊ गांव के संतोष मौर्य कहते हैं, गरीब मतदाता पीएम नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट देगा। वहीं, सैफलपुर गांव के सतेंद्र यादव मानते हैं कि इस सरकार में महंगाई और बेरोजगारी चरम पर पहुंच गई है। मुफ्त राशन नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार व नौकरी की जरूरत है। केवलहार निवासी सुफियान खां कहते हैं कि यहां के मुख्य व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए किसी सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

बख्शी का तालाब : दिलचस्प होगी सियासी उठापटक
बख्शी का तालाब विधानसभा क्षेत्र में सियासी उठापटक देखने को मिले तो इसमें कुछ अनोखा न होगा। यहां ब्राह्मण, क्षत्रिय और लोध निर्णायक भूमिका में रहते हैं। बीकेटी थाना रोड पर शाम को चाय की दुकान पर युवाओं और बुजुर्गों
में चल रहा संवाद भी कुछ इसी ओर इशारा करता है। 65 वर्षीय छोटेलाल मौर्य चर्चा छिड़ते ही कहते हैं, चुनाव के बाद कोई नेता नजर नहीं आता। बसपा शासन में यहां सड़कों पर काम हुआ था। 45 वर्षीय जगदीश कहते हैं, सड़क, बिजली
पानी की समस्या अब भी बनी हुई है। किसान छुट्टा जानवरों से परेशान हैं। शमशुल हक बताते हैं, देखिए लोग चाहे जो कहें, इस बार सपा के प्रति लोगों का रुझान है। सुधीर तिवारी कहते हैं, कांग्रेस के लोग भी यहां काफी मेहनत कर रहे हैं। प्रियांशु मणि त्रिपाठी और अन्नू गुप्ता कहते हैं कि बेहतर कानून-व्यवस्था के कारण माहौल भाजपा के पक्ष में है। वहीं,देवदत्त सक्सेना का मानना है कि मुफ्त राशन योजना सत्ताधारी दल को विशेष फायदा पहुंचा रहा है।

सरोजनीनगर : मुख्य लड़ाई में फिलहाल भाजपा और सपा
चुनावी माहौल कैसा है ये जानने के लिए हम सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में पहुंचे। यहां मतदाताओं से बात करने पर जो तस्वीर उभरकर सामने आई उससे साफ है कि यहां मुख्य मुकाबला फिलहाल भाजपा और सपा के बीच है। क्षेत्र में
ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब एक लाख है। वर्ष 2017 मेंे ब्राह्मण और क्षत्रिय मतदाताओं ने भाजपा के पक्ष में एकजुटता दिखाई थी। हालांिक, अब ब्राह्मण मतदाताओं का रुख काफी कुछ तय करेगा। बंथरा में पान की दुकान पर मिले राजेश साहू कहते हैं, भाजपा सरकार आने से दुनिया में भारत का मस्तक काफी ऊपर उठा है। वहीं, अरुण चौरसिया तर्क देते हैं, भाजपा सरकार ने उज्ज्वला एवं सौभाग्य योजना समेत बहुत सी योजनाएं चलाई हैं। इसका उसे लाभ
मिलता दिखाई दे रहा है। यहीं के रहने वाले राकेश चौरसिया इन सबकी दलीलों से नाइत्तफाकी जताते हैं। वह कहते हैं, भाजपा सरकार में महंगाई बहुत बढ़ी है। इस बार सपा का माहौल अच्छा है।

पश्चिम सीट : जातिगत आधार पर टिकट कर सकते हैं उलटफेर
थोड़ा आगे फ्लाईओवर पार करके हैदरगंज चौराहे पर भवानीगंज में लोग आपसी चर्चा में मशगूल मिले।  यह इलाका लखनऊ पश्चिम सीट के अंतर्गत आता है। हमने चुनावी माहौल को लेकर सवाल उठाया तो मो. यूसुफ  बोले, भाई यहां मुसलमान, ब्राह्मण और कायस्थ बहुतायत में हैं। यह सीट भले ही आज भाजपा के पास है, पर सपा ने जातिगत आधार वाले किसी नेता को टिकट दिया तो मुकाबला देखने लायक रहेगा। वहीं, सौरभ कुमार बसपा को अपनी पसंद बताते हैं, तो रवि सक्सेना कहते हैं कि भाजपा की टक्कर में यहां कोई नहीं है। कपिल राजपूत और घनश्याम कश्यप भी भाजपा को ही आगे बताते हैं।

उत्तर सीट : जीत-हार का अंतर रहेगा मामूली
ब्राह्मण, वैश्य और मुस्लिम बहुल लखनऊ उत्तर सीट इस बार किसी दल के लिए आसान नहीं कही जा सकती। इस क्षेत्र के मधेहगंज में मिले ऋषि कपूर भाजपा और सपा में ही मुख्य मुकाबला मानते हैं। लकड़ी कारोबारी असजद हाशमी और सलमान कहते हैं कि धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण नहीं हुआ तो सपा यहां किसी से कमजोर नहीं रहेगी। वहीं, रोहित शर्मा कहते हैं कि प्रत्याशी तय होने पर तस्वीर साफ होगी। देवेंद्र श्रीवास्तव को लगता है कि इस बार भी यहां से भाजपा जीतेगी।

