विज्ञापन

प्रो. योगेश छिब्बर की मशहूर ग़ज़ल: लेती नहीं दवाई अम्मा, जोड़े पाई-पाई अम्मा

काव्य डेस्क

Urdu Adab
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  लेती नहीं दवाई अम्मा,
जोड़े पाई-पाई अम्मा ।

दुःख थे पर्वत, राई अम्मा
हारी नहीं लड़ाई अम्मा ।

इस दुनियां में सब मैले हैं 
किस दुनियां से आई अम्मा ।

दुनिया के सब रिश्ते ठंडे 
गरमागरम रजाई अम्मा । 

जब भी कोई रिश्ता उधड़े
करती है तुरपाई अम्मा ।

बाबू जी तनख़ा लाये बस
लेकिन बरक़त लाई अम्मा ।

बाबूजी थे छड़ी बेंत की 
माखन और मलाई अम्मा ।
 
विज्ञापन

बाबूजी के पाँव दबा कर 
सब तीरथ हो आई अम्मा ।

नाम सभी हैं गुड़ से मीठे 
माँ जी, मैया, माई, अम्मा ।

सभी साड़ियाँ छीज गई थीं 
मगर नहीं कह पाई अम्मा ।

अम्मा में से थोड़ी - थोड़ी 
सबने रोज़ चुराई अम्मा । 

घर में चूल्हे मत बाँटो रे 
देती रही दुहाई अम्मा ।

बाबूजी बीमार पड़े जब 
साथ-साथ मुरझाई अम्मा ।

लड़ते-लड़ते, सहते-सहते,
रह गई एक तिहाई अम्मा ।

बेटी की ससुराल रहे खुश
सब ज़ेवर दे आई अम्मा ।

अम्मा से घर, घर लगता है
घर में घुली, समाई अम्मा ।

बेटे की कुर्सी है ऊँची, 
पर उसकी ऊँचाई अम्मा ।

दर्द बड़ा हो या छोटा हो 
याद हमेशा आई अम्मा।

घर के शगुन सभी अम्मा से,
है घर की शहनाई अम्मा ।

सभी पराये हो जाते हैं, 
होती नहीं पराई अम्मा ।
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12479 कविताएं

View Profile

Ramesh Raj

25 कविताएं

View Profile

Dr Preeti

44 कविताएं

View Profile