विज्ञापन

Social Media Poetry: गीत प्रेम के गाया करती, बेसुध मुझे निहारा करती

काव्य डेस्क

Viral Kavya
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  गीत प्रेम के गाया करती,
बेसुध मुझे निहारा करती,
अपनी छत पर बैठ अकेले,
बस मुझको दोहराया करती,
तब मैं  तुमसे पूछ रहा हूँ,
क्या तुम मेरा प्यार नहीं  हो,

बनठन कर वो पढ़ने आती,
मेरी खातिर रूप सजाती,
अपने दिल के हर कोने में,
बस मेरी तस्वीर बसाती,
तब मैं तुमसे पूछ रहा हूँ....

सुबह शाम बस मुझको रटना,
अंतर्मन में मेरा खटकना,
सखियाँ पूछे  प्यार हुआ क्या,
झट  से तेरा उन्हें डपटना,
तब मैं तुमसे पूछ  रहा हूँ......
विज्ञापन

हुई निशा और घोर अँधेरा,
तुझको मेरी याद ने घेरा,
आँखें मूँद के तुझको  मेरे,
होने का एहसास नहीं हैं,
तब मैं तुमसे पूछ रहा हूँ.....

रात - रात भर नींद न आना,
नैनों से आँसू टपकाना,
खुद से खुद को समझाना,
फिर खुद की बात का समझ न आना,
तब मैं तुमसे पूछ रहा हूँ.....

मुझे नहीं मालूम है कुछ भी,
बस मैं इतना कहती हूँ,
जीवन के हर एक लम्हें में,
साथ  तुम्हारे रहती हूँ,
बहुत हो गई प्रश्न उत्तरी,

आज  पहेली सुलझा  दो,
कुछ  मैं तुमको बतलाऊंगी,
कुछ  तुम मुझको  बतला दो,
मैं तो बनकर के जोगन,
तेरी राधा  बन जाऊँगी,

तुम मुझको  इतना बतला दो,
क्या तुम मेरे श्याम नहीं हो,
 
साभार: प्रतीक शुक्ला की फेसबुक वाल से
3 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manoj Kumar

420 कविताएं

View Profile

Kaizad B.

7 कविताएं

View Profile