बारी-बारी से लगती है चार-चार कर्मियों की ड्यूटी
हजरतगंज के राजकीय बालगृह शिशु में कुल 99 बच्चे हैं। इसमें दो साल से कम उम्र के 62 शिशु हैं इनमें से 32 नवजात बच्चे हैं। इन्हें हर समय नजरों के सामने रखने की जरूरत होती है। इन बच्चों के साथ एक नर्स और तीन सहायिकाओं की ड्यूटी रहती है।
12 घंटे की डयूटी के बाद दूसरा स्टाफ नाइट करता है जिसमें भी चार कर्मचारी ही तैनात रहते हैं। दिन में अधीक्षिका व प्रभारी अधीक्षिका लेवल पर एक कर्मचारी की तैनाती है जबकि रात में वह अपने घर चला जाता है। ऐसे ही एक समाज सेविका की तैनाती रहती है जो दत्तक गृह के कार्यालय के कार्य को अंजाम देती हैं।
इस तरह की अव्यवस्था के साथ कर्मचारियों को वेतन न मिलने से भी काम पर असर पड़ना लाजमी है। जिला प्रोबेशन अधिकारी सुधाकर शरण पांडेय खुद मानते हैं कि क्षमता से अधिक बच्चों के बावजूद स्टाफ की कमी सबसे बड़ा कारण है। महिला एवं बाल कल्याण विभाग के बजट में देरी और भी अव्यवस्था उत्पन्न कर रही है। बजट के लिए लिखा गया है
प्राग नारायण रोड स्थित राजकीय बालगृह शिशु में सालभर के मासूम की मौत के मामले में डीएम कौशल राज शर्मा ने नर्स व आया की सेवा समाप्ति का निर्देश दिया है। मासूम की मौत देखभाल में लापरवाही से हुई थी। डीएम ने मामले की जांच अपर नगर मजिस्ट्रेट पंचम सुशील कुमार सिंह को सौंपी है।
वह शिशु गृह के स्टाफ की लापरवाही की जांच कर माहभर में रिपोर्ट सौंपेंगे। नर्स व आया आउटसोर्सिंग के आधार पर अनबुंध पर तैनात हैं। एसीएम पंचम ने जनसमुदाय से अपील की है कि मामले में कोई भी व्यक्ति अपना बयान अथवा साक्ष्य प्रस्तुत करने को 20 अक्तूबर तक किसी भी कार्यालय दिवस में कलेक्ट्रेट स्थित एसीएम पंचम कोर्ट में आ सकता है।
जिलाधिकारी ने बताया कि शुरूआती जांच में नर्स व आया को लापरवाही का दोषी मानते हुए उनकी सेवाओं को तत्काल समाप्त किए जाने का निर्देश भी बालगृह शिशु की संचालिका को दिया है।