विज्ञापन

Social Media Poetry: घड़ी से लाख महँगा तो घड़ी का वक़्त होता है

काव्य डेस्क

Viral Kavya
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            घड़ी से लाख महँगा तो घड़ी का वक़्त होता है 
        
                                                    
                            
जो इसकी क़द्र करता है उसी का वक्त होता है 

उदासी लुत्फ़ लेने को चली आती है महलों से
हमारी झोपड़ी में जब ख़ुशी का वक़्त होता है 

जकड़ लेती है पैरों को हमारे गाँव की मिट्टी 
दुबारा शहर को जब वापसी का वक्त होता है 

यही वो उम्र है जब चाहकर भी मर नहीं सकते 
यही वो उम्र है जब ख़ुद-कुशी का वक़्त होता है

सितम ये है कि हम जैसे ग़रीबों की कलाई में 
घड़ी होती किसिस की है किसी का वक्त होता है

~ आदित्य सिंह “आदी”

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7409 कविताएं

View Profile