हमें उपेक्षित करते रहना
ताकत मिलती है !
औषधियाँ देने वाले जब
रोगों के कारक हो जाते
शब्दवेध के अभ्यासी जब
मृग के संहारक हो जाते
धनुष देखकर ही पैरों को
हिम्मत मिलती है !
प्रश्नावलियां बन जायें जब
सारी ही उत्तरमालाएं
तो फिर कोई हमें बताये
लेकर प्रश्न कहाँ हम जाएं
कितने ही प्रश्नों की हल से
सूरत मिलती है !
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हमें उपेक्षित करने वाले
नई दिशाएं दे जाते हैं
अनजाने ही सही किंतु वे
कई दवाएं दे जाते हैं
वीरानों में भटके बिना कहाँ
छत मिलती है !
साभार: ज्ञानप्रकाश आकुल की फेसबुक वाल से