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Attitude Shayari: सूरज हूँ ज़िंदगी की रमक़ छोड़ जाऊँगा

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                                                  सूरज हूँ ज़िंदगी की रमक़ छोड़ जाऊँगा 
मैं डूब भी गया तो शफ़क़ छोड़ जाऊँगा 
~ इक़बाल साजिद
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हम-सफ़र चाहिए हुजूम नहीं 
इक मुसाफ़िर भी क़ाफ़िला है मुझे 

~ अहमद फ़राज़

काश वो रास्ते में मिल जाए 
मुझ को मुँह फेर कर गुज़रना है 

~ फ़हमी बदायूनी
 

रास आने लगी दुनिया तो कहा दिल ने कि जा 
अब तुझे दर्द की दौलत नहीं मिलने वाली 

~ इफ़्तिख़ार आरिफ़

कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है वास्ता कोई 
तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं किया
 
~ जौन एलिया
2 वर्ष पहले
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