रिश्ता-ए-दिल को मैं ने तोड़ दिया
बात करना भी उन से छोड़ दिया
अब न आँसू हैं और न आहें हैं
दिल को उन की तरफ़ से मोड़ दिया
उन के जाने पे ये हुआ महसूस
रूह ने गोया जिस्म छोड़ दिया
आबले चलने में जो थे हाइल
ख़ार-ए-सहरा ने उन को फोड़ दिया
है यक़ीनन वो क़ाबिल-ए-तौसीफ़
जिस ने टूटे दिलों को जोड़ दिया
वक़्त का ज़ोर उस पे क्या जिस ने
पंजा-ए-वक़्त को मरोड़ दिया
उस ने आँसू की आरज़ू की थी
हम ने 'ख़ुर्शीद' दिल निचोड़ दिया
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