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यूपी: जबरन धर्मांतरण मामले में चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर, गरीबों व मूक-बधिरों को बनाया निशाना

Thu, 14 Oct 2021 12:26 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

गरीबों व मूक-बधिरों को प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने के मामले में चार के खिलाफ चार्जशीट दर्ज की गई है। अवैध धर्मांतरण के लिए चलाए जा रहे गिरोह द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर और दिव्यांगों खासकर मूक-बधिरों को बहला-फुसलाकर व जबरन धर्मांतरण कराया जा रहा था।
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आरोपी उमर गौतम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गरीब और असहायों को धोखा व प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने के मामले में मुख्य आरोपी उमर गौतम के सहयोगी प्रसाद कावरे उर्फ एडम, फराज शाह, कौसर आलम और भूप्रिय बिंदों उर्फ अर्सलान के खिलाफ एटीएस के विशेष न्यायाधीश योगेंद्र राम गुप्ता की कोर्ट में चार्जशीट दायर की गई। इससे पूर्व 18 सितंबर को एटीएस ने मामले में उमर गौतम, जहांगीर आलम, राहुल भोला, मन्नू यादव समेत छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर किया था।

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एटीएस ने बुधवार को चार्जशीट में बताया कि आरोपी अवैध धर्मांतरण कराने के लिए गिरोह का संचालन कर रहे थे। इस गिरोह द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर और दिव्यांगों खासकर मूक-बधिरों को बहला-फुसलाकर व जबरन धर्मांतरण कराया जा रहा था। इसके लिए इस्लामिक दवाह सेंटर के अलावा डेफ सोसायटी को केंद्र बनाकर पूरे भारत में धर्मांतरण के लिए जाल बिछाया।

यही नहीं, विदेशों में बैठे आरोपियों के सहयोगियों ने हवाला व अन्य तरीकों से भारी धन की व्यवस्था की। दूसरी ओर धर्म बदलने वाले मूल धर्म में वापस न जाएं, इसके लिए गिरोह प्रशिक्षण देने के साथ कार्यशालाओं का आयोजन करता था। इससे विभिन्न धर्मों की बीच वैमनस्यता व कटुता बढ़ी है।

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अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर एक सिंडिकेट भी बनाया

चार्जशीट के मुताबिक विवेचना में पता चला कि उमर गौतम व जहांगीर आलम ने अपने गिरोह के राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर एक सिंडिकेट भी बनाया था। इसका उद्देश्य धर्म बदलने वाले लोगों को उनके मूल धर्म के प्रति विद्वेष पैदा करना था। जिससे देश की अखंडता व एकता को बढ़ाने वाले बंधुता पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

उमर गौतम के सिंडिकेट को महाराष्ट्र में संचालित करने के आरोपी भूप्रिय बिंदो, कौसर आलम, फराज शाह व प्रसाद कावरे की मुख्य भूमिका है। चार्जशीट में कहा गया कि आरोपियों को धर्मांतरण के लिए विदेशों से मौलाना कलीम सिद्दीकी के जामिया इमाम वलीउल्लाह ट्रस्ट और हवाला के जरिए करोड़ों रुपये की फंडिंग की गई है। आरोपी पूछताछ में इस धन के बारे में कोई ब्योरा नहीं दे सके हैं।
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