पूर्वी सीट : भाजपा का ही रहा है दबदबा
आईटी कॉलेज के पास मिले लखनऊ पूर्वी क्षेत्र के मतदाता शशांक श्रीवास्तव कहते हैं, भाजपा सरकार अच्छा काम कर रही है। इसलिए मेरे जैसे लोग यह नहीं देखेंगे कि प्रत्याशी कौन है। कमल निशान ही पर्याप्त है। विवेकानंदपुरी के अंकित यादव कहते हैं, सबसे अहम सवाल रोजगार का है। अगर रोजगार होगा तो घर भी बना लेंगे और राशन भी खरीद लेंगे। यह सरकार रोजगार के मोर्चे पर फ्लॉप साबित हुई है। अफसर खां सपा को अपनी पसंद बताते हुए कहते हैं, लखनऊ का
ज्यादातर विकास समाजवादी पार्टी की सरकारों में ही हुआ है। पेपर मिल कॉलोनी के नीरज अवस्थी का मानना है कि लखनऊ पूर्वी सीट पर भाजपा ही जीतती रही है और ये ट्रेंड आगे भी जारी रहने की पूरी उम्मीद है।

मोहनलालगंज : त्रिकोणीय मुकाबले की तैयार हो रही पटकथा
मोहनलालगंज में भाजपा, सपा और बसपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन रहे हैं। पासी, यादव, कुर्मी, ब्राह्मण और मुस्लिम बहुल इस सीट पर हमेशा दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला है। मोहनलालगंज के मुख्य चौराहे पर मिले देवदत्त तिवारी मानते हैं कि मतदाताओं का रुझान भाजपा की ओर है। क्योंकि, केंद्र की योजनाओं का लोगों को सीधा लाभ मिल रहा है। मऊ गांव के सोनू कहते हैं, यह सरकार महंगाई पर लगाम नहीं लगा पाई। बस स्टैंड पर मिले विनीत
राजपूत कहते हैं, स्थानीय स्तर पर विकास कार्य ही नहीं हुए हैं। इसलिए जनता विकल्प तलाश रही है। अधिवक्ता हिमांशु का कहना है कि कोई कुछ भी कहे, पर यहां जातिगत समीकरण के साथ ही स्थानीय मुद्दे भी रंग दिखाएंगे। पिछले चुनाव में भाजपा ने आरके चौधरी को मैदान में उतारा, पर उन्होंने कमल निशान नहीं लिया। इसका फायदा सपा को मिला।

 

हरदोई : आठों सीटों पर देखने को मिलेगा रोचक मुकाबला

हरदोई शहर में एक चाय की दुकान पर लोगों के बीच छिड़ी सियासी बहस। - फोटो : amar ujala
हरदोई की आठों सीटों पर इस बार रोचक मुकाबला होगा। लोगों की चर्चाओं में सामने आया कि धार्मिक ध्रुवीकरण का असर इस बार कम रहेगा। सवायजपुर विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण व यादव बहुतायत हैं। यहां मिले रमेश शर्मा कहते हैं, इस सीट पर ब्राह्मणों का झुकाव जिधर होता है, वही पार्टी जीतती है। नईम सिद्दीकी कहते हैं, अब माहौल काफी अलग है।  इस बार भी भाजपा व सपा में ही मुख्य मुकाबला रहेगा। शाहाबाद विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण, क्षत्रिय, यादव, काछी और कश्यप जाति के मतदाता बहुतायत हैं। शुभम यादव छुट्टा मवेशियों का सवाल उठाते हैं। वे कहते हैं, इससे उपजी नाराजगी जरूर रंग दिखाएगी। देवेंद्र कहते हैं, हां ये बात सच है कि नाराजगी है। फिर भी इतना नहीं कि लोग बदलाव चाहते हों। वहीं, सांडी विधानसभा क्षेत्र में क्षत्रिय, यादव, ब्राह्मण और मुस्लिम बहुतायत में हैं। सियासी पंडितों का कहना है कि यहां भी भाजपा और सपा में रोचक मुकाबला होने के आसार हैं।

