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Obaidullah Aleem: दिल ही थे हम दुखे हुए तुम ने दुखा लिया तो क्या

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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दिल ही थे हम दुखे हुए तुम ने दुखा लिया तो क्या
तुम भी तो बे-अमाँ हुए हम को सता लिया तो क्या

आप के घर में हर तरफ़ मंज़र-ए-माह-ओ-आफ़्ताब
एक चराग़-ए-शाम अगर मैं ने जला लिया तो क्या

बाग़ का बाग़ आप की दस्तरस-ए-हवस में है
एक ग़रीब ने अगर फूल उठा लिया तो क्या

लुत्फ़ ये है कि आदमी आम करे बहार को
मौज-ए-हवा-ए-रंग में आप नहा लिया तो क्या

अब कहीं बोलता नहीं ग़ैब जो खोलता नहीं
ऐसा अगर कोई ख़ुदा तुम ने बना लिया तो क्या

जो है ख़ुदा का आदमी उस की है सल्तनत अलग
ज़ुल्म ने ज़ुल्म से अगर हाथ मिला लिया तो क्या

आज की है जो कर्बला कल पे है उस का फ़ैसला
आज ही आप ने अगर जश्न मना लिया तो क्या

लोग दुखे हुए तमाम रंग बुझे हुए तमाम
ऐसे में अहल-ए-शाम ने शहर सजा लिया तो क्या

पढ़ता नहीं है अब कोई सुनता नहीं है अब कोई
हर्फ़ जगा लिया तो क्या शेर सुना लिया तो क्या

2 वर्ष पहले
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