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Social Media Poetry: शहर में हर सिम्त छाई चुप्पियां हैं

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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                            शहर में  हर सिम्त  छाई चुप्पियां हैं
        
                                                    
                            
बहुत  घबराई  हुई सी तितलियां है

कत्ल आधी  रात को कोई  हुआ है
औ सियासत में बहुत सरगर्मियां हैं

मोतबर सब  लोग  सजदे में खड़े हैं
उड़ रही  इंसानियत की धज्जियां हैं

सच खड़ा ही रह गया बस चीखता
पा गए छल-छद्म सारी  सुर्खियां हैं

अब कहां  सच  बोलने  वाले  बचे हैं
सज रही खबरों की केवल अर्थियां हैं

सुबह  से  कोई   मुनादी  हो  रही  है
भर  गई सब  गांव  की पगडंडियां हैं

उसके हिस्से में नहीं कुछ भी बचा है
खून से भीगी  हुई   बस   चिट्ठियां हैं

साभार: ओम निश्चल की फएसबुक वाल से  

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2 महीने पहले
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