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बलात्कार की घटनाओं पर सोशल मीडिया में वायरल हो रही संवेदनशील कविता

काव्य डेस्क

Viral Kavya
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कई दिनों तक लड़की रोयी , बस्ती रही उदास
कई दिनों तक बड़की भाभी सोयी उसके पास
कई दिनों तक माँ की हालत रही बेतरह पस्त
कई दिनों तक बाबा दुअरे देते रह गये गस्त

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बरी हो गया ये भी अन्त में

निर्णय आया लोकतंत्र में कई दिनों के बाद
बरी हो गया ये भी अन्त में कई दिनों के बाद
हवशी हैं मुसकाकर झाँकें कई दिनों के बाद
फफक उठी घर भर की आँखें कई दिनों के बाद

कविता बिहाग वैभव (Vihag Vaibhav ) के फेसबुक वाल से ली गई है। बाबा नागार्जुन की मशहूर कविता "अकाल के बाद" की तर्ज पर बलात्कार की नृशंसता पर लिखी गई यह कविता मानवीय संवेदनाओं को झकझोरती है।
8 वर्ष पहले
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