सदर : सपा से जीते नितिन का मोर्चा अबकी सपा से
हरदोई सदर विधानसभा क्षेत्र से नितिन अग्रवाल 2017 का चुनाव सपा के टिकट पर जीते थे, पर अब वह भाजपा के साथ हैं। वे विधानसभा उपाध्यक्ष हैं। सदर सीट से संभावित प्रत्याशी भी हैं। यहां के लोग मानते हैं कि भाजपा-सपा में कड़ी
टक्कर रहेगी। सिनेमा रोड निवासी विनय कपूर कहते हैं कि शहर में जाम की समस्या अधिक है। आज तक किसी सरकार ने बाईपास बनवाने की दिशा में पहल नहीं की है। सिनेमा चौराहे के दुकानदार राजेश कुमार दीक्षित का कहना है कि पूरे जिले में छुट्टा मवेशियों से लोग आजिज आ चुके हैं। किसान त्राहि-त्राहि कर रहा है। इसका असर चुनाव में जरूर दिखेगा।

बालामऊ : त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
बालामऊ से रामपाल वर्मा आठ बार के विधायक हैं। पिछले चुनाव में यहां बसपा दूसरे नंबर पर रही थी। मौजूदा हालत में यहां सपा व बसपा के प्रत्याशियों के भी दमदारी के साथ मुकाबले में रहने की उम्मीद है। रैदास, पासी और मुस्लिम
मतदाताओं का रुख ही प्रत्याशियों का भाग्य तय करेगा। खंजनपुरवा के धीरेंद्र सिंह व धीरज गुप्ता कहते हैं कि फिलहाल प्रत्याशी घोषित होने का इंतजार है। इसके बाद ही असली हवा पता चलेगी।

संडीला और बिलग्राम-मल्लावां : काम के आधार पर तौल रहे मतदाता
इस सीट पर ब्राह्मण, क्षत्रिय, मुस्लिम, यादव और रैदास बहुतायत हैं। संडीला को जिला बनाए जाने की मांग यहां की फिजाओं में है। मुन्नू लाल गुप्ता कहते हैं, भाजपा सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में काफी काम किया है। बिना भेदभाव के स्वरोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। इसका फायदा सत्ताधारी दल को जरूर मिलेगा। आरिफ  खान कहते हैं, सरकार रोजगार के मोर्चे पर फ्लॉप रही है। इसका असर चुनाव में दिखेगा। वहीं, बिलग्राम-मल्लावां सीट पर पिछले चुनाव में भाजपा और सपा में मुकाबला रहा था। यादव, कुर्मी, रैदास और मुसलमान मतदाताओं का रुख यहां बहुत कुछ तय कर देता है। विधानसभा क्षेत्र का बड़ा हिस्सा गंगा के किनारे भी है। बाढ़ से कटान रोकने की व्यवस्था करना यहां का बड़ा चुनावी मुद्दा है। विधानसभा क्षेत्र गोपामऊ सुरक्षित सीट है। पिछली बार की तरह इस बार भी भाजपा और सपा के बीच ही लड़ाई रहने के पूरे आसार हैं।
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बाराबंकी : सभी सीटों पर भाजपा की टक्कर सपा से होने के आसार

जिले की सभी सीटों पर सपा और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला होने की पटकथा तैयार हो रही है। जिले की 6 सीटों में से चार पर भाजपा और दो पर सपा के विधायक हैं।  रामनगर विधानसभा क्षेत्र के कोटवाधाम में मास्टर प्रेम वर्मा, पाटेश्वरी बाजपेई, नागेंद्र सिंह और केके बाजपेई सड़क के किनारे चाय की चुस्कियां लेते मिले। वे कहते हैं, इस बार भी चुनाव विकास और काम पर नहीं, जाति पर ही होने वाला है। यहां मुकाबला सपा और भाजपा के बीच ही होगा। प्रत्याशी का चेहरा तय
करेगा कि किसका पलड़ा भारी है। जैदपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रमुख चौराहा मसौली सियासी चर्चाओं का अड्डा है। यहां कटरा के नियाज अंसारी, देहड़िया गांव के रामशंकर यादव, मसौली के लालबहादुर वर्मा मिले। वे कहते हैं, इस क्षेत्र पर लंबे समय तक बेनी प्रसाद वर्मा ने अपना प्रभुत्व कायम रखा।

2017 के चुनाव में भाजपा से यहां उपेंद्र रावत पहली बार कमल खिलाए, पार्टी ने उन्हें सांसद के लिए चुनाव मैदान में उतारा तो उपचुनाव में सपा ने यह सीट फिर वापस ले ली। चुनावी चर्चा में लोग कहते हैं कि बेनी बाबू की फोन पर अपील से ही सपा की वापसी हुई थी। हालांकि, यहां सपा-भाजपा के अलावा कांग्रेस भी दम लगा रही है। कुर्सी विधानसभा के फतेहपुर चौराहा स्थित एक चाय की द़ुकान पर प्रिंस कुमार वर्मा, प्रदीप कुमार मिश्रा, कुलदीप सिंह, आशुतोष सिंह भी मानते हैं कि यहां पर भी मुकाबला सपा-भाजपा के बीच है। यही हालात दरियाबाद, हैदरगढ़ और सदर विधानसभा क्षेत्र में भी दिखी।